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डीडीयू : वरिष्ठता क्रम बदलने पर उठाया सवाल, राजभवन को लिखा पत्र
Sat, 03 Feb 2024 09:58 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
Updated Sat, 03 Feb 2024 09:58 AM IST
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वरिष्ठता क्रम बदलने से पहले कार्य परिषद सदस्य प्रो. सुभी समाजशास्त्र विभाग की थीं अध्यक्ष
वरिष्ठता क्रम लागू होने के बाद प्रो. अनुराग के विभागाध्यक्ष बनने पर भी उठाया सवाल
संवाद न्यूज एजेंसी
गोरखपुर। गोरखपुर विश्वविद्यालय में शिक्षकों के वरिष्ठता निर्धारण के बाद एक बार फिर गरमाहट आ गई है। कार्य परिषद सदस्य प्रो. सुभी धुसिया ने एक माह में दूसरी बार राजभवन को पत्र लिखकर पूरे मामले की जांच की मांग की है। सूत्रों के मुताबिक वरिष्ठता को लेकर कार्य परिषद की कार्यवाही रजिस्टर में भी उन्होंने नोट ऑफ डिसेंट लगाया है।
प्रो. सुभी धुसिया जुलाई में ही वरिष्ठता के चक्रानुक्रम में समाजशास्त्र की विभागाध्यक्ष बनीं थीं। बृहस्पतिवार को कार्य परिषद की बैठक के बाद डीडीयू प्रशासन द्वारा जारी आदेश के बाद प्रो. अनुराग द्विवेदी को समाजशास्त्र का विभागाध्यक्ष बनाया गया है। उन्होंने कार्यभार भी ग्रहण कर लिया है।
वरिष्ठता निर्धारण में उन्हें जूनियर बताए जाने पर एक माह पूर्व भी प्रो. धुसिया ने राजभवन को पत्र लिखा था। इस संबंध में राजभवन ने डीडीयू प्रशासन से जांच कराकर आख्या मांगी थी। इस बीच कार्य परिषद की बैठक के दिन ही उन्होंने पुन: राजभवन को पत्र लिखा है। कुलपति और कुलसचिव को भी उन्होंने इसकी प्रति भेजी है।
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पत्र हो रहा वायरल
पत्र के मुताबिक प्रो. सुभी और प्रो. अनुराग की नियुक्ति वर्ष 2001 में हुई थी। प्रो. सुभी ने 20 जुलाई और प्रो. अनुराग ने 21 जुलाई को विभाग में ज्वाइन किया था। इस तरह वे एक दिन की सीनियर हैं। छह पेज के पत्र में उन्होंने शासनादेश का भी हवाला दिया है। यह पत्र सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।
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फेसबुक पर भी की टिप्पणी
प्रो. सुभी ने सोशल मीडिया ‘फेसबुक’ पर भी इस संबंध में पोस्ट किया है। उन्होंने प्रो. अनुराग को बधाई देते हुए लिखा है, इससे कुछ इतर सवाल हैं। जानती हूं ये फोरम इसके लिए नहीं है, पर जहां से जवाब मिलना था, उस संस्था ने कोई जवाब देना जरूरी नहीं समझा। अगर कोई मसला किसी सर्वोच्च संस्था में विचाराधीन है तो क्या उसके अधीन संस्था फैसला ले सकती है?
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तीन विभागों में अध्यक्ष बदलने की सुगबुगाहट
कार्य परिषद में वरिष्ठता सूची की रिपोर्ट प्रस्तुत किए जाने के बाद तीन अन्य विभागों में भी विभागाध्यक्ष बदलने की सुगबुगाहट तेज हो गई है। चर्चा है कि हिन्दी विभाग के अध्यक्ष पद पर जल्द ही आदेश जारी हो सकता है। दिसंबर 2021 में प्रो. कमलेश गुप्त के निलंबन के कारण वे विभागाध्यक्ष नहीं बन पाए थे। वरिष्ठता के चक्रानुक्रम में वे विभागाध्यक्ष बन सकते हैं। विज्ञान संकाय के दो प्रमुख विभागों में भी अध्यक्ष बदल सकते हैं।
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विभागाध्यक्ष कक्ष में ताला, छुट्टी पर गई प्रो. सुभी
विश्वविद्यालय प्रशासन से समाजशास्त्र विभाग का अध्यक्ष प्रो. अनुराग द्विवेदी को बनाए जाने के बाद वह कार्यभार ग्रहण कर शुक्रवार को विभाग पहुंचे। प्रो. सुभी के अवकाश पर होने के चलते विभागाध्यक्ष के कार्यालय पर ताला लगा रहा। बशर्ते प्रो. अनुराग स्टाफ कक्ष में बैठकर आने-जाने वाले लोगों से मिलकर उनका अभिवादन स्वीकार करते रहें।
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वरिष्ठता क्रम लागू होने के बाद प्रो. अनुराग के विभागाध्यक्ष बनने पर भी उठाया सवाल
संवाद न्यूज एजेंसी
गोरखपुर। गोरखपुर विश्वविद्यालय में शिक्षकों के वरिष्ठता निर्धारण के बाद एक बार फिर गरमाहट आ गई है। कार्य परिषद सदस्य प्रो. सुभी धुसिया ने एक माह में दूसरी बार राजभवन को पत्र लिखकर पूरे मामले की जांच की मांग की है। सूत्रों के मुताबिक वरिष्ठता को लेकर कार्य परिषद की कार्यवाही रजिस्टर में भी उन्होंने नोट ऑफ डिसेंट लगाया है।
प्रो. सुभी धुसिया जुलाई में ही वरिष्ठता के चक्रानुक्रम में समाजशास्त्र की विभागाध्यक्ष बनीं थीं। बृहस्पतिवार को कार्य परिषद की बैठक के बाद डीडीयू प्रशासन द्वारा जारी आदेश के बाद प्रो. अनुराग द्विवेदी को समाजशास्त्र का विभागाध्यक्ष बनाया गया है। उन्होंने कार्यभार भी ग्रहण कर लिया है।
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वरिष्ठता निर्धारण में उन्हें जूनियर बताए जाने पर एक माह पूर्व भी प्रो. धुसिया ने राजभवन को पत्र लिखा था। इस संबंध में राजभवन ने डीडीयू प्रशासन से जांच कराकर आख्या मांगी थी। इस बीच कार्य परिषद की बैठक के दिन ही उन्होंने पुन: राजभवन को पत्र लिखा है। कुलपति और कुलसचिव को भी उन्होंने इसकी प्रति भेजी है।
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पत्र हो रहा वायरल
पत्र के मुताबिक प्रो. सुभी और प्रो. अनुराग की नियुक्ति वर्ष 2001 में हुई थी। प्रो. सुभी ने 20 जुलाई और प्रो. अनुराग ने 21 जुलाई को विभाग में ज्वाइन किया था। इस तरह वे एक दिन की सीनियर हैं। छह पेज के पत्र में उन्होंने शासनादेश का भी हवाला दिया है। यह पत्र सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।
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फेसबुक पर भी की टिप्पणी
प्रो. सुभी ने सोशल मीडिया ‘फेसबुक’ पर भी इस संबंध में पोस्ट किया है। उन्होंने प्रो. अनुराग को बधाई देते हुए लिखा है, इससे कुछ इतर सवाल हैं। जानती हूं ये फोरम इसके लिए नहीं है, पर जहां से जवाब मिलना था, उस संस्था ने कोई जवाब देना जरूरी नहीं समझा। अगर कोई मसला किसी सर्वोच्च संस्था में विचाराधीन है तो क्या उसके अधीन संस्था फैसला ले सकती है?
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तीन विभागों में अध्यक्ष बदलने की सुगबुगाहट
कार्य परिषद में वरिष्ठता सूची की रिपोर्ट प्रस्तुत किए जाने के बाद तीन अन्य विभागों में भी विभागाध्यक्ष बदलने की सुगबुगाहट तेज हो गई है। चर्चा है कि हिन्दी विभाग के अध्यक्ष पद पर जल्द ही आदेश जारी हो सकता है। दिसंबर 2021 में प्रो. कमलेश गुप्त के निलंबन के कारण वे विभागाध्यक्ष नहीं बन पाए थे। वरिष्ठता के चक्रानुक्रम में वे विभागाध्यक्ष बन सकते हैं। विज्ञान संकाय के दो प्रमुख विभागों में भी अध्यक्ष बदल सकते हैं।
विभागाध्यक्ष कक्ष में ताला, छुट्टी पर गई प्रो. सुभी
विश्वविद्यालय प्रशासन से समाजशास्त्र विभाग का अध्यक्ष प्रो. अनुराग द्विवेदी को बनाए जाने के बाद वह कार्यभार ग्रहण कर शुक्रवार को विभाग पहुंचे। प्रो. सुभी के अवकाश पर होने के चलते विभागाध्यक्ष के कार्यालय पर ताला लगा रहा। बशर्ते प्रो. अनुराग स्टाफ कक्ष में बैठकर आने-जाने वाले लोगों से मिलकर उनका अभिवादन स्वीकार करते रहें।