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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Gorakhpur News ›   Corruption case against Joint Director Ashok Verma and Senior Prosecution Officer Ranvijay in Gorakhpur

UP NEWS: गोरखपुर में संयुक्त निदेशक अशोक वर्मा और ज्येष्ठ अभियोजन अधिकारी रणविजय के खिलाफ भ्रष्टाचार का मुकदमा

Wed, 15 Jun 2022 10:00 AM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Wed, 15 Jun 2022 10:00 AM IST
सार

कैंट पुलिस ने मंगलवार देर रात मुकदमा दर्ज किया है। स्टिंग ऑपरेशन करने वाले दीपक यादव ने तहरीर दी थी। बदमाश कपिलमुनि यादव की गैंगस्टर की फाइल लौटाने, फिर आगे बढ़ाने के लिए अधिकारियों ने घूस लिया था।

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Corruption case against Joint Director Ashok Verma and Senior Prosecution Officer Ranvijay in Gorakhpur
बाएं रणविजय सिंह और दाएं अशोक वर्मा। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

जिला बदर और 11 मुकदमो में नामजद कपिलमुनि यादव की गैंगस्टर की फाइल रोकने, फिर उसे आगे बढ़ाने के लिए घूस लेने वाले गोरखपुर के प्रभारी संयुक्त निदेशक अशोक वर्मा और ज्येष्ठ अभियोजन अधिकारी रणविजय सिंह के खिलाफ मंगलवार की देर रात कैंट थाना पुलिस ने भ्रष्टाचार अधिनियम की धारा में मुकदमा दर्ज कर लिया। मामले का स्टिंग ऑपरेशन करने वाले दीपक यादव की तहरीर पर ही मुकदमा हुआ है।

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गोरखपुर में तैनात संयुक्त निदेशक अभियोजन अशोक वर्मा और ज्येष्ठ अभियोजन अधिकारी रणविजय सिंह ने बदमाश व सपा नेता रहे कपिलमुनि यादव की गैंगस्टर की फाइल दो बार रोक दी थी। इसपर मामले की पैैरवी कर रहे दीपक यादव ने आपत्ति जताई थी। कपिलमुनि ने दीपक के भाई संजय यादव की वर्ष 2016 में हत्या की थी।
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आरोप था कि कपिलमुनि ने संजय की हत्या की, फिर उनके शव को खेत में गाड़ दिया। इसी खेत में गेहूं की बुआई कर दी। गेहूं कटाई के बाद संजय यादव की घड़ी बरामद हुई, फिर हत्या का केस दर्ज हुआ। इसमें दीपक गवाह हैं।
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कैंट पुलिस को दी तहरीर में दीपक ने लिखा है कि गैंगस्टर की फाइल आगे बढ़ाने के लिए अशोक वर्मा व रणविजय सिंह ने घूस ली है। इसका स्टिंग ऑपरेशन भी किया गया था। साक्ष्य के तौर पर वीडियो अपर मुख्य सचिव गृह और गोरखपुर के जिलाधिकारी को दिया गया था। जिलाधिकारी की जांच में भी घूसखोरी की पुष्टि हुई है। लिहाजा, केस दर्ज करके कार्रवाई की जाए। इसी आधार पर कैंट पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया है।   

 

शासन से हरी झंडी मिलने के बाद दर्ज हुआ मुकदमा

भ्रष्टाचार के इस मामले को शासन ने गंभीरता से लिया है। इसी का नतीजा रहा कि दो वरिष्ठ अभियोजन अधिकारियों के खिलाफ मंगलवार की देर रात मुकदमा दर्ज किया गया। बताया जा रहा है कि शासन से हरी झंडी मिलने के बाद ही पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया।

दीपक यादव को फिर मिली सुरक्षा

बदमाश कपिलमुनि यादव के मामले की पैरवी कर रहे दीपक यादव को दोबारा पुलिस की सुरक्षा दी गई। इसकी पुष्टि एसएसपी डॉ विपिन ताडा ने की है। एसएसपी का कहना है कि दीपक को गनर दिया गया है। हालांकि, पहले दीपक की सुरक्षा हटा ली गई थी। इसपर तत्कालीन जिलाधिकारी ने नाराजगी जताई थी और सीओ को पत्र भी लिखा था।


ऑपरेशन शिकंजा के तहत मुकदमे की पैरवी

बदमाश कपिलमुनि यादव के खिलाफ 11 केस दर्ज हैं। अब इन मामलों को ऑपरेशन शिकंजा के तहत आगे बढ़ाया जाएगा। ऑपरेशन शिकंजा में मुकदमे की पैरवी तेजी से की जाती है। एसएसपी डॉ विपिन ताडा का कहना है कि बदमाश पर कई मुकदमे दर्ज हैं। अब मुकदमों की पैरवी कराई जाएगी। सतत निगरानी के साथ ही समीक्षा भी की जाएगी।

 

बदमाश कपिलमुनि पर लगेगा गैंगस्टर, फाइल तैयार

जिला बदर बदमाश कपिलमुनि यादव के खिलाफ गैंगस्टर की कार्रवाई होगी। पुलिस ने फाइल तैयार कर ली है। एसएसपी का कहना है कि बदमाश के खिलाफ गैंगस्टर की कार्रवाई होगी। दो बार फाइल पर आपत्ति लगाई गई थी। अब तीसरी बार फाइल भेजी जा रही है।


एसएसपी से मिले दीपक यादव

अभियोजन अधिकारियों का स्टिंग ऑपरेशन करने वाले दीपक यादव ने मंगलवार को एसएसपी डॉ विपिन ताडा से मुलाकात की है। दीपक ने अपनी सुरक्षा की मांग रखी। इसपर एसएसपी ने तुरंत सुरक्षा मुहैया कराने का आदेश जारी कर दिया। इसपर दीपक ने संतुष्टि जताई है।

गोरखपुर एसएसपी डॉ विपिन ताड़ा ने कहा कि बदमाश कपिलमुनि यादव ने ही 2016 में दीपक यादव के भाई संजय यादव की हत्या की थी। मामले में मुकदमा दर्ज है। दीपक की तरफ से गैंगस्टर की कार्रवाई की मांग की जा रही थी। रामगढ़ताल थाना पुलिस ने पहले ही कपिलमुनि के खिलाफ गैंगस्टर की कार्रवाई की सिफारिश की थी, लेकिन इसे अभियोजन से वापस कर दिया गया।

इस बीच दीपक ने स्टिंग ऑपरेशन किया और अफसर फंस गए। दीपक की तहरीर पर ही संयुक्त निदेशक अभियोजन अशोक वर्मा व ज्येष्ठ अभियोजन अधिकारी रणविजय सिंह के खिलाफ कैंट थाने में मुकदमा दर्ज किया गया है। मामले की गंभीरता से जांच की जाएगी।


 

अपर निदेशक की जांच में भी फंसे अभियोजन के अफसर

संयुक्त निदेशक अभियोजन अशोक वर्मा और ज्येष्ठ अभियोजन अधिकारी रणविजय सिंह के खिलाफ प्रारंभिक विभागीय जांच मंगलवार को पूरी हो गई है। जांच अधिकारी व अपर निदेशक अभियोजन अयोध्या जय प्रकाश पांडेय ने रिपोर्ट मंगलवार को ही एडीजी अभियोजन आशुतोष पांडेय को दे दी है। बताया जा रहा है कि अपर निदेशक की जांच में भी घूसखोरी की पुष्टि हुई है। अब शासन स्तर से दोनों अफसरों को निलंबित किया जा सकता है। साथ ही विभागीय जांच को और आगे बढ़ाई जा सकती है।

संयुक्त निदेशक और ज्येष्ठ अभियोजन अधिकारी पर घूस लेने के आरोपों की पुष्टि एडीएम सिटी विनीत सिंह की जांच में हो गई थी। यह जांच जिलाधिकारी कृष्णा करुणेश ने कराई थी। साथ ही अभियोजन अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश अपर मुख्य सचिव गृह से की थी। इसी का नतीजा रहा कि शासन ने अयोध्या के अपर निदेशक अभियोजन जय प्रकाश पांडेय को विभागीय जांच अधिकारी नामित किया और 24 घंटे के अंदर ही रिपोर्ट तलब कर ली।

अपर निदेशक ने गोरखपुर आकर साक्ष्यों की जांच की। साथ ही जिलाधिकारी, एसएसपी और एडीएम सिटी से मिलकर पूरे मामले की जानकारी ली। अभियोजन कार्यालय के कर्मचारी सत्येंद्र का बयान दर्ज किया। अब जांच रिपोर्ट सौंप दी गई है। सूत्रों के मुताबिक, वायरल वीडियो में अभियोजन अधिकारी कैद हुए हैं। इसकी पुष्टि जांच में हो गई है। पता चला गया है कि दोनों ने घूस ली है।  

 

एसपी इंटेलीजेंस ने भी की जांच

घूसखोरी से जुड़े इस मामले की जांच एसपी इंटेलीजेंस ने भी की है। बताया जा रहा है कि एसपी इंटेलीजेंस गोरखपुर आए। अलग-अलग अफसरों के बयान भी दर्ज किए हैं। सूत्रों ने बताया कि एसपी इंटेलीजेंस उस पुलिस कर्मी की तलाश में हैं, जो घूसखोरी से जुड़े वायरल वीडियो में वर्दी पहने दिख रहा है। बताया जा रहा है कि वर्दीधारी दरोगा है। वह भी गैंगस्टर की फाइल आगे बढ़ाने की बात कर रहा है। 

और भी फाइलें खुलेंगी

संयुक्त निदेशक अभियोजन अशोक वर्मा और ज्येष्ठ अभियोजन अधिकारी रणविजय सिंह से जुड़ी दूसरी फाइलें भी खोली जाएंगी। आरोप है कि अफसरों ने मनमाने तरीके से कानूनी राय दी है। संयुक्त निदेशक ने मुकदमा दर्ज होने के बाद भी तीन अभ्यर्थियों को सरकारी विभागों में तैनाती करा दी थी। इसपर जिलाधिकारी ने आपत्ति जताते हुए स्पष्टीकरण भी मांगा था। यह भी आरोप लगा था कि अभियोजन अधिकारियों ने गैंगस्टर की कई फाइलों पर आपत्ति लगाकर वापस की थी।
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