Gorakhpur: गोरखपुर में करंट से संविदा लाइनमैन की मौत, एसएसओ के विरुद्ध मुकदमा दर्ज
रामकिशुन बेलीपार थानाक्षेत्र के ककराखोर गांव के रहने वाले थे। उनके तीन बच्चे हैं। पांच वर्ष पहले उन्होंने बिजली निगम में लाइमैन पद पर काम करना शुरू किया था। बुधवार को गीडा उपकेंद्र के मेहरौली फीडर पर फाल्ट की वजह से बिजली आपूर्ति ठप हो गई थी।
विस्तार
बिजली निगम के जिम्मेदारों की लापरवाही से बुधवार को एक और संविदा लाइनमैन रामकिशुन (46) की मौत हो गई। नौ जून को राजधानी उपकेंद्र के संविदाकर्मी की मौत के बाद मुख्य अभियंता ने फोन पर शटडाउन लेने-देने की व्यवस्था पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया था।
लेकिन, बुधवार को फिर यही लापरवाही हुई। बेलीपार थानाक्षेत्र के चारपानी इलाके में दोपहर 2 बजकर 22 मिनट पर फाल्ट सही करने के लिए लाइनमैन रामकिशुन (46) बिजली के खंभे पर और हादसे का शिकार हो गए।
घटना के बाद स्थानीय लोगों और रामकिशुन के गांव वालों ने मौके पर हंगामा शुरू कर दिया। मामले में रामकिशुन की पत्नी संगीता की तहरीर पर बिजली घर के एसएसओ सत्येंद्र पांडेय के खिलाफ आईपीसी की धारा 304 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। बेलीपार थानाध्यक्ष संदीप यादव ने बताया कि मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। जांच में विभिन्न बिंदुओं पर पड़ताल की जाएगी।
जानकारी के मुताबिक रामकिशुन बेलीपार थानाक्षेत्र के ककराखोर गांव के रहने वाले थे। उनके तीन बच्चे हैं। पांच वर्ष पहले उन्होंने बिजली निगम में लाइमैन पद पर काम करना शुरू किया था। बुधवार को गीडा उपकेंद्र के मेहरौली फीडर पर फाल्ट की वजह से बिजली आपूर्ति ठप हो गई थी। दोपहर 2 बजे के बाद फाल्ट को सही करने बिजली निगम के संविदा कर्मचारियों की टीम गई।
प्रतिनिधि के अनुसार लाइनमैन रामकिशुन बिजली के खंभे पर चढ़े। इसके पांच मिनट बाद ही करंट लगने से नीचे आ गिरे। इसकी जानकारी स्थानीय लोगों ने बिजली घर को दी। स्थानीय लोगों की सूचना पर मृतक रामकिशुन के परिजन और गांव वाले भी मौके पर आ गए। स्थानीय गांव वालों ने बिजली कर्मियों पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए रामकिशुन के शव को बीच सड़क पर ही रखकर हंगामा करना शुरू कर दिया। हंगामे की सूचना पर पहुंची बेलीपार थाने की पुलिस ने परिजनों को समझाने के बाद शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। इधर, हंगामा सुनकर बिजलीकर्मी, बिजली घर से भाग गए।
शटडाउन कैसे लिया, पता नहीं
लाइनमैन रामकिशुन की मौत करंट लगने से हो गई। लेकिन, गीडा के अधिशासी अभियंता से लेकर अन्य जिम्मेदारों को पता ही नहीं कि शटडाउन कितने बजे का था और किसने लिया? जबकि, मुख्य अभियंता एके सिंह ने 10 दिन पहले ही निर्देशित किया था कि नियमानुसार ही शटडाउन लिया जाएगा। फोन पर शटडाउन लेने और देने वाले कर्मचारियों या क्षेत्र के जिम्मेदारों पर कार्रवाई तय की जाएगी। लेकिन फिर लापरवाही से एक लाइनमैन की जान चली गई।
गीडा अधिशासी अभियंता सोमदत्त शर्मा ने कहा कि शटडाउन कैसे लिया गया था? ये जांच का विषय है। अब लाइनमैन की मौत हो गई और वह बिजली निगम परिवार का हिस्सा था। घटना बेहद दुखद है। करंट लगने से ही मौत हुई है, ये तो तय है। बिजली घर से शटडाउन कब, कैसे दिया गया था, इसकी जांच करवाई जाएगी।
जून में भी हो चुकी है एक मौत
नौ जून को फाल्ट ठीक करते समय करंट आने से राजधानी उपकेंद्र के संविदा लाइनमैन मुराली की मौत हो गई थी। तब पता लगा कि पहले से लगी रोक के बाद भी फोन पर ही शटडाउन लिया गया था। मामले में विद्युत सुरक्षा की टीम जांच कर रही है। जांच रिपोर्ट के बाद अगर दोष बिजली निगम का सिद्ध होता है तो मृतक के परिजनों को पांच लाख रुपये की सहायता राशि दी जाएगी।