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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Gorakhpur News ›   DDU: There will be academic audit of teachers, there will be improvement in research and teaching system.

डीडीयू : शिक्षकाें की होगी अकादमिक ऑडिट, शोध व शिक्षण प्रणाली में आएगा सुधार

Wed, 27 Dec 2023 02:06 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर Updated Wed, 27 Dec 2023 02:06 AM IST
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DDU: There will be academic audit of teachers, there will be improvement in research and teaching system.
- हर वर्ष शिक्षकों को देना होगा अपनी वर्ष भर की उपलब्धियों का ब्योरा
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- ऑडिट के निर्धारित सात बिंदुओं के मानक पर खरा उतरने की होगी चुनौती
संवाद न्यूज एजेंसी
गोरखपुर। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के शिक्षकों की अकादमिक ऑडिट कराई जाएगी। विश्वविद्यालय में अध्ययन-अध्यापन से लेकर शोध व नवाचार तक नजर रखने और इसके लिए प्रोत्साहित करने के लिए न केवल अकादमिक ऑडिट की योजना बनाई है बल्कि उसका क्रियान्वयन भी शुरू कर दिया है। इसके जरिये शिक्षकों के कार्य और उनकी कार्यप्रणाली पर नजर रखी जाएगी। अकादमिक उत्कृष्टता को लेकर उनके द्वारा किए जा रहे प्रयास का मूल्यांकन भी किया जाएगा।

विश्वविद्यालय प्रशासन ने अकादमिक ऑडिट के लिए बाकायदा सात बिंदुओं पर एक प्रोफार्मा तैयार किया है। शिक्षकों के सामने इन बिंदुओं के मानकों पर खरा उतरने की चुनौती होगी। प्रोफार्मा पर शिक्षकों को अपनी वर्ष भर की उपलब्धियों की रिपोर्ट प्रस्तुत करनी हाेगी। इसमें उन्हें विद्यार्थियों के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाने का ब्योरा तो देना ही होगा, साथ ही खुद की अकादमिक उपलब्धियां भी गिनानी होंगी।
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छात्रों के प्रति जिम्मेदारी में यह बताना होगा कि उन्होंने कितनी कक्षाएं लीं। अध्यापन प्रक्रिया को बेहतर बनाने के लिए कौन-कौन से नवाचार किए। विद्यार्थियों के लिए कितने ई-लेक्चर और मूक लेक्चर बनाए। कितनों की शोध प्रक्रिया आगे बढ़ाई या कितने शोध को अंतिम रूप दिया। अकादमिक उपलब्धियों में उन्हें पब्लिकेशन, प्रोजेक्ट व किताब के प्रकाशन के साथ-साथ शोध के पेटेंट की स्थिति बतानी होगी।
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शिक्षकों को यह भी बताना होगा कि अकादमिक गतिविधियां राष्ट्रीय स्तर तक सिमटी रहीं या उनकी दस्तक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी हुई। शिक्षकों को अकादमिक ऑडिट के तहत मांगी गई जानकारी ई-मेल के माध्यम से साॅफ्ट काॅपी में आइक्यूएसी ‘आंतरिक गुणवत्ता सुनिश्चियन प्रकोष्ठ’ और कुलसचिव को तो भेजनी ही होगी, साथ ही उसकी हार्ड काॅपी उपलब्ध करानी होगी। वहां भेजने से पहले सभी को अपने विभागाध्यक्ष से प्रोफार्मा में दी गई जानकारी अग्रसारित करानी होगी। इसके पीछे विश्वविद्यालय की मंशा शिक्षकों के माध्यम से विभागीय ऑडिट सुनिश्चित करने की है।
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रैंक में सुधार के साथ नैक मूल्यांकन में मिलेगा लाभ
विश्वविद्यालय प्रशासन का मानना है कि अकादमिक ऑडिट से इससे शिक्षण और शोध में तो सुधार तो होगा ही राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विश्वविद्यालय की साख भी बढ़ेगी। इसका माध्यम नैक मूल्यांकन और राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग बनेगी। ऑडिट से उपलब्ध डाटा का इस्तेमाल नैक मूल्यांकन और एनआईआरएफ और क्यूएस वर्ल्ड रैंकिंग आदि में किया जाएगा। इससे नैक मूल्यांकन में मिले ए-प्लस प्लस ग्रेड को कायम रखना आसान होगी, राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग भी सुधरेगी।


कोट...
विश्वविद्यालय में शिक्षण कार्य और शोध व नवाचार को बढ़ावा देने में अकादमिक ऑडिट कारगर साबित होगी। इससे कमियां भी सामने आएंगी, जिसे सुधारा जा सकेगा। ऑडिट प्रोफार्मा के मानक पर शिक्षक व विभाग अपनी उपलब्धियों का मूल्यांकन कर सकेंगे, उससे उन्हें और बेहतर करने की प्रेरणा भी मिलेगी।

प्रो. पूनम टंडन, कुलपति, डीडीयू
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