रामगढ़ताल: शिकारा पलटने की घटना में कमिश्नर ने जीडीए से मांगी रिपोर्ट, खुद को सही ठहराने की दी दलीलें
गोरखपुर में गत रविवार यानी 24 जनवरी की दोपहर रामगढ़ताल में पर्यटकों समेत शिकारा पलटने की घटना को कमिश्नर जयंत नार्लिकर ने गंभीरता से लेते हुए गोरखपुर विकास प्राधिकरण (जीडीए ) से पूरे मामले की रिपोर्ट तलब की है। उधर, जीडीए के नोटिस पर शिकारा संचालक ने भी अपना जवाब दे दिया है जिसमें उसने खुद को सही ठहराने के लिए कई दलीलें दी हैं।
शिकारा संचालक का कहना है फर्म की तरफ से सिर्फ शिकारा का ट्रॉयल किया जा रहा था। जो लोग उसमें बैठे थे वे फर्म के कर्मचारियों के परिवार के थे। उसने कहा कि उसके पास प्रशिक्षित गोताखोर भी है जिन्हें पूर्व में प्रशस्तिपत्र तक मिल चुके हैं।
घटना के समय गोताखोरों समेत पूरी टीम तत्काल मौके पर पहुंच गई थी और सभी को सकुशल शिकारा में से निकाल लिया। जहां घटना हुई वहां सिर्फ चार फीट पानी था। संचालक ने यह भी कहा कि घटना में कोई हताहत नहीं हुआ। साथ ही यह भी दावा किया कि यह घटना उनकी लापरवाही से नहीं बल्कि मोटर बोट के टक्कर मारने से हुई। मोटर बोट अपने तय रुट पर नहीं थी।
संचालक का जवाब मिलने के बाद अब जीडीए को एक्शन लेना है। उधर, कमिश्नर की तरफ से जवाब तलब किए जाने के बाद प्राधिकरण रिपोर्ट बनाने में जुट गया है। संचालक का जवाब भी उसमें संकलित किया जाएगा। सोमवार को प्राधिकरण की तरफ से यह निर्णय होने की उम्मीद है कि इस घटना में संचालक के खिलाफ आगे कोई और कार्रवाई होगी या चेतावनी देकर छोड़ दिया जाएगा।
बिना अनुबंध शिकारा संचालित करने पर दिया था नोटिस
शिकारा के संचालन को लेकर अभी संबंधित फर्म और जीडीए के बीच अनुबंध नहीं हुआ है, सिर्फ लाइसेंस जारी हुआ था। इसी पर प्राधिकरण ने घटना के अगले दिन सोमवार को फर्म को नोटिस देकर पूछा था कि बिना अनुबंध, ताल में शिकारा के संचालन पर क्यों न उनका लाइसेंस निरस्त कर दिया जाए।
जीडीए ने संचालक को नोटिस का जवाब देने के लिए तीन दिन का मौका दिया था। साथ ही शिकारा में टक्कर मारने वाली स्पीड बोट के संचालक को भी तय रुट से बाहर जाने पर चेतावनी दी थी। जीडीए की इस सख्ती के बाद सोमवार से ही शिकारा का संचालन बंद है। संचालक ने अपनी तीनों नाव ताल से हटा ली हैं।
शिकारा की घटना के बाद अब बरती जा रही है सावधानी
जेटी पर अलग-अलग प्लेटफार्म से शिकारा, स्पीड बोट, जेट स्की एवं पैडल बोट चलाने का लाइसेंस दिया गया है। शिकारा को छोड़कर सभी का अनुबंध भी हो चुका है। पर्यटन विभाग और जीडीए ने एक-एक फर्म को इसके संचालन का लाइसेंस जारी करने के साथ ही अनुबंध भी कर रखा है। शिकारा पलटने की घटना के बाद से ही दोनों फर्म सुरक्षा जैकेट समेत पूरी सतर्कता बरत रही हैं।
इमरजेंसी के लिए दोनों संचालकों के पास दो-दो मोटर बोट आरक्षित रखे गए हैं। इस तरह की सतर्कता कब तक जारी रहेगी यह आने वाला समय बताएगा क्योंकि ऐसा पहली बार नहीं हुआ है। इसके पहले भी घटना होने पर कुछ दिनों तक तो पूरी सतर्कता बरती जाती है फिर मामला ठंडा पड़ते ही लापरवाही शुरू हो जाती है।
एक साल पहले बिना अनुबंध के शुरू हुए जार्बिंग बाल में एक युवक की मृत्यु हो गई थी। इसी तरह सूरज ढलने के बाद मोटर बोट का संचालन होने को लेकर कई बार शिकायतें मिल चुकी हैं। मछली का ठेका लेने वाले भी मोटर बोट संचालक के खिलाफ कई बार शिकायत कर चुके हैं कि वे तय दायरे से आगे तक मोटर बोट लेकर चले आते हैं।
जीडीए सचिव राम सिंह गौतम ने कहा कि कमिश्नर ने भी घटना का संज्ञान लेते हुए रिपोर्ट मांगी है, जिसे तैयार किया जा रहा है। शिकारा संचालक का जवाब आ गया है। सोमवार तक इसपर निर्णय होगा। साथ ही कमिश्नर को भी पूरी रिपोर्ट उपलब्ध करा दी जाएगी। लोगों की सुरक्षा जीडीए की पहली प्राथमिकता है।