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Gorakhpur News: आजादी के मंत्र को कांग्रेस ने सांप्रदायिक बताकर संशोधन की कोशिश
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गोरखपुर। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि वंदे मातरम का जो मंत्र भारत की आजादी का कारण बना हो, उसे भी सांप्रदायिक बताकर कांग्रेस ने संशोधन करने की कोशिश की। 1923 के अधिवेशन में तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष मोहम्मद अली जौहर ने विरोध किया। वंदे मातरम का यह विरोध भारत के विभाजन का दुर्भाग्यपूर्ण कारण बना था। कांग्रेस ने अगर उस समय मोहम्मद अली जौहर को अध्यक्ष पद से बेदखल करके वंदे मातरम के माध्यम से राष्ट्रीयता का सम्मान किया होता तो भारत का विभाजन नहीं हुआ होता।
सीएम योगी सोमवार को नगर निगम परिसर के रानी लक्ष्मीबाई पार्क से निकली एकता यात्रा के पूर्व उपस्थित जनसमूह को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह सुखद अवसर है कि लौह पुरुष सरदार पटेल की 150वीं जयंती के कार्यक्रम तो प्रारंभ हुए ही हैं, साथ ही राष्ट्रगीत वंदे मातरम के भी 150वें वर्ष में प्रवेश करने के उपलक्ष्य में कार्यक्रम आयोजित हो रहे हैं।
सीएम ने कहा कि बाद में कांग्रेस ने वंदे मातरम में संशोधन के लिए एक कमेटी बनाई। 1937 में उसकी रिपोर्ट आई, कांग्रेस ने कहा कि इसमें कुछ ऐसे शब्द हैं जो भारत माता को मां दुर्गा, लक्ष्मी और सरस्वती के रूप में प्रस्तुत करते हैं। इनका संशोधन कर दिया जाए। सीएम योगी ने कहा कि यह गीत धरती माता की उपासना का गीत है। भारत का ऋषि तो हमेशा सबका आह्वान करता रहा है कि धरती हमारी माता है और हम इसके पुत्र हैं। पुत्र होने के नाते अगर मां के सम्मान में कहीं कोई चुनौती आती है तो हमारा दायित्व बनता है कि हम उसके खिलाफ खड़े हों।
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जिन्ना के सम्मान के कार्यक्रम में शर्मनाक तरीके से शामिल होते हैं वंदे मातरम का विरोध करने वाले
मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस की तुष्टिकरण की नीति दुर्भाग्यपूर्ण तरीके से 1947 में देश के विभाजन का कारण बनी। आज भी हम सब यह मानते थे कि जो लोग भारत के अंदर हैं, सभी भारत के प्रति निष्ठावान होकर के भारत की एकता और अखंडता के लिए कार्य करेंगे। पर, जब अखिल भारतीय स्तर पर वंदे मातरम राष्ट्रीय गीत के 150 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आयोजन प्रारंभ हुए तो फिर वही विरोध के स्वर फूटना प्रारंभ हो गए। समाजवादी पार्टी के एक सांसद ने फिर से विरोध करना प्रारंभ कर दिया।
सीएम ने कहा कि यह वही लोग हैं जो भारत की अखंडता के शिल्पी लौह पुरुष सरदार पटेल की जयंती के कार्यक्रम में शामिल में नहीं होते लेकिन जिन्ना को सम्मान देने के किसी कार्यक्रम में शर्मनाक तरीके से शामिल होते हैं। हम सबको याद रखना होगा अगर राष्ट्र के महापुरुषों को सम्मान न मिला तो हमारा देश कहां जाएगा। उन्होंने कहा कि उग्रवाद, नक्सलवाद, आतंकवाद से लगातार भारत की एकता और अखंडता को चुनौती मिल रही है। जो लोग भारत के राष्ट्रीय महापुरुषों, क्रांतिकारियों का अपमान करते हैं, वह प्रकारांतर में उन अलगाववादी ताकतों के दुस्साहस को बढ़ाने का ही कार्य करते हैं जिनके कारण भारत की एकता और राष्ट्रीयता को चुनौती मिलती है।
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सरदार पटेल भारत की अखंडता के शिल्पी
इस अवसर पर सीएम योगी ने लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल को नमन करते हुए कहा कि सरदार पटेल भारत की अखंडता के शिल्पी हैं। राष्ट्र के प्रति उनके योगदान का अहसास वर्तमान पीढ़ी को कराने के लिए सबसे पहले कार्यक्रम की शुरुआत अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार ने की थी। वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उसे और व्यापक फलक देते हुए सरदार पटेल जयंती, 31 अक्तूबर को राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में विभिन्न कार्यक्रमों से जोड़ा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात के केवड़िया में नर्मदा नदी के तट पर गुजरात का मुख्यमंत्री रहते हुए सरदार सरोवर डैम बनवाया। इसके साथ ही देशभर से लोहा एकत्र कराकर देश की माटी और लोहे से सरदार पटेल की प्रतिमा स्थापित कराई। सरदार पटेल की यह प्रतिमा स्टैच्यू ऑफ यूनिटी पूरी दुनिया की सबसे विशाल और विराट प्रतिमा है। यह भारत की एकता की मूर्ति के रूप में पूरे देश को मार्गदर्शन देने का माध्यम भी है।
एकता यात्रा से पूर्व मंचीय कार्यक्रम को प्रदेश सरकार के जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह, भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष एवं एमएलसी डॉ. धर्मेंद्र सिंह और भाजपा के महानगर संयोजक राजेश गुप्ता ने भी संबोधित किया। इस अवसर पर महापौर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव, विधायक विपिन सिंह, फतेह बहादुर सिंह, श्रीराम चौहान, महेंद्रपाल सिंह, डॉ. विमलेश पासवान, सरवन निषाद, प्रदीप शुक्ल, राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष चारू चौधरी, पूर्व राज्यसभा सदस्य जयप्रकाश निषाद आदि मौजूद रहे।
सीएम योगी सोमवार को नगर निगम परिसर के रानी लक्ष्मीबाई पार्क से निकली एकता यात्रा के पूर्व उपस्थित जनसमूह को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह सुखद अवसर है कि लौह पुरुष सरदार पटेल की 150वीं जयंती के कार्यक्रम तो प्रारंभ हुए ही हैं, साथ ही राष्ट्रगीत वंदे मातरम के भी 150वें वर्ष में प्रवेश करने के उपलक्ष्य में कार्यक्रम आयोजित हो रहे हैं।
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सीएम ने कहा कि बाद में कांग्रेस ने वंदे मातरम में संशोधन के लिए एक कमेटी बनाई। 1937 में उसकी रिपोर्ट आई, कांग्रेस ने कहा कि इसमें कुछ ऐसे शब्द हैं जो भारत माता को मां दुर्गा, लक्ष्मी और सरस्वती के रूप में प्रस्तुत करते हैं। इनका संशोधन कर दिया जाए। सीएम योगी ने कहा कि यह गीत धरती माता की उपासना का गीत है। भारत का ऋषि तो हमेशा सबका आह्वान करता रहा है कि धरती हमारी माता है और हम इसके पुत्र हैं। पुत्र होने के नाते अगर मां के सम्मान में कहीं कोई चुनौती आती है तो हमारा दायित्व बनता है कि हम उसके खिलाफ खड़े हों।
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जिन्ना के सम्मान के कार्यक्रम में शर्मनाक तरीके से शामिल होते हैं वंदे मातरम का विरोध करने वाले
मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस की तुष्टिकरण की नीति दुर्भाग्यपूर्ण तरीके से 1947 में देश के विभाजन का कारण बनी। आज भी हम सब यह मानते थे कि जो लोग भारत के अंदर हैं, सभी भारत के प्रति निष्ठावान होकर के भारत की एकता और अखंडता के लिए कार्य करेंगे। पर, जब अखिल भारतीय स्तर पर वंदे मातरम राष्ट्रीय गीत के 150 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आयोजन प्रारंभ हुए तो फिर वही विरोध के स्वर फूटना प्रारंभ हो गए। समाजवादी पार्टी के एक सांसद ने फिर से विरोध करना प्रारंभ कर दिया।
सीएम ने कहा कि यह वही लोग हैं जो भारत की अखंडता के शिल्पी लौह पुरुष सरदार पटेल की जयंती के कार्यक्रम में शामिल में नहीं होते लेकिन जिन्ना को सम्मान देने के किसी कार्यक्रम में शर्मनाक तरीके से शामिल होते हैं। हम सबको याद रखना होगा अगर राष्ट्र के महापुरुषों को सम्मान न मिला तो हमारा देश कहां जाएगा। उन्होंने कहा कि उग्रवाद, नक्सलवाद, आतंकवाद से लगातार भारत की एकता और अखंडता को चुनौती मिल रही है। जो लोग भारत के राष्ट्रीय महापुरुषों, क्रांतिकारियों का अपमान करते हैं, वह प्रकारांतर में उन अलगाववादी ताकतों के दुस्साहस को बढ़ाने का ही कार्य करते हैं जिनके कारण भारत की एकता और राष्ट्रीयता को चुनौती मिलती है।
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सरदार पटेल भारत की अखंडता के शिल्पी
इस अवसर पर सीएम योगी ने लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल को नमन करते हुए कहा कि सरदार पटेल भारत की अखंडता के शिल्पी हैं। राष्ट्र के प्रति उनके योगदान का अहसास वर्तमान पीढ़ी को कराने के लिए सबसे पहले कार्यक्रम की शुरुआत अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार ने की थी। वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उसे और व्यापक फलक देते हुए सरदार पटेल जयंती, 31 अक्तूबर को राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में विभिन्न कार्यक्रमों से जोड़ा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात के केवड़िया में नर्मदा नदी के तट पर गुजरात का मुख्यमंत्री रहते हुए सरदार सरोवर डैम बनवाया। इसके साथ ही देशभर से लोहा एकत्र कराकर देश की माटी और लोहे से सरदार पटेल की प्रतिमा स्थापित कराई। सरदार पटेल की यह प्रतिमा स्टैच्यू ऑफ यूनिटी पूरी दुनिया की सबसे विशाल और विराट प्रतिमा है। यह भारत की एकता की मूर्ति के रूप में पूरे देश को मार्गदर्शन देने का माध्यम भी है।
एकता यात्रा से पूर्व मंचीय कार्यक्रम को प्रदेश सरकार के जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह, भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष एवं एमएलसी डॉ. धर्मेंद्र सिंह और भाजपा के महानगर संयोजक राजेश गुप्ता ने भी संबोधित किया। इस अवसर पर महापौर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव, विधायक विपिन सिंह, फतेह बहादुर सिंह, श्रीराम चौहान, महेंद्रपाल सिंह, डॉ. विमलेश पासवान, सरवन निषाद, प्रदीप शुक्ल, राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष चारू चौधरी, पूर्व राज्यसभा सदस्य जयप्रकाश निषाद आदि मौजूद रहे।