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गोरखपुर: सात विद्यार्थियों से स्टार्टअप की शुरुआत करेगा डीडीयू, विशेषज्ञ दिखाएंगे सफल होने की राह
Sat, 15 May 2021 11:59 AM IST
vivek shukla
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Sat, 15 May 2021 11:59 AM IST
सार
इनोवेशन एंड इंक्यूबेशन सेंटर से विद्यार्थियों को जोड़ने की तैयारी शुरू। 100 स्टार्टअप शुरू होगा, मार्गदर्शन के साथ आर्थिक मदद भी दिलाएगा विवि।
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DDU Gorakhpur
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय इनोवेशन और इंक्यूबेशन सेंटर से सात विद्यार्थियों के साथ स्टार्टअप की शुरूआत करेगा। इसके लिए विवि बहुत जल्द स्टार्टअप शुरू करने में मदद के लिए विद्यार्थियों को आमंत्रित करने जा रहा है। भविष्य में सेंटर से कुल 100 स्टार्टअप शुरू करने की योजना है। जिन विद्यार्थियों का चयन किया जाएगा, उन्हें स्टार्टअप कंपनी खोलने से लेकर प्रशिक्षण देने और आर्थिक मदद भी विश्वविद्यालय करेगा।
विश्वविद्यालय ने पहले चरण का खाका तैयार कर लिया है। इसकी जिम्मेदारी भी तय कर दी गई है। सभी जिम्मेदारों के बीच समन्वय बैठक भी हो चुकी है। अधिष्ठाता छात्र कल्याण प्रो. अजय सिंह ने बताया कि सेंटर के समन्वय की जिम्मेदारी प्रो. अजेय कुमार गुप्ता को सौंपी गई है। सह समन्वयक के तौर पर प्रो. दिव्या रानी सिंह और डॉ. स्मृति मल्ल को नामित किया गया है।
प्रो. अजेय और प्रो. दिव्या रानी तीन-तीन विद्यार्थियों को स्टार्टअप शुरू करने में मदद करेंगे जबकि वेस्ट मैनेजमेंट पर स्टार्टअप शुरू करने वाले विद्यार्थी की मदद डॉ. स्मृति मल्ल करेंगी। प्रो. दिव्या रानी को एग्रो बेस्ट स्टार्टअप के मार्गदर्शन का जिम्मा सौंपा गया है। चयनित विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय द्वारा नामित विशेषज्ञ की संपर्क में लाया जाएगा।
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विश्वविद्यालय ने पहले चरण का खाका तैयार कर लिया है। इसकी जिम्मेदारी भी तय कर दी गई है। सभी जिम्मेदारों के बीच समन्वय बैठक भी हो चुकी है। अधिष्ठाता छात्र कल्याण प्रो. अजय सिंह ने बताया कि सेंटर के समन्वय की जिम्मेदारी प्रो. अजेय कुमार गुप्ता को सौंपी गई है। सह समन्वयक के तौर पर प्रो. दिव्या रानी सिंह और डॉ. स्मृति मल्ल को नामित किया गया है।
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प्रो. अजेय और प्रो. दिव्या रानी तीन-तीन विद्यार्थियों को स्टार्टअप शुरू करने में मदद करेंगे जबकि वेस्ट मैनेजमेंट पर स्टार्टअप शुरू करने वाले विद्यार्थी की मदद डॉ. स्मृति मल्ल करेंगी। प्रो. दिव्या रानी को एग्रो बेस्ट स्टार्टअप के मार्गदर्शन का जिम्मा सौंपा गया है। चयनित विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय द्वारा नामित विशेषज्ञ की संपर्क में लाया जाएगा।
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यह विशेषज्ञ कंपनी स्थापित करने से लेकर बिजनेस को आगे बढ़ाने तक में विद्यार्थी की मदद करेंगे। स्टार्टअप शुरू करने वाले विद्यार्थियों को पुराने इन्टरप्रेन्योर से मार्गदर्शन दिलाने की व्यवस्था भी विश्वविद्यालय करेगा, जिससे किसी भी स्थिति में विद्यार्थियों का प्रयास असफल न होने पाए। प्रो. अजय सिंह ने बताया कि विद्यार्थियों को धन के लिए मदद कराने में नाबार्ड को सेंटर से जोड़ा जाएगा। फिलहाल सभी कार्य ऑनलाइन किए जाएंगे। कोरोना का संक्रमण थमते ही स्टार्टअप को मूर्त रूप देने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।
कार्यशाला में दिखाएंगे सफल होने की राह
स्टार्टअप के लिए विद्यार्थियों का चयन उनकी योजना की सार्थकता पर किया जाएगा। चयनित विद्यार्थियों को अपनी योजना की खूबी और कमी का पता चल सके, इसके लिए विश्वविद्यालय के ह्यूमन रिसोर्स डेवलपमेंट सेंटर की ओर से कार्यशाला आयोजित की जाएगी। कार्यशाला से ऐसे विषय विशेषज्ञों और सफल उद्यमियों को जोड़ा जाएगा, जो विद्यार्थियों को स्टार्टअप से सफलता की राह दिखा सकें।
गोरखपुर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राजेश सिंह ने बताया कि इनोवेशन और इंक्यूबेशन सेंटर के माध्यम से विद्यार्थियों को स्टार्टअप शुरू करने में हर संभव मदद की जाएगी। विश्वविद्यालय ऐसे विद्यार्थियों को अवसर देने जा रहा रहा है जिन्हें अवसर न मिलने पर उनके विचार धरातल पर नहीं आ पाते हैं। पूरा विश्वास है कि विश्वविद्यालय की यह योजना बहुत कारगार साबित होगी।
कार्यशाला में दिखाएंगे सफल होने की राह
स्टार्टअप के लिए विद्यार्थियों का चयन उनकी योजना की सार्थकता पर किया जाएगा। चयनित विद्यार्थियों को अपनी योजना की खूबी और कमी का पता चल सके, इसके लिए विश्वविद्यालय के ह्यूमन रिसोर्स डेवलपमेंट सेंटर की ओर से कार्यशाला आयोजित की जाएगी। कार्यशाला से ऐसे विषय विशेषज्ञों और सफल उद्यमियों को जोड़ा जाएगा, जो विद्यार्थियों को स्टार्टअप से सफलता की राह दिखा सकें।
गोरखपुर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राजेश सिंह ने बताया कि इनोवेशन और इंक्यूबेशन सेंटर के माध्यम से विद्यार्थियों को स्टार्टअप शुरू करने में हर संभव मदद की जाएगी। विश्वविद्यालय ऐसे विद्यार्थियों को अवसर देने जा रहा रहा है जिन्हें अवसर न मिलने पर उनके विचार धरातल पर नहीं आ पाते हैं। पूरा विश्वास है कि विश्वविद्यालय की यह योजना बहुत कारगार साबित होगी।