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खाकी शर्मसार: यहां पहले भी पुलिसवालों ने वर्दी पर लगाए हैं दाग, इनकी करतूत जानकर हो जाएंगे हैरान

Fri, 22 Jan 2021 11:55 AM IST
vivek shukla शिवम सिंह, गोरखपुर।
शिवम सिंह, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Fri, 22 Jan 2021 11:55 AM IST
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Special story of up police crime in gorakhpur
प्रतीकात्मक तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला।
उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले में खाकी को शर्मसार करने वाली घटनाएं पहले भी सामने आई हैं। 25 दिसंबर 2020 को ही एफआईआर दर्ज करने में आनाकानी और मुकदमे से नाम हटाने के लिए रुपये मांगने के आरोप में गोला थाने में तैनात दरोगा विवेक चतुर्वेदी के खिलाफ भ्रष्टाचार की धाराओं में केस दर्ज कराया गया। भ्रष्टाचार का आरोप जांच में सही पाया गया तो एसएसपी जोगेंद्र कुमार ने दरोगा को निलंबित कर दिया।
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वहीं दूसरी तरफ गोवंश तस्करी में देवरिया के सलेमपुर थाने में तैनात सिपाही रामानंद यादव को गोरखपुर पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेजा था। एसएसपी जोगेंद्र कुमार के कार्यकाल में अगर घटनाएं हुईं तो पुलिस उसके पर्दाफाश में भी अव्वल रही है। अपराध में पुलिस वालों का नाम आया तो उनके खिलाफ भी केस दर्ज किया गया। पीपीगंज थाने में भी बदसलूकी किए जाने के मामले में दरोगा पर केस दर्ज हुआ था।
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जानकारी के मुताबिक, संगीन धाराओं में अपराधियों को सलाखों के पीछे भेजने वाले पुलिसकर्मी कई बार महकमे की बदनामी का कारण बने हैं। गोरखपुर रेंज में ही बीते वर्षों में कई पुलिस वाले इसका उदाहरण हैं जो अपराध से नाता रख चुके हैं। वर्दी वालों पर जब भी आरोप लगे हैं, संगीन रहे हैं। कोई छोटा मामला नहीं रहा है। कभी हत्या तो कभी अपहरण कर फिरौती, दुष्कर्म जैसे अपराध में इनकी संलिप्तता मिली है।
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केस एक

इससे पहले गोरखपुर में एसएसपी रहे सत्यार्थ अनिरुद्ध पंकज सख्त रवैये के लिए जाने जाते थे। उनके कार्यकाल में उरूवा थाने में तैनात रहे दरोगाओं पर 18 दिसंबर 2017 को अपहरण कर रंगदारी मांगने का केस दर्ज हुआ था। एक बार फिर लंबे समय बाद उसी तेवर में कार्रवाई होने से महकमे में कई तरह की चर्चाएं हैं। सभी अफसरों की सख्ती की प्रशंसा कर रहे हैं। वहीं दागदार छवि वाले पुलिसकर्मियों में हड़कंप है। पुलिस वालों ने इस कार्रवाई को 'जैसे को तैसा' का नाम भी दे डाला है।

18 दिसंबर 2017: उरूवा थाने में तैनात रहे ट्रेनी दरोगा अभिजीत कुमार और रघुनंदन त्रिपाठी को गिरफ्तार किया गया था। आरोप था कि बिहार के गोपालगंज के छात्र एहसान आलम को धोखे से उसका दोस्त अफजल गोरखपुर लाया था फिर परिचित दोनों दरोगा की मदद से तीन लाख रुपये की फिरौती मांगी गई थी। मामला संज्ञान में आने पर तत्कालीन एसएसपी सत्यार्थ अनिरुद्ध पंकज ने दोनों पर केस दर्ज कराकर गिरफ्तारी कराई थी।

केस दो
2006 में कुशीनगर जिले के एक कारखाने में युवक की हत्या हुई थी। जिसका सिर काट दिया गया था। आरोप था कि सरकारी जीप का इस्तेमाल कर दरोगा निर्भय नारायण सिंह ने शव को गंडक नदी में बहा दिया था। इस मामले में आईजी के आदेश पर तब केस दर्ज हुआ था और बाद में दरोगा की गिरफ्तारी भी हुई थी। यह मामला भी काफी चर्चित रहा था। इसमें पूरी कार्रवाई आईजी की देखरेख में हुई थी।

केस तीन

2000 में शाहपुर थाने में पूछताछ को लाए गए एक युवक की मौत हो गई थी। आरोप था कि एएसपी ने मारपीट की, इसमें थानेदार भी शामिल थे। पुलिस ने इस मामले में हत्या का केस तत्कालीन थानेदार रहे संजय सिंह पर दर्ज किया था। बाद में उनकी गिरफ्तारी की गई थी और जेल भेजा गया था। तब एसएसपी विजय कुमार यहां पर थे और उनके आदेश पर ही कार्रवाई हुई थी लेकिन माना जाता है कि इस मामले में एक प्रमुख सचिव के आदेश पर ही पुलिस हरकत में आई थी।

केस चार
22 मई 2019 को वरिष्ठ मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉक्टर रामशरण श्रीवास्तव से रंगदारी वसूलने के मामले में ट्रांसपोर्ट नगर चौकी इंचार्ज रहे शिव प्रकाश सिंह और कथित पत्रकार प्रणव त्रिपाठी पर एफआईआर दर्ज की गई थी। मगर यह केस पुलिस ने नहीं दर्ज किया था। ना ही तब डॉक्टर को पुलिस पर भरोसा था। दो लाख रुपये देने के बाद डॉक्टर ने सीधे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात कर शिकायत की थी और उनके ही आदेश पर रातोंरात पुलिस हरकत में आ गई थी। आरोपियों पर केस दर्ज करने के साथ ही उनकी गिरफ्तारी भी की गई थी। पुलिस ने इस मामले में रुपये भी वापस कराए थे।
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