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कोरोना ने कम कर दी आंखों की रोशनी, डॉक्टरों ने इन मरीजों को दी खास सलाह
Sun, 03 Jan 2021 04:42 PM IST
vivek shukla
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Sun, 03 Jan 2021 04:42 PM IST
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : pixabay
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गोरखपुर जिले के निजी अस्पताल में तीन ऐसे मरीज मिले हैं, जिनकी आंखों की रोशनी कोरोना संक्रमण से ठीक होने के बाद 70 प्रतिशत तक कम हो गई है। इनमें दो मरीजों की रोशनी के ठीक हो जाने की उम्मीद नहीं है, जबकि एक मरीज को डॉक्टरों ने इंजेक्शन लगवाने की सलाह दी है। डॉक्टर उम्मीद जता रहे हैं कि रोशनी कुछ हद तक लौट आएगी। खास बात यह है कि तीनों शुगर के मरीज रहे हैं।
कोरोना वायरस की अबूझ संरचना डॉक्टरों को भी समझ में नहीं आ रही है। कोरोना से ठीक होने के बाद मरीजों पर वायरस का असर अलग-अलग अंगों पर पड़ रहा है। पूर्व में कोरोना संक्रमित रह चुके तीन मरीजों की आंखों के पर्दे पर खून के छींटे मिल चुके हैं। इनमें से दो के पर्दे पर निशान भी पड़े हैं। जुलाई में इन मरीजों को कम दिखाई देना शुरू हुआ, जो लगातार कम होता गया। स्थिति ऐसी हो गई है कि अब उन्हें तीन मीटर की दूरी पर स्थित चीजें भी दिखाई नहीं दे रही हैं।
बीआरडी मेडिकल कॉलेज में नेत्र विभागाध्यक्ष डॉ. रामकुमार जायसवाल के मुताबिक ऐसे मरीजों की आंखों की रोशनी लौटने की उम्मीद बेहद कम है। ऐसे मामलों में कुछ विशेष इंजेक्शन दिए जाते हैं, लेकिन उसका असर भी एक समय सीमा पर ही होता है। लोग अब इस तरह के मामले लेकर बीआरडी में पहुंच रहे हैं। उन्हें सलाह दी जा रही है कि अगर जरा सी भी आंखों में दिक्कत हो रही हो तो तत्काल डॉक्टर को दिखाएं। थोड़ी सी भी लापरवाही उनके आंखों की रोशनी छीन सकती है। बताया कि इससे पूर्व अन्य मरीजों की आंखों पर भी कोरोना का असर हो चुका है।
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कोरोना वायरस की अबूझ संरचना डॉक्टरों को भी समझ में नहीं आ रही है। कोरोना से ठीक होने के बाद मरीजों पर वायरस का असर अलग-अलग अंगों पर पड़ रहा है। पूर्व में कोरोना संक्रमित रह चुके तीन मरीजों की आंखों के पर्दे पर खून के छींटे मिल चुके हैं। इनमें से दो के पर्दे पर निशान भी पड़े हैं। जुलाई में इन मरीजों को कम दिखाई देना शुरू हुआ, जो लगातार कम होता गया। स्थिति ऐसी हो गई है कि अब उन्हें तीन मीटर की दूरी पर स्थित चीजें भी दिखाई नहीं दे रही हैं।
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बीआरडी मेडिकल कॉलेज में नेत्र विभागाध्यक्ष डॉ. रामकुमार जायसवाल के मुताबिक ऐसे मरीजों की आंखों की रोशनी लौटने की उम्मीद बेहद कम है। ऐसे मामलों में कुछ विशेष इंजेक्शन दिए जाते हैं, लेकिन उसका असर भी एक समय सीमा पर ही होता है। लोग अब इस तरह के मामले लेकर बीआरडी में पहुंच रहे हैं। उन्हें सलाह दी जा रही है कि अगर जरा सी भी आंखों में दिक्कत हो रही हो तो तत्काल डॉक्टर को दिखाएं। थोड़ी सी भी लापरवाही उनके आंखों की रोशनी छीन सकती है। बताया कि इससे पूर्व अन्य मरीजों की आंखों पर भी कोरोना का असर हो चुका है।
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शुगर ने बढ़ा दीं और तकलीफें
जिन मरीजों के आंखों की रोशनी कम हुई है, उनमें से एक शहर के तुर्कमानपुर का रहने वाला 33 साल का युवक है। दो अन्य मरीज भी शहर के निवासी हैं। इसमें एक की उम्र 50 के आसपास है और दूसरे की उम्र 55 के इर्द-गिर्द। खास बात यह है कि इन तीनों को पहले से ही शुगर की बीमारी थी। इस वजह से इनकी आंखों पर और ज्यादा असर हुआ है। डॉ. रामकुमार ने बताया कि जिन लोगों को शुगर की समस्या है और वे संक्रमित होकर ठीक हो चुके हैं, उन्हें ज्यादा एहतियात बरतने की जरूरत है।