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Gorakhpur News: 21 वर्ष पहले हुई चकबंदी... 12 वर्ष बाद भी कब्जे की जंग

Sun, 23 Jun 2024 03:51 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर Updated Sun, 23 Jun 2024 03:51 AM IST
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Consolidation happened 21 years ago... war of occupation even after 12 years
पिपराइच के उसका निवासी सत्येंद्र नाथ पांडेय को अब तहसील सदर कार्यालय में हर कोई पहचानता है। वजह यह है कि एक-दो दिन के अंतराल पर वह अपनी फरियाद लेकर ऑफिस आते रहते हैं। सत्येंद्र कहते हैं-पिछले 12 वर्ष से मैं चकबंदी विवाद को लेकर सरकारी अफसरों के कार्यालयों की दौड़ लगा रहा हूं। यहां हर कोई मुझे पहचानता है। सम्मान भी देता है। बस, मेरा काम नहीं होता।
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बीते दिनों तहसीलदार सदर कार्यालय में दोनों पक्षों के लोग पहुंचे। दोनों पक्षों की बात से पता चला कि 2003 में चकबंदी के बाद उन्होंने करीब 25 डिसमिल जमीन पर कब्जा के लिए खूब लड़ाई लड़ी है। पैमाइश के 12 वर्ष बाद भी यह विवाद समाप्त नहीं हुआ।
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तहसीलदार कार्यालय में दोनों पक्षों ने दस्तावेज और नक्शा दिखाया तो तहसीलदार विकास सिंह ने सत्येंद्र के पक्ष में जमीन की पैमाइश करने और दूसरे पक्ष को दूसरे स्थान की जमीन पर कब्जा दिलाने की बात कही। हालांकि, पैमाइश कब होगी, यह तय नहीं हुआ।
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सत्येंद्र नाथ पांडेय ने कहा कि चकबंदी में उन्हें आराजी संख्या 47 मिला है, उनके प्रतिवादी शिवरतन निषाद अपने आराजी संख्या 46 के बजाय 47 पर ही कब्जा किए हैं। शिवरतन निषाद ने दस्तावेज दिखाते हुए कहा कि आराजी संख्या 46 पर अन्य लोगों का पहले से ही कब्जा है।
सीएम के जनता दर्शन में मिलीं एसडीएम ने फरियादी को कार्यालय बुलाया
सत्येंद्र नाथ पांडेय ने बताया-बीते दिनों मैं मुख्यमंंत्री योगी आदित्यनाथ के जनता दर्शन में शामिल होने गया था। वहीं पर एसडीएम सदर मृणाली अविनाश जोशी मिलीं। उन्होंने मुझे पहचान लिया। उन्होंने अपने कार्यालय में बुलाया और न्याय का भरोसा दिया। दोनों पक्ष पहुंचे तो नायब तहसीलदार आकांक्षा ने तहसीलदार कार्यालय में भेज दिया।
कब्जा के लिए जाना पड़ा हाईकोर्ट
सत्येंद्र नाथ पांडेय ने बताया कि जमीन पर कब्जा नहीं मिला तो उन्होंने हाईकोर्ट की शरण ली। उप संचालक चकबंदी के न्यायालय में मामला चला तो 2012 में निर्णय हुआ, लेकिन उनके चक में संशोधन नहीं हुआ। उसके बाद राजस्व एवं चकबंदी की संयुक्त टीम ने 2012 में पैमाइश करके उन्हें कब्जा दिला दिया, लेकिन उसके बाद भी विपक्षी ने उनके रकबे पर कब्जा कर लिया। इस मामले में भागदौड़ करते हुए सत्येंद्र नाथ ने जुलाई 2023 में हाईकोर्ट में अर्जी दी। हाईकोर्ट ने चार सप्ताह में मामले को निस्तारित करने का आदेश दिया। उसके बाद प्रशासन ने 18 नवंबर 2023 को पैमाइश के लिए संयुक्त टीम बना दी, लेकिन पैमाइश और कब्जा दखल नहीं हो पाया। उप संचालक चकबंदी के एक आदेश का हवाला देते हुए शिवरतन निषाद दावा कर रहे हैं कि वह अपनी जगह सही हैं।

पिपराइच के जमीन विवाद के मामले की जांच कर कार्रवाई की जाएगी। इस मामले में न्यायालय के आदेश का पालन करते हुए फरियादी को न्याय दिलाया जाएगा।

- कृष्णा करुणेश,
डीएम
पिपराइच के उसका गांव के मामले में दोनों पक्ष की बात सुनी गई। इस मामले में दोनों पक्ष को न्याय दिलाया जाएगा। दोनों के नाम जो जमीन जहां है, वहां कब्जा दिलाया जाएगा। न्यायालय के आदेश का पालन किया जाएगा।
- विकास सिंह, तहसीलदार सदर
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