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सात साल पहले बंद कर दिया था काउंटर: अदालती काम निपटाएं कि जाएं रेलवे, कचहरी में ही खुले आरक्षण केंद्र

Sat, 05 Aug 2023 03:42 PM IST
vivek shukla संवाद न्यूज एजेंसी गोरखपुर।
संवाद न्यूज एजेंसी गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Sat, 05 Aug 2023 03:42 PM IST
सार

दीवानी कचहरी में रोजाना करीब तीन से चार हजार अधिवक्ता और करीब पांच हजार वादकारी पहुंचते हैं। यहां आने वाले लोगों की सुविधा के लिए सितंबर 2014 में रेलवे ने डाक विभाग की मदद से दीवानी कचहरी में पीआरएस (पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम) काउंटर खोला था।

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counter closed seven years ago settle court work or go to Railways
दीवानी कचहरी परिसर में यहीं पर था और रिजर्वेशन काउंटर को दिखाते वकील अब बंद पड़ा हुआ है। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

दीवानी कचहरी में अधिवक्ताओं के लिए रेलवे आरक्षण केंद्र को फिर खोलने की मांग उठने लगी है। अधिवक्ताओं के अलावा कचहरी में आने वाले फरियादी भी टिकट का आरक्षण करा लेते थे। जानकारों का कहना है कि डेढ़ साल तक काउंटर का संचालन किया गया। इससे अधिवक्ताओं को बहुत सहूलियत मिलती थी। पूरा दिन कोर्ट-कचहरी में भागदौड़ रहता है, इसी में समय निकालकर रेल टिकट भी बुक करा लेते थे। लेकिन अब रेलवे स्टेशन जाना पड़ता है। अगर आरक्षण केंद्र की सुविधा पहले तरह ही शुरू कर दी जाए तो अधिवक्ताओं के साथ ही वादकारी भी इसका लाभ उठा सकेंगे।

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दीवानी कचहरी में रोजाना करीब तीन से चार हजार अधिवक्ता और करीब पांच हजार वादकारी पहुंचते हैं। यहां आने वाले लोगों की सुविधा के लिए सितंबर 2014 में रेलवे ने डाक विभाग की मदद से दीवानी कचहरी में पीआरएस (पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम) काउंटर खोला था। इसका शुभारंभ तत्कालीन जनपद न्यायाधीश प्रमोद कुमार श्रीवास्तव ने पूर्वोत्तर रेलवे के मुख्य वाणिज्य प्रबंधक राकेश त्रिपाठी और प्रवर अधीक्षक डाक आलोक ओझा की मौजूदगी में किया था।
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इसके लिए बार एसोसिएशन सिविल कोर्ट की कार्यकारिणी के तत्कालीन अध्यक्ष कृष्ण बिहारी दूबे और मंत्री भानु प्रताप पांडेय ने प्रयास किया था। शुभारंभ के दौरान पहला टिकट नरेंद्र कुमार शुक्ल ने गोरखपुर से जम्मू के लिए बनवाया था। पोस्ट ऑफिस में बने काउंटर पर कर्मचारी आवेदन पत्र लेकर रिजर्वेशन करते थे। लेकिन यह व्यवस्था करीब डेढ़ साल तक ही चल सकी। इसके बाद काउंटर ही बंद कर दिया गया।
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कमरे में पड़ी हैं फाइलें, काउंटर हुआ बंद

दीवानी कचहरी में पोस्टऑफिस है। इसमें एक कमरे में काउंटर बनाया गया, जिस पर रिजर्वेशन के लिए यूनियन बैंक की तरफ से भी पहुंचा जा सकता था। लेकिन यह काउंटर बंद हो गया तो इसका सारा सामान भी तितर-बितर हो गया। बृहस्पतिवार की दोपहर 12.10 बजे पोस्ट ऑफिस के कर्मचारी अपने काम में व्यस्त थे। उनसे जब पूछा गया कि कोई रिजर्वेशन काउंटर बना है तो बताया गया कि अब बंद है। उसी कमरे में चलता था।

कमरे का दरवाजा खोलने पर उसमें कुछ पुराने सामान, फाइलें और अधिवक्ताओं के बोर्ड रखे नजर आए। काउंटर के दूसरी ओर प्रैक्टिस करने वाले अधिवक्ता राज कुमार ने बताया कि काफी दिनों से काउंटर बंद है। यदि यहां टिकट बनते तो लोग जरूर आते। काउंटर बंद होने के बाद कमरे की देखभाल नहीं हुई, जिससे वह जर्जर हो गया है। अधिवक्ताओं का कहना है कि रिजर्वेशन काउंटर शुरू होने से सबको सुविधा मिलेगी।
 

लोगों ने क्या कहा

यहां काउंटर खुला था, जो कुछ दिनों के बाद बंद हो गया। इसे दोबारा खोल दिया जाए तो सुविधा मिल जाएगी। टिकट के लिए रेलवे स्टेशन के पास बने पीआरएस पर जाना पड़ता है। इससे समय बर्बाद होता है।-संजय कुमार यादव, अधिवक्ता।

कई बार व्यस्तता की वजह से हम लोग कचहरी से बाहर नहीं निकल पाते हैं। पूर्व में जब यहां सुविधा शुरू हुई तो वरिष्ठ अधिवक्ताओं को काफी राहत मिली। यह सुविधा दोबारा शुरू की जानी चाहिए।-आनंद बिहारी लाल, अधिवक्ता।

यहां पोस्टऑफिस में रेलवे ने रिजर्वेशन काउंटर खोला था। लेकिन यह अब बंद है। यदि यहां यह सुविधा मिलती तो वादकारी भी इसका लाभ उठाते।-अभिनव त्रिपाठी, अधिवक्ता।

रेलवे को इस पर ध्यान देना चाहिए। यह व्यवस्था तो दोबारा भी बनाई जा सकती है। लेकिन इस पर किसी का ध्यान नहीं जा रहा है।-अजय कुमार त्रिपाठी, अधिवक्ता।

समय बचाने के लिहाज से यह अच्छी व्यवस्था थी, लेकिन अब सुविधा नहीं मिल पा रही। हम लोगों ने बीच में एक-दो बार इसकी मांग उठाई थी।-चंद्रप्रकाश, अधिवक्ता।

वर्ष 2013-14 की कार्यकारिणी में हम बार एसाेसिएशन के मंत्री रहे। तब काफी प्रयास के बाद रिजर्वेशन काउंटर की सुविधा उपलब्ध कराई गई। करीब डेढ़ साल तक काउंटर चला। इसके बाद इस पर किसी ने ध्यान नहीं दिया। इसे दोबारा खोलने की पहल होनी चाहिए।-भानु प्रताप पांडेय, अधिवक्ता।
 
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