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कौन है रामलीला कमेटी के 2 महामंत्री की हत्या का मास्टरमाइंड? जानते बहुत लोग हैं, मुंह कोई नहीं खोलता

Wed, 04 Mar 2020 02:14 PM IST
vivek shukla डिजिटल न्यूज डेस्क, गोरखपुर।
डिजिटल न्यूज डेस्क, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Wed, 04 Mar 2020 02:14 PM IST
सार

  • वर्ष 2011 में 10 महीने के भीतर दोनों को मारी गई थी गोलियां  
  • शूटरों पर जताई थी आशंका, पर क्यों और किसने करवाई हत्या इस राज से पर्दा नहीं उठा

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murder of 2 General Ministers of Ramlila Committee news in Gorakhpur
प्रतीकात्मक तस्वीर

विस्तार

11 जनवरी 2011 को धर्मशाला के उस मकान में कुछ हल्की सी आवाज हुई होगी। शायद रिवाल्वर में साइलेंसर लगा हुआ था। गोली बहुत नजदीक से मारी गई थी। मारने वाले को उस घर का चप्पा-चप्पा पता था, क्योंकि कब वह आया, कब काम तमाम किया, कब चला गया, यह घरवालों को भी नहीं पता चला।

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अचानक बेटी पहुंची तो पिता को फर्श पर गिरा देखा, जहां पिता गिरे थे बगल में ही हीटर था। बेटी चिल्लाई, घरवाले दौड़े। समझे हीटर पर गिरने की वजह से झुलस गए हैं। लेकर अस्पताल दौड़े। समय यही रात के कोई आठ बजे थे, जब जिला अस्पताल के डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। यह भी बताया कि गोली मारी गई है, यह सुनकर घरवालों के होश उड़ गए। हम बात कर रहे हैं कि रामलीला धर्मशाला कमेटी के महामंत्री कक्कू यादव की हत्या की।
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कुछ ऐसा ही 10 महीने बाद फिर 9 नवंबर 2011 को भी हुआ। सब कुछ उसी तर्ज पर हुआ था। शायद वही रिवाल्वर, वही साइलेंसर, इस बार रामलीला कमेटी के महामंत्री हरिमोहन शर्मा की हत्या की गई। घर के बाहर हुई हत्या में भी शायद हल्की आवाज हुई होगी, जिसे कोई सुन नहीं पाया था। पड़ोसी ने हरिमोहन को गिरा देखकर घरवालों को जानकारी दी।
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बेटा विकास दौड़ा तो लोगों ने सोचा चोट लगने से हरिमोहन घायल हो गए। हरिमोहन को लेकर अस्पताल भागे जहां डॉक्टर ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इस बार भी गोली उसी तरह से मारी गई थी, जैसे पहली बार रामलीला कमेटी के महामंत्री कक्कू यादव को मारी गई थी। दोनों ही हत्याओं का तरीका कुछ एक-सा था, इन दोनों हत्याओं में शूटर का इस्तेमाल हुआ, यह तो पुलिस ने बता दिया मगर ना शूटर पकड़े गए और ना ही मामले का पर्दाफाश हो सका।

इन दोनों ही हत्याओं का जिक्र आते ही तमाम लोग सरगोशी (कानाफूसी) करते हैं। कुछ इशारे करते हैं। एकांत में जो कुछ बताते हैं, वह कातिल तक पहुंचने के लिए एक अहम सुराग है। कुछ तो यह भी कहते हैं कि वारदात किसने करवाई, उन्हें पता है, मगर खुलकर कोई बोलता नहीं? उस वक्त तैनात रहे पुलिस वाले हों या फिर उनके घर वाले नाम लेने से भी डरते हैं।

murder of 2 General Ministers of Ramlila Committee news in Gorakhpur
प्रतीकात्मक तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला।
दो गज जमीन की खातिर हुई इन दो हत्याओं का मास्टर माइंड कौन है और उसका कितना खौफ है, इसी से समझ लीजिए कि इनके परिवार वाले भी कुछ बोलने से बचते हैं। यहां तक की उनसे संपर्क करने की कोशिश की जाती है तो वह बोलते हैं, जाने दीजिए, पुलिस ने काम नहीं किया।

इतना ही नहीं मुकदमा भी अज्ञात पर ही दर्ज कराया गया था। रामलीला कमेटी के लोगों से संपर्क करने की कोशिश की जाती है तो व्यस्त होने का हवाला देकर टालते हैं। अब जरा खुद सोचिए कि आखिर इतनी बड़ी हत्याओं के पीछे वह कौन हैं जिसका नाम लेने से लोग तो डरते ही पुलिस ने भी फाइल को बंद करने में ही भलाई समझी।

चंद महीने दौड़कर चुप्पी साध ली
कक्कू के भाई राजेंद्र  ने बताया कि केस को लेकर काफी दिनों तक हम लोग दौड़े थे। थाना पुलिस और अफसरों के दफ्तर तक अपनी फरियाद पहुंचाई, मगर हर जगह सिर्फ आश्वासन ही मिला। कुछ महीने तक दौड़ने के बाद कोर्ट में भी अर्जी दी, लेकिन कुछ भी कार्रवाई नहीं हो सकी। कुछ ऐसा ही हरिमोहन परिवार के लोगों का कहना है। काफी कुरेदने के बाद सिर्फ यही बोले कि इतना ही जानिए कुछ नहीं हुआ इस केस में।

पुलिस बचा गई, कातिलों को
सीधा-सा नियम है कि अपराधी कितना भी शातिर हो वह घटना स्थल पर कोई न कोई सुराग जरूर छोड़ जाता है। जाहिर है कि इस मामले में भी ऐसा होना तय है। बावजूद इसके पुलिस कातिलों को नहीं पकड़ पाई। नियम सार्वभौमिक और पूर्णतया सत्य है। लिहाजा यह सवाल उठता है कि क्या मामले की जांच में लगे पुलिसकर्मियों की नजर और अक्ल इतनी कमजोर थी। जानकार कहते हैं कि यह बात कुछ हजम नहीं होती। तो दूसरी संकेत साफ है कि पुलिसवालों ने किसी के दबाव या लालच में आंखें मूंद ली और शहर के दो प्रतिष्ठित लोगों का कातिल आज भी मजे कर रहा है।

 
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