कोरोना से जंग जीत बारिश में 20 किमी पैदल चलकर घर पहुंचे लोग, बोले- 'किसी जेल से कम नहीं था'
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उत्तर प्रदेश के संतकबीरनगर में एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां निगेटिव रिपोर्ट आने के बाद सेंट थॉमस इंटर कॉलेल के एलवन अस्पताल से छुट्टी मिली तो रविवार की शाम को बखिरा कस्बे के पांच लोग पैदल ही 20 किलोमीटर कर सफर तय करके घर पहुंचे।
इन लोगों ने प्रदर्शन किया और आरोप मढा कि इन्हें बासी खाना दिया जाता था। आइसोलेशन वार्ड किसी जेल से कम नहीं था। घर वापसी के लिए वाहन तक का इंतजाम नहीं किया गया।
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लोगों का आरोप है कि क्वारंटीन होने के लिए एंबुलेंस से 10 जुलाई को खलीलाबाद स्थित सेंट थॉमस इंटर कॉलेज के एलवन अस्पताल ले जाया गया था। वहीं 19 जुलाई को उन सभी को एक रसीद देकर डिस्चार्ज कर दिया गया।
घर आने के लिए उन्हें कोई भी साधन नहीं उपलब्ध कराया गया। साधन मांगने पर स्कूल पर मौजूद जिम्मेदारों ने कहा कि घर भेजने के लिए कोई भी व्यवस्था नहीं है। मजबूरन वह लोग तेज बारिश के बावजूद खलीलाबाद से पैदल ही अपने घर के लिए निकल पड़े।
अधिकारियों ने क्या कहा
तीन घंटे का पैदल सफर तय करके कस्बा बखिरा पहुंचे। एक युवक ने बताया कि उसे पैर में तकलीफ है। प्लास्टर बांधकर वह किसी तरह से घर पहुंचा। लोगों का आरोप है कि उन्हें क्वारंटीन के दौरान बासी खाना दिया जाता रहा। इससे कुछ लोगो की तबीयत भी बिगड़ गई। शोरगुल मचाने पर उन लोगों को बाद में ताजा भोजन का इंतजाम कराया गया।
लोगों ने आरोप लगाया कि बखिरा पुलिस चौकी के बगल का रास्ता सील है। रसीद दिखाने के बाद भी उन लोगों को कस्बे के भीतर आने से रोक दिया गया था। घंटे भरे बाद वह किसी तरह से अंदर अपने घर जा पाएं।
सीएमओ डॉक्टर हर गोविंद सिंह ने बताया कि शासन की नई गाइड लाइन के अनुसार डिस्चार्ज होने पर क्वारंटीन हुए लोगों को घर छोड़ने के लिए वाहन की व्यवस्था नहीं है। उनके परिजन अब निजी साधनों से घर ले जाएंगे। जहां तक रहा सवाल बासी भोजन देने का तो आरोप गलत है। भोजन की जांच होती है और ताजा भोजन दिया जाता है।