भर्ती परीक्षा में सेंधमारी के लिए बनाया 'द सॉल्वर गैंग', 12 लोगों से एसटीएफ कर रही पूछताछ
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दिल्ली पुलिस भर्ती की ऑनलाइन परीक्षा में सेंधमारी के लिए ‘द सॉल्वर गैंग के साथी’ नामक गिरोह बनाया गया था। इसका पर्दाफाश एसटीएफ की छानबीन से हुआ है। इन गिरोह ने वेबसाइट भी बनाई थी ताकि लोग आसानी से संपर्क साध सकें। दूसरी तरफ फरार अच्युतानंद की तलाश में पुलिस की टीमें लगी हैं। अच्युतानंद के पकड़े जाने के बाद कई और राज भी खुलकर सामने आएंगे।
जानकारी के मुताबिक, शनिवार को एसटीएफ ने गिरोह के 12 लोगों को गिरफ्तार कर प्रतियोगी परीक्षा में गड़बड़ी की साजिश का भंडाफोड़ किया था। इस मामले में गोरखपुर के लोगों की भूमिका भी सामने आई थी। पता चला कि किस तरह से एक अवैध काम को भी वैध तरीके से चलाने की कोशिश की जा रही थी।
कैंट थाने में केस दर्ज होने के बाद से ही पुलिस ने इस पहलु पर जांच शुरू कर दी है। कई अहम सुराग भी मिले हैं। अब पूरा ध्यान बांसगांव इलाके के डोनखर वार्ड नंबर छह निवासी अच्युदानंद यादव की गिरफ्तारी पर है ताकि साक्ष्यों को मजबूती से जुटाया जा सके।
बिहार से बनाया गया था फोटोयुक्त प्रवेश पत्र
परीक्षा में धांधली के लिए अभ्यर्थियों का फर्जी पत्र बिहार के रोहतास जिले के विक्रमगंज निवासी महेश कुमार के स्टूडियों से बनाया गया था। गोरखपुर के रानीडीहा के भी एक स्टूडियो का नाम सामने आया है। लेकिन अब तक की जांच में यह पता चला है कि लोकल स्तर पर यह लोग ज्यादा काम नहीं करते थे बिहार से ही पूरी सेटिंग कर लेते थे। अचानक अभ्यर्थी मिलने पर ही यह लोग स्थानीय स्तर पर काम किया करते थे।
यह था मामला
एसटीएफ ने दिल्ली परीक्षा में सॉल्वर को बैठाकर धांधली करने वाले 12 लोगों को शनिवार को गिरफ्तार किया था। इनका एक साथी फरार है। पुलिस ने इस मामले में रोहतास के महेंद्र सिंह, बर हार के धनंजय कुमार, गुलहरिया के गोपालपुर निवासी अशोक कुमार मौर्या, प्रयागराज निवासी जयप्रकाश यादव, देवरिया के मईल निवासी अमित सिंह, खोराबार निवासी विजेंद्र सिंह, सहजनवां निवासी विकास सिंह, औरेया निवासी अभिषेक यादव, इटावा निवासी पिंटू यादव, गुलरिहा के टिकरिया निवासी रामअषीष मिश्रा, संतकबीरनगर के महेंद्र प्रताप और कुशीनगर के अरविंद सिंह को गिरफ्तार किया था। इसके बाद ही पूरा मामला खुलकर सामने आया था।