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Valentine's Day: अमर उजाला और सजग फिल्म्स की गोष्ठी, ‘मोहब्बत वह भी जिंदा है मुलाकातें नहीं जिनकी’

Tue, 14 Feb 2023 10:21 AM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Tue, 14 Feb 2023 10:21 AM IST
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Conference of Amar Ujala and Sajag Films in gorakhpur
एक शाम प्रेम कविता के नाम। - फोटो : अमर उजाला।

वैलेंटाइन दिवस की पूर्व संध्या पर अमर उजाला और सजग फिल्म्स की ओर से ‘एक शाम प्रेम कविता का नाम’ काव्य गोष्ठी का आयोजन सोमवार को प्रेस क्लब सभागर में आयोजित किया गया। वसंत ऋतु में कवियों ने जब मंच से श्रृंगार रस की रचनाएं सुनानी शुरू की तो श्रोता प्रेम के आकंठ में डूब गए।

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कार्यक्रम का शुभारंभ श्वेता शुभि ने ‘प्रेम की साधना में सफल हो गए, प्रश्न उलझे सभी आज हल हो गए’ सुनाकर किया। शायर कलीमुल हक ने ‘दिल में न हो खुलूस तो मोहब्ब्त नहीं मिलती, खैरात में उतनी बड़ी दौलत नहीं मिलती’ सुनाया तो तालियों की गड़गड़ाहट से सभागार गूंज उठा।
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वहीं, जयप्रकाश मल्लने अपनी व्यंगात्मक गद्य रचना को सुनाकर खूब वाहवाही लूटी। उन्होंने ‘कबीर के ढाई आखर प्रेम वाले शब्द ने प्रेरित किया और मैं प्रेम की तलाश में निकल पड़ा’ सुनाकर प्रेम को अपने ढंग से परिभाषित किया। कवियत्री रंजना जायसवाल ने ‘कैसा इतना उलट-पुलट जाता है सबकुछ प्रेम में, प्रेम कर जाना कि प्रेम एक क्रांति है’ सुनाकर प्रेम को परिभाषित किया।
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Conference of Amar Ujala and Sajag Films in gorakhpur
एक शाम प्रेम कविता के नाम। - फोटो : अमर उजाला।

कवियत्री डॉ. चारू शीला सिंह ने ‘कोई खत और टेलीफोन से बातें नहीं जिनकी, मोहब्बत वह भी जिंदा है मुलाकातें नहीं जिनकी’ के जरिए प्यार के अर्थ को समझाया। अर्पिता चित्रा उपाध्याय ने गिटार की धुन पर अपनी गजल ‘कागज पे कलम तेरा रुक-रुक कर चला होगा, जब पहले पहल तुमने खत मुझको लिखा होगा’ सुनाकर श्रोताओं को झूमने पर मजबूर कर दिया।

डॉ. सुदीप्ता बी भूषण ने ‘हर रात एक ओर काली परत चढ़ानी होगी दर्द के मजार पर...’ और युवा कवियत्री आकृति विज्ञ अर्पण ने भोजपुरी रचना ‘फगुनवा में सरसो लहके गजब के...’ सुनाकर फागुन के समय प्रकृति के प्रेम के दृश्य का वर्णन किया। सतविंदर कौर ने ‘ तुम प्रेम के जलते चरागों को बुझाना चाहते हो, उनकी रोशनी से दुनिया को जगमगाना चाहते हो’ सुनाकर प्रेम को भाव को बताया। युवा कवि कुमार आशू ने ‘एक तुम्हारे होने भर से जीवन, जीवन सा लगता है’ सुनाकर प्रेम को प्रकृति से जोड़ा।

 

Conference of Amar Ujala and Sajag Films in gorakhpur
एक शाम प्रेम कविता के नाम। - फोटो : अमर उजाला।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे कवि एवं साहित्यकार देवेंद्र आर्य ने पत्नी को समर्पित प्रेम गीत ‘आंखों में किरणें खिल उठती हैं प्रेम पगी, जब तुम मुस्कुराती हो...’ सुनाकर प्रेम की सार्थकता को व्यक्त किया। कार्यक्रम का कुशल संचालन सजग फिल्म्स के प्रदीप सुविज्ञ करते हुए प्रेम के विभिन्न आयामों को प्रस्तुत किया।

इस अवसर पर डॉ. भारत भूषण, डॉ. मिथिलेश तिवारी, वीरेंद्र मिश्र दीपक, मारकंडेय मणि त्रिपाठी, जगदंबा तिवारी, राजीव ऋषि तिवारी, शिव प्रसाद शुक्ला, गौतम यादव आदि मौजूद रहे।

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