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सीमाओं से परे हैं भारत-नेपाल के सांस्कृतिक संबंध : प्रो. भागवत

Sun, 03 Mar 2024 01:31 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sun, 03 Mar 2024 01:31 AM IST
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Cultural relations between India and Nepal are beyond borders: Prof. Bhagwat
महाराणा प्रताप महाविद्यालय में अंतरराष्ट्रीय सेमिनार का दूसरा दिन
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दोनों देशों के संबंध को एक-दूसरे के पारस्परिक सहयोग से और मजबूत बनाया जा सकेगा : देवेंद्र

संवाद न्यूज एजेंसी
गोरखपुर। भारत और नेपाल भौगोलिक रूप से भले ही सीमाओं में बंटे हैं, लेकिन दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक संबंध सीमाओं से परे हैं। दोनों के आध्यात्मिक दर्शन-चिंतन का मूल विश्व शांति और चराचर जगत का कल्याण है। भारत में सर्व पूज्य गुरु गोरखनाथ नेपाल के भी आदि गुरु हैं। नेपाल के गोरखा लोगों का ‘गोरखा’ नाम गुरु गोरखनाथ के नाम से ही संबंध रखता है।
ये बातें वाल्मीकि विद्यापीठ, काठमांडो (नेपाल) के प्राचार्य प्रो. भागवत ढकाल ने महाराणा प्रताप महाविद्यालय, जंगल धूसड़ में आयोजित ‘भारत-नेपाल सांस्कृतिक अंतरसंबंधों की विकास यात्रा : अतीत से वर्तमान तक’ विषयक तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सेमिनार के दूसरे दिन तकनीकी सत्र को संबोधित करते हुए कहीं।
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मध्य पश्चिम विश्वविद्यालय, सुर्खेत, नेपाल के उप कुलपति नंद बहादुर सिंह ने कहा कि भारत और नेपाल के आपसी संबंध बहुत गहरे हैं। लुंबिनी विश्वविद्यालय, नेपाल के सहायक आचार्य डॉ. शिवकांत दूबे ने कहा कि भारत-नेपाल का संबंध रोटी-बेटी का है। इन संबंधों का मुख्य आधार सनातन धर्म एवं संस्कृति है। इस सत्र की अध्यक्षता डीडीयू की कला संकाय अधिष्ठाता प्रो. कीर्ति पांडेय ने की। डीडीयू के सेवानिवृत प्रो. सुधाकर लाल श्रीवास्तव ने भी विचार रखे।
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पारस्परिक सहयोग से और मजबूत होंगे संबंध : कंडेल
विशिष्ट सत्र में विषय विशेषज्ञ नेपाल के पूर्व गृह राज्यमंत्री देवेंद्र राज कंडेल ने कहा कि भारत और नेपाल, दोनों राष्ट्रों के संबंध को एक दूसरे के पारस्परिक सहयोग से और मजबूत बनाया जा सकेगा। नेपाली कांग्रेस की केंद्रीय सदस्य पुष्पा भुषाल ने कहा कि राजनीतिक तंत्र, कूटनीतिक तंत्र, आर्थिक तंत्र दोनों ही राष्ट्रों की लगभग एक समान है।
विधायक कोसी प्रदेश (नेपाल) भीम पराजुली ने कहा कि भारत-नेपाल संबंध केवल राजनीतिक नहीं है बल्कि यह दोनों देशों के जनमानस का संबंध है। ग्रामीण विकास अध्ययन दांग, नेपाल के प्राध्यापक डॉ. शरद शर्मा ने कहा कि युवा शक्ति की भागीदारी से दोनों राष्ट्रों के मध्य व्यावहारिक संबंधों को मजबूती मिलेगी।
नेपाल के प्रधानमंत्री के पूर्व सलाहकार कृष्णा अनिरुद्ध गौतम ने आर्थिक संबंधों की भी मजबूती पर जोर दिया। अध्यक्षता करते हुए डीडीयू के रक्षा अध्ययन विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. हर्ष सिन्हा ने कहा कि भारत-नेपाल संबंधों की उन्नति में बहुआयामी पक्ष की जानकारी आवश्यक है।


''''भारत-नेपाल का संबंध हवा और पानी का भी''''
एक तकनीकी सत्र की अध्यक्षता करते हुए नेपाल संस्कृत विश्वविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र के कार्यकारी निदेशक प्रो. सुधन पौडेल ने कहा कि भारत नेपाल का संबंध हवा व पानी का भी है। विषय विशेषज्ञ नेपाल के प्रतिष्ठित साहित्यकार नवीन बंधु पहाड़ी ने कहा कि दोनों देश पौराणिक काल से एक संस्कृति के पोषक हैं। त्रिभुवन विश्वविद्यालय, काठमांडो के सेवानिवृत्ति प्रो. राजाराम सुवेदी आदि ने भी विचार रखे। गोरखपुर विश्वविद्यालय के प्राचीन इतिहास विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. राजवंत राव व अन्य ने भारत-नेपाल के मैत्री संबंधों की ऐतिहासिकता पर मंथन किया। एक अन्य सत्र की अध्यक्षता त्रिभुवन विश्वविद्यालय काठमांडो के प्रो. सुबोध शुक्ला ने की। सभी सत्रों में अतिथियों का स्वागत प्राचार्य डॉ. प्रदीप कुमार राव ने किया।
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