{"_id":"60b760f5a36773584f1aa617","slug":"corona-medicines-worth-70-lakhs-got-stuck-in-gorakhpur-market","type":"story","status":"publish","title_hn":"गोरखपुर: कोरोना की 70 लाख की दवाएं बाजार में फंसीं, अचानक घट गई इनकी डिमांड","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
गोरखपुर: कोरोना की 70 लाख की दवाएं बाजार में फंसीं, अचानक घट गई इनकी डिमांड
Wed, 02 Jun 2021 04:14 PM IST
vivek shukla
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Wed, 02 Jun 2021 04:14 PM IST
सार
- 10 लाख का टोसिलीजुमैब, 34 लाख का रेमडेसिविर नहीं बिका
- 25 लाख की फेबिफ्लू भी नहीं बिकी, दवा व्यापारी हो रहे परेशान
विज्ञापन
कोरोना वायरस (प्रतीकात्मक तस्वीर)
- फोटो : पेक्सेल्स
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
गोरखपुर में कोरोना की दूसरी लहर जब चरम पर थी तो इलाज के लिए दवाएं नहीं मिल रहीं थीं। कालाबाजारी भी हो रही थी। अब जब कोरोना के संक्रमण की रफ्तार कम हो गई है तो दवाएं बिक नहीं रही हैं। दवा व्यापारियों के करीब 70 लाख रुपये फंस गए हैं। इन दवाओं को दवा कंपनियां वापस भी नहीं ले रही हैं। इसकी वजह से व्यापारियों के सामने संकट खड़ा हो गया है।
जानकारी के अनुसार, दवा व्यापारियों के पास 10 लाख का टोसिलीजुमैब और लगभग 34 लाख का रेमडेसिविर इंजेक्शन नहीं बिके हैं। करीब 25 लाख की फेबिफ्लू भी नहीं बिकी है। अस्पतालों में लगभग 355 वायल रेमडेसिविर के इंजेक्शन फंसे हैं। ड्रग विभाग के कहने पर दवा व्यापारियों ने दवाएं मंगाई थीं। अब जब कोरोना की रफ्तार कम हुई तो इन दवाओं की मांग नहीं है।
दवा व्यापारी शहबाज सिद्दीकी ने बताया कि टोसिलीजुमैब केवल मैं मंगवाता था। इसकी 125 वायल बची है। इसकी कीमत करीब 10 लाख रुपये है। 17 मई को 1400 वायल और 20 मई को 480 वायल रेमडेसिविर के मंगवाए थे। इनमें से सात सौ वायल बचे हैं। इनकी कीमत लगभग 16 लाख रुपये है। इसके अलावा आठ व्यापारियों के यहां 14 से लेकर 150 वायल बचे हैं। इनकी संख्या लगभग एक हजार है। लगभग 17 सौ वायल रेमडेसिविर बाजार में डंप हैं। बाजार में लगभग 34 लाख रुपये के रेमडेसिविर इंजेक्शन फंसे हैं। करीब 30 व्यापारियों के पास लगभग 25 लाख रुपये की फेबिफ्लू फंसी है।
विज्ञापन
ड्रग इंस्पेक्टर जय सिंह ने कहा कि व्यापारी घबराएं नहीं। यह दवाएं 2022 में एक्सपायर होंगी। अभी कोरोना खत्म नहीं हुआ है। ऐसे में दवाएं न होने से मरीजों की जान पर बन आती है। अभी व्यापारी उसे फंसा न समझें। उनसे कहकर दवाएं मंगाई गई हैं तो निदान किया जाएगा।
केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष संजय उपाध्याय ने कहा कि लाखों रुपये की दवाएं बाजार में फंस गई हैं। इन दवाओं की वापसी नहीं होती है। पिछली बार राज्य एसोसिएशन से दबाव बनवाकर हम लोगों ने 18 लाख रुपये की फेबिफ्लू वापस करवाई थी। इस बार भी कंपनियों पर दबाव बनाया जाएगा कि दवाएं वापस लें।
विज्ञापन
जानकारी के अनुसार, दवा व्यापारियों के पास 10 लाख का टोसिलीजुमैब और लगभग 34 लाख का रेमडेसिविर इंजेक्शन नहीं बिके हैं। करीब 25 लाख की फेबिफ्लू भी नहीं बिकी है। अस्पतालों में लगभग 355 वायल रेमडेसिविर के इंजेक्शन फंसे हैं। ड्रग विभाग के कहने पर दवा व्यापारियों ने दवाएं मंगाई थीं। अब जब कोरोना की रफ्तार कम हुई तो इन दवाओं की मांग नहीं है।
विज्ञापन
दवा व्यापारी शहबाज सिद्दीकी ने बताया कि टोसिलीजुमैब केवल मैं मंगवाता था। इसकी 125 वायल बची है। इसकी कीमत करीब 10 लाख रुपये है। 17 मई को 1400 वायल और 20 मई को 480 वायल रेमडेसिविर के मंगवाए थे। इनमें से सात सौ वायल बचे हैं। इनकी कीमत लगभग 16 लाख रुपये है। इसके अलावा आठ व्यापारियों के यहां 14 से लेकर 150 वायल बचे हैं। इनकी संख्या लगभग एक हजार है। लगभग 17 सौ वायल रेमडेसिविर बाजार में डंप हैं। बाजार में लगभग 34 लाख रुपये के रेमडेसिविर इंजेक्शन फंसे हैं। करीब 30 व्यापारियों के पास लगभग 25 लाख रुपये की फेबिफ्लू फंसी है।
विज्ञापन
ड्रग इंस्पेक्टर जय सिंह ने कहा कि व्यापारी घबराएं नहीं। यह दवाएं 2022 में एक्सपायर होंगी। अभी कोरोना खत्म नहीं हुआ है। ऐसे में दवाएं न होने से मरीजों की जान पर बन आती है। अभी व्यापारी उसे फंसा न समझें। उनसे कहकर दवाएं मंगाई गई हैं तो निदान किया जाएगा।
केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष संजय उपाध्याय ने कहा कि लाखों रुपये की दवाएं बाजार में फंस गई हैं। इन दवाओं की वापसी नहीं होती है। पिछली बार राज्य एसोसिएशन से दबाव बनवाकर हम लोगों ने 18 लाख रुपये की फेबिफ्लू वापस करवाई थी। इस बार भी कंपनियों पर दबाव बनाया जाएगा कि दवाएं वापस लें।