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मनीष हत्याकांड: आरोपी पुलिसकर्मियों की न्यायिक हिरासत फिर बढ़ी, वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए हुई कोर्ट में पेशी

Fri, 24 Dec 2021 08:17 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Fri, 24 Dec 2021 08:17 PM IST
सार

कानपुर के कारोबारी मनीष गुप्ता की मौत 27 सितंबर की रात में हुई थी। वह अपने दोस्तों के साथ होटल कृष्णा पैलेस में ठहरे थे। रात में चेकिंग करने पुलिसवालों गए थे। आरोप है कि पुलिस वालों की पिटाई से मौत हो गई थी।

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Manish murder case Judicial custody of accused policemen extended again
मृतक कारोबारी मनीष गुप्ता। - फोटो : amar ujala

विस्तार

कानपुर के कारोबारी मनीष गुप्ता की हत्या में नामजद छह पुलिस कर्मियों की न्यायिक हिरासत 6 जनवरी तक बढ़ गई है। न्यायिक हिरासत की अवधि बढ़ने के बाद सीबीआई लौट गई है। दरअसल, विवेचना कर रही सीबीआई घटना से जुड़े सभी लोगों से पूछताछ कर चुकी है। माना जा रहा है कि सीबीआई जल्द विवेचना पूरी कर 15 जनवरी से पहले चार्जशीट दाखिल कर देगी।

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जानकारी के मुताबिक, शुक्रवार को हत्याकांड के आरोपी इंस्पेक्टर जेएन सिंह, दरोगा अक्षय मिश्रा, वर,जय यादव, राहुल दुबे, कांस्टेबल प्रशांत कुमार व हेड कांस्टेबल कमलेश यादव की  वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए कोर्ट में पेशी हुई। सीबीआई ने सीजेएम कोर्ट में अर्जी देकर अनुरोध किया कि साक्ष्य संकलन का काम अभी चल रहा है, इसलिए पुलिस कर्मियों की न्यायिक हिरासत की अवधि बढ़ा दी जाए।
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अदालत ने अनुरोध स्वीकार करते हुए सभी पुलिस कर्मियों हिरासत छह जनवरी तक बढ़ा दी। माना यही जा रहा है कि सीबीआई अगली तारीख तक विवेचना पूरी कर लेगी। इसके बाद आरोपी पुलिस कर्मियों को गोरखपुर जेल से शिफ्ट किया जाएगा। अब जिस कोर्ट में चार्जशीट दाखिल होगी फिर उसी कोर्ट से संबंधित जेल में लिए इनका रिमांड लिया जा सकता है।
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यह है मामला

कानपुर के कारोबारी मनीष गुप्ता की मौत 27 सितंबर की रात में हुई थी। वह अपने दोस्तों के साथ होटल कृष्णा पैलेस में ठहरे थे। रात में चेकिंग करने पुलिसवालों गए थे। आरोप है कि पुलिस वालों की पिटाई से मौत हो गई थी। मनीष की पत्नी मीनाक्षी की तहरीर पर छह पुलिसवालों पर हत्या का केस 28 सितंबर को दर्ज किया गया था। केस की शुरुआती विवेचना एसआईटी कानपुर को दी गई थी।

दो अक्टूबर से एसआईटी ने अपनी विवेचना शुरू की थी। करीब एक महीने तक एसआईटी ने विवेचना की इस दौरान सभी पुलिसवालों को गिरफ्तार किया गया। दो नवंबर को सीबीआई ने अपने यहां केस दर्ज किया और 11 नवंबर को गोरखपुर आई। तब से लगातार सीबीआई गोरखपुर आ रही है और केस से जुड़े पुलिसवालों से लेकर अन्य लोगों से पूछताछ करने के साथ उनका बयान दर्ज कर चुकी है।

 
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