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Gorakhpur News: न्यायालय कर्मचारियों ने मुख्यमंत्री को सौंपा ज्ञापन
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गोरखपुर। दीवानी न्यायालय कर्मचारी संघ के पदाधिकारियों ने रविवार को गोरखनाथ मंदिर स्थित मुख्यमंत्री कार्यालय में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को ज्ञापन सौंपकर न्यायालय कर्मचारियों की वर्षों से लंबित समस्याओं के समाधान की मांग की। संघ ने एफटीसी न्यायालय कर्मचारियों के वेतन में उच्च न्यायालय के आदेश के अनुपालन में प्रतिवर्ष 10 प्रतिशत वृद्धि और सेवा नियमतीकरण की मांग की।
ज्ञापन में प्रोन्नति की अर्हकारी सेवा शर्तों में शिथिलीकरण के लिए प्रस्तावित नियमावली संशोधन को मंजूरी देने, पेड अप्रेंटिस पदों को कनिष्ठ सहायक पदों में समायोजित करने और जनपद न्यायालयों में वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी का लुप्त पद पुन: सृजित करने की मांग की गई। ग्रेड वेतन 4600 वाले लिपिकीय पदों को राजपत्रित प्रतिष्ठा देने, मकान किराया भत्ते का पुनरीक्षण करने और लिपिकीय कर्मचारियों की शैक्षणिक योग्यता स्नातक निर्धारित कर ग्रेड वेतन 2800 (पे लेवल-5) देने की मांग भी रखी गई।
संघ ने कार्यभार के अनुरूप अतिरिक्त पद सृजित करने, पद सृजन तक अतिरिक्त कार्य भत्ता देने और बयान लेखन के लिए नियमित बयान लेखक के पद सृजित करने की मांग की। पदाधिकारियों ने कहा कि न्यायालय कर्मचारी न्यायिक व्यवस्था के सुचारु संचालन की महत्वपूर्ण कड़ी हैं। मांगों पर कार्रवाई न होने पर दो अक्तूबर को जिले में शांतिपूर्ण तिरंगा रैली और इसके बाद 25 अक्तूबर को लखनऊ में प्रदेशभर के न्यायालय कर्मचारियों द्वारा सत्याग्रह की चेतावनी दी गई। इस दौरान प्रदेश संयुक्त सचिव महेश्वर किशोर सिंह, जिलाध्यक्ष सुनील कुमार सिंह, सचिव विकास सिंह, वरिष्ठ उपाध्यक्ष धर्मवीर चौधरी सहित अन्य पदाधिकारी व कर्मचारी मौजूद रहे।
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ज्ञापन में प्रोन्नति की अर्हकारी सेवा शर्तों में शिथिलीकरण के लिए प्रस्तावित नियमावली संशोधन को मंजूरी देने, पेड अप्रेंटिस पदों को कनिष्ठ सहायक पदों में समायोजित करने और जनपद न्यायालयों में वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी का लुप्त पद पुन: सृजित करने की मांग की गई। ग्रेड वेतन 4600 वाले लिपिकीय पदों को राजपत्रित प्रतिष्ठा देने, मकान किराया भत्ते का पुनरीक्षण करने और लिपिकीय कर्मचारियों की शैक्षणिक योग्यता स्नातक निर्धारित कर ग्रेड वेतन 2800 (पे लेवल-5) देने की मांग भी रखी गई।
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संघ ने कार्यभार के अनुरूप अतिरिक्त पद सृजित करने, पद सृजन तक अतिरिक्त कार्य भत्ता देने और बयान लेखन के लिए नियमित बयान लेखक के पद सृजित करने की मांग की। पदाधिकारियों ने कहा कि न्यायालय कर्मचारी न्यायिक व्यवस्था के सुचारु संचालन की महत्वपूर्ण कड़ी हैं। मांगों पर कार्रवाई न होने पर दो अक्तूबर को जिले में शांतिपूर्ण तिरंगा रैली और इसके बाद 25 अक्तूबर को लखनऊ में प्रदेशभर के न्यायालय कर्मचारियों द्वारा सत्याग्रह की चेतावनी दी गई। इस दौरान प्रदेश संयुक्त सचिव महेश्वर किशोर सिंह, जिलाध्यक्ष सुनील कुमार सिंह, सचिव विकास सिंह, वरिष्ठ उपाध्यक्ष धर्मवीर चौधरी सहित अन्य पदाधिकारी व कर्मचारी मौजूद रहे।
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