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Gorakhpur News: खूबसूरती आई नहीं...अधूरे काम से और बदसूरत हो गई शहर की इंट्री प्वाइंट
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गोरखपुर। किसी भी शहर की इंट्री प्वाइंट ही उसकी खूबसूरती का अहसास कराती है, लेकिन लखनऊ से आते ही कालेसर से नौसड़ तक बंधे को खूबसूरत बनाने की योजना सुस्त चाल से बदसूरती का अहसास करा रही है। बंधे पर बड़ी-बड़ी झाड़ियां उग आईं हैं। मिट्टी बहकर सड़क पर आ गई है। बारिश होने पर कीचड़ हो जाता है। बाइक सवार फिसल कर गिर कर चोटिल हो जा रहे हैं। करीब 40 फीसदी काम बाकी है। इसे पूरा कराने के लिए अब अगस्त तक का समय कार्यदायी संस्था को दिया गया है, लेकिन काम इतना बाकी है कि इसे पूरा करने में एक साल लग सकते हैं।
कालेसर से नौसड़ तक के बंधे को 9.50 करोड़ रुपये की लागत से खूबसूरत बनाना है। यह काम तीन वर्षों में काम पूरा करना था, लेकिन बजट के अभाव में सुंदरीकरण का काम बंद है। बंधे पर बड़ी-बड़ी झाड़ियां उग आईं हैं। बंधे की मिट्टी को रोकने के लिए जो रबड़ के पट्टे लगाए गए थे वह उखड़ गए हैं। बंधों पर लगे पत्थर उखड़ने लगे हैं। बंधे के ऊपर इंटरलॉकिंग का काम कहीं भी पूरा नहीं हो सका है। बड़गहन, बरवार, कोलिया के आसपास जगह-जगह सड़क पर मिट्टी के ढेर दिखाई पड़े। जब गाड़ियां गुजरती हैं तो धूल उड़ने लगती हैं। इससे यहां के लोगों को दिक्कत का सामना करना पड़ता है।
वहीं, इससे हादसे का खतरा बना रहता है। बारिश के दिनों में मिट्टी कीचड़ में बदल जाती है। इससे हाईवे पर कई लोग गिरकर घायल हो चुके हैं। बंधे के आसपास रहने वाले लोगों ने बताया कि बंधे के सुंदरीकरण के काम ने उन्हें मुश्किल में डाल दिया है। घर में धूल के कारण रहना मुश्किल हो गया है। सांस लेने में दिक्कत होती है। जिम्मेदारों का दावा है कि 60 से 70 फीसदी काम पूरा हो गया है, लेकिन हकीकत इससे कोसो दूर नजर आती है।
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ये होने हैं कार्य
सीएम सिटी के प्रवेश द्वार को आकर्षक बनाने के लिए कालेसर से नौसड़ तक छह किमी बंधे के सुंदरीकरण के लिए आकर्षक पत्थर लगाने के साथ ही रंग-रोगन किया जाना है। छायादार और सजावटी पौधे लगाए जाएंगे। लोगों के बैठने के लिए बेंच भी लगेंगे।
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कोट
नौसड़ से कालेसर तक साढ़े छह किमी तक सुंदरीकरण का काम होना है। बजट के अभाव में कुछ दिनों से काम रुका था, लेकिन कार्यदायी संस्था बहुत ही धीमी गति से काम करवा रही है। इसको लेकर कार्यदायी संस्था राजकीय निर्माण निगम को कई बार नोटिस दिया जा चुका है। अगस्त तक काम पूरा कराने को कहा गया है। अगर इस अवधि में काम पूरा नहीं होता है तो जुर्माना की संस्तुति करूंगा।
रविंद्र कुमार मिश्र, क्षेत्रीय पर्यटन अधिकारी
...
बोले स्थानीय लोग
सड़क पर पूरे दिन धूल उड़ता रहता है। धूल उड़कर घर में जाता है। इससे घर में रहना मुश्किल हो गया है। काम इतना धीमे हो रहा है कि पता नहीं यह दिक्कत कब तक उठानी पड़ेगी।
-रामकेश
...
बारिश के समय में बंधे की मिट्टी सड़क पर आकर जम जाती है। इससे कई लोग घायल हो चुके हैं। सड़क पर मलबा बिखरा रहता है। इससे आने-जाने में दिक्कत होती है।
-विशाल यादव
...
दिनभर घर की सफाई करनी पड़ती है। एक साल के काम को पूरा होने में तीन साल लग गए, अगर समय से काम पूरा हो जाता तो हमें उतनी सांसत नहीं झेलनी पड़ती।
-आयुष
...
घर में सबसे ज्यादा दिक्कत भोजन करने में होती है। भोजन करते वक्त थाली में धूल आ जाता है। वहीं बारिश में कीचड़ से घर से निकलना मुश्किल हो जाता है।
-चंद्रपाल
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कालेसर से नौसड़ तक के बंधे को 9.50 करोड़ रुपये की लागत से खूबसूरत बनाना है। यह काम तीन वर्षों में काम पूरा करना था, लेकिन बजट के अभाव में सुंदरीकरण का काम बंद है। बंधे पर बड़ी-बड़ी झाड़ियां उग आईं हैं। बंधे की मिट्टी को रोकने के लिए जो रबड़ के पट्टे लगाए गए थे वह उखड़ गए हैं। बंधों पर लगे पत्थर उखड़ने लगे हैं। बंधे के ऊपर इंटरलॉकिंग का काम कहीं भी पूरा नहीं हो सका है। बड़गहन, बरवार, कोलिया के आसपास जगह-जगह सड़क पर मिट्टी के ढेर दिखाई पड़े। जब गाड़ियां गुजरती हैं तो धूल उड़ने लगती हैं। इससे यहां के लोगों को दिक्कत का सामना करना पड़ता है।
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वहीं, इससे हादसे का खतरा बना रहता है। बारिश के दिनों में मिट्टी कीचड़ में बदल जाती है। इससे हाईवे पर कई लोग गिरकर घायल हो चुके हैं। बंधे के आसपास रहने वाले लोगों ने बताया कि बंधे के सुंदरीकरण के काम ने उन्हें मुश्किल में डाल दिया है। घर में धूल के कारण रहना मुश्किल हो गया है। सांस लेने में दिक्कत होती है। जिम्मेदारों का दावा है कि 60 से 70 फीसदी काम पूरा हो गया है, लेकिन हकीकत इससे कोसो दूर नजर आती है।
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ये होने हैं कार्य
सीएम सिटी के प्रवेश द्वार को आकर्षक बनाने के लिए कालेसर से नौसड़ तक छह किमी बंधे के सुंदरीकरण के लिए आकर्षक पत्थर लगाने के साथ ही रंग-रोगन किया जाना है। छायादार और सजावटी पौधे लगाए जाएंगे। लोगों के बैठने के लिए बेंच भी लगेंगे।
कोट
नौसड़ से कालेसर तक साढ़े छह किमी तक सुंदरीकरण का काम होना है। बजट के अभाव में कुछ दिनों से काम रुका था, लेकिन कार्यदायी संस्था बहुत ही धीमी गति से काम करवा रही है। इसको लेकर कार्यदायी संस्था राजकीय निर्माण निगम को कई बार नोटिस दिया जा चुका है। अगस्त तक काम पूरा कराने को कहा गया है। अगर इस अवधि में काम पूरा नहीं होता है तो जुर्माना की संस्तुति करूंगा।
रविंद्र कुमार मिश्र, क्षेत्रीय पर्यटन अधिकारी
...
बोले स्थानीय लोग
सड़क पर पूरे दिन धूल उड़ता रहता है। धूल उड़कर घर में जाता है। इससे घर में रहना मुश्किल हो गया है। काम इतना धीमे हो रहा है कि पता नहीं यह दिक्कत कब तक उठानी पड़ेगी।
-रामकेश
...
बारिश के समय में बंधे की मिट्टी सड़क पर आकर जम जाती है। इससे कई लोग घायल हो चुके हैं। सड़क पर मलबा बिखरा रहता है। इससे आने-जाने में दिक्कत होती है।
-विशाल यादव
...
दिनभर घर की सफाई करनी पड़ती है। एक साल के काम को पूरा होने में तीन साल लग गए, अगर समय से काम पूरा हो जाता तो हमें उतनी सांसत नहीं झेलनी पड़ती।
-आयुष
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घर में सबसे ज्यादा दिक्कत भोजन करने में होती है। भोजन करते वक्त थाली में धूल आ जाता है। वहीं बारिश में कीचड़ से घर से निकलना मुश्किल हो जाता है।
-चंद्रपाल