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Gorakhpur News: गोरखपुर विश्वविद्यालय में अब ग्रीष्मावकाश पर रार, कटौती का आरोप
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गोरखपुर। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय में ग्रीष्मकालीन अवकाश को लेकर प्रशासन और शिक्षकों के बीच ठनती दिख रही है। अंदरखाने शिक्षक इसे लेकर आक्रोश तो जता रहे हैं लेकिन खुलकर नहीं बोल रहे। गुआक्टा ने ग्रीष्मावकाश बढ़ाने की मांग की है।
कुलसचिव की ओर से जारी आदेश के मुताबिक, एक से 30 जून तक विश्वविद्यालय में ग्रीष्मावकाश रहेगा। इस दौरान सभी प्रशासनिक एवं विभागीय कार्यालय खुले रहेंगे। परीक्षाएं, प्रवेश एवं मूल्यांकन कार्य निर्धारित कार्यक्रम के तहत ही संचालित होते रहेंगे। परीक्षा, प्रवेश और मूल्यांकन कार्यों में नामित शिक्षक संबंधित तिथियों पर अपनी उपलब्धता सुनिश्चित करेंगे। एक जुलाई से नए सत्र का शुभारंभ होगा।
विश्वविद्यालय के शिक्षकों का कहना है कि पहले परीक्षाएं समाप्त हो जाने के बाद करीब डेढ़ महीने तक ग्रीष्मावकाश घोषित किया जाता था। अब इसके समय में कटौती की जा रही है। पिछले सत्र में भी पांच जून से 11 जुलाई तक ग्रीष्मावकाश घोषित किया गया था।
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गुआक्टा के महामंत्री डॉ. निरंकार राम त्रिपाठी ने कहा कि ग्रीष्मावकाश में कटौती बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इसे लेकर संगठन का प्रतिनिधिमंडल विश्वविद्यालय प्रशासन से मिलेगा। कम से कम डेढ़ महीने का ग्रीष्मावकाश होना चाहिए। यदि ग्रीष्मावकाश की समयावधि नहीं बढ़ाई जाती तो आंदोलन किया जाएगा।
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कुलसचिव की ओर से जारी आदेश के मुताबिक, एक से 30 जून तक विश्वविद्यालय में ग्रीष्मावकाश रहेगा। इस दौरान सभी प्रशासनिक एवं विभागीय कार्यालय खुले रहेंगे। परीक्षाएं, प्रवेश एवं मूल्यांकन कार्य निर्धारित कार्यक्रम के तहत ही संचालित होते रहेंगे। परीक्षा, प्रवेश और मूल्यांकन कार्यों में नामित शिक्षक संबंधित तिथियों पर अपनी उपलब्धता सुनिश्चित करेंगे। एक जुलाई से नए सत्र का शुभारंभ होगा।
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विश्वविद्यालय के शिक्षकों का कहना है कि पहले परीक्षाएं समाप्त हो जाने के बाद करीब डेढ़ महीने तक ग्रीष्मावकाश घोषित किया जाता था। अब इसके समय में कटौती की जा रही है। पिछले सत्र में भी पांच जून से 11 जुलाई तक ग्रीष्मावकाश घोषित किया गया था।
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गुआक्टा के महामंत्री डॉ. निरंकार राम त्रिपाठी ने कहा कि ग्रीष्मावकाश में कटौती बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इसे लेकर संगठन का प्रतिनिधिमंडल विश्वविद्यालय प्रशासन से मिलेगा। कम से कम डेढ़ महीने का ग्रीष्मावकाश होना चाहिए। यदि ग्रीष्मावकाश की समयावधि नहीं बढ़ाई जाती तो आंदोलन किया जाएगा।