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गोरखपुर में बोले सीएम योगी: पीएम मोदी की पहल से पहली बार एजेंडे में आई खेती-किसानी

Mon, 25 Oct 2021 09:24 AM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Mon, 25 Oct 2021 09:24 AM IST
सार

सीएम ने कहा कि पीएम मोदी ने योजनाओं को वोट बैंक की राजनीति से जोड़ने के बजाय भारतीय दृष्टिकोण दिया। इससे योजनाओं का लाभ गांव, गरीब, किसान, नौजवान और महिलाओं तक पहुंचा है। पीएम ने देश की कृषि प्रधान व्यवस्था को केंद्र व राज्य शासन का एजेंडा बनाया है।

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CM Yogi said in Gorakhpur first time with initiative of PM modi agriculture came in agenda of governance
गोरखपुर में सीएम योगी आदित्यनाथ। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल से देश में पहली बार खेती-किसानी शासन के एजेंडे में शामिल हुई है। सीएम ने दावा किया कि साल 2014 से पहले किसान आत्महत्या करने के लिए मजबूर थे। खेती-किसानी से पिंड छुड़ा रहे थे। आज पीएम मोदी के प्रयासों से किसानों को लागत का डेढ़ से दो गुना न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) मिल रहा है। अब कोई किसान आत्महत्या नहीं कर रहा है।   
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ रविवार शाम योगिराज बाबा गंभीरनाथ प्रेक्षागृह में नाबार्ड की ओर से आयोजित राज्य ऋण संगोष्ठी एवं ग्रामीण समृद्धि सम्मान समारोह को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे। सीएम ने कहा कि पीएम मोदी ने योजनाओं को वोट बैंक की राजनीति से जोड़ने के बजाय भारतीय दृष्टिकोण दिया। इससे योजनाओं का लाभ गांव, गरीब, किसान, नौजवान और महिलाओं तक पहुंचा है। पीएम ने देश की कृषि प्रधान व्यवस्था को केंद्र व राज्य शासन का एजेंडा बनाया है। कोरोना संकट के दौरान आत्मनिर्भर भारत की परिकल्पना को साकार करने के लिए एक लाख करोड़ रुपये के कृषि इंफ्रास्ट्रक्चर की व्यवस्था इसका प्रमाण है।
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मुख्यमंत्री ने कहा कि कृषि उत्पादक संगठन (एफपीओ) और ग्रामीण आजीविका मिशन ग्रामीण क्षेत्रों में स्वावलंबन के लिए बड़ी भूमिका का निर्वहन कर सकते हैं। केंद्र सरकार ने 10 हजार एफपीओ के गठन का लक्ष्य रखा है। यूपी में भी एक हजार एफपीओ गठित किए जाने हैं। आजीविका मिशन की भूमिका के बारे में मुख्यमंत्री ने 2019 में बनी झांसी की बलिनी मिल्क प्रोड्यूसर कंपनी का जिक्र किया। कहा कि इससे 600 से अधिक महिलाएं जुड़ी हैं। उन्होंने चार करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ कमाया है। उन्होंने कहा कि एफपीओ और महिला समूहों को आगे बढ़ाने में नाबार्ड और अन्य बैंकर्स की बड़ी भूमिका हो सकती है।
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साल 2017 के बाद यूपी खाद्यान्न उत्पादन में नंबर वन
मुख्यमंत्री ने कहा कि यूपी ने कृषि क्षेत्र में तेजी से प्रगति की है। साल 2017 के बाद से प्रदेश खाद्यान्न उत्पादन में नंबर वन है। आलू उत्पादक किसानों को भी समर्थन मूल्य दिया गया। यूपी न केवल गन्ना उत्पादन में नंबर वन हो गया है, बल्कि रिकार्ड 1.45 लाख करोड़ रुपये गन्ना मूल्य भुगतान करने वाला प्रदेश भी है। 1.35 लाख करोड़ तो सीधे चीनी मिलों से भुगतान किया गया है। खांडसारी और एथेनॉल से हुई आय अतिरिक्त है। कोरोनाकाल में भी प्रदेश की चीनी मिलें चलाई गईं। साल 2017 से पहले किसानों से सीधे क्रय नहीं होता था, जबकि आज सीधे अनाज क्रय के बाद एमएसपी की धनराशि उनके खातों में भेजी जा रही है। सीएम ने बताया कि गेहूं खरीद में रिकार्ड बनाने के बाद अब धान खरीद के लिए 5000 क्रय केंद्र खोले जा रहे हैं।

रोजगार की सर्वाधिक संभावनाओं वाला क्षेत्र है कृषि

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था कृषि आधारित है। कृषि आज भी रोजगार के लिए सर्वाधिक संभावनाओं वाला क्षेत्र है। आज इस क्षेत्र को मजबूत किए जाने का प्रमाण है कि 2016 तक देश की छठवीं अर्थव्यवस्था वाला उत्तर प्रदेश सिर्फ चार साल में देश की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाला राज्य है।
 
आजीविका मिशन से जुड़ी महिलाओं की संख्या एक करोड़ करने का लक्ष्य
ग्रामीण अर्थव्यवस्था में आजीविका मिशन से जुड़ी महिलाओं की भूमिका की चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश में 52 लाख महिलाएं स्वयं सहायता समूहों के जरिये मिशन से जुड़ी हैं। अगले तीन माह में इस संख्या को एक करोड़ पहुंचाने का लक्ष्य है। आंगनबाड़ी केंद्रों को भी महिला स्वयं सहायता समूहों से जोड़ा जा रहा है। हर जिले में कार्यरत कृषि विज्ञान केंद्रों से 3-4 एफपीओ गठित करने का लक्ष्य तय किया गया है।
 
सीएम ने अनावरण और विमोचन भी किया
मुख्यमंत्री ने महिला स्वयं सहायता समूहों, कृषक उत्पादक संगठनों (एफपीओ) का सम्मान, नाबार्ड द्वारा तैयार स्टेट फोकस पेपर का अनावरण, नाबार्ड के चार दशक पूर्ण होने पर कॉफी टेबल बुक का विमोचन भी किया। सीएम ने नाबार्ड के माध्यम से उत्तर प्रदेश राज्य सहकारी बैंक को अल्पावधि फसली ऋण के लिए 2200 करोड़ रुपये का स्वीकृति पत्र, बड़ौदा यूपी बैंक गोरखपुर व गोरखपुर डीसीसीबी के माध्यम से महिला स्वयं सहायता समूहों और कृषकों को ऋण स्वीकृति पत्र, बड़ौदा यूपी बैंक गोरखपुर को वित्तीय साक्षरता के लिए 2.5 करोड़ रुपये का स्वीकृति पत्र, उत्तर प्रदेश सहकारी ग्राम विकास बैंक में डिजिटलीकरण के लिए 6.25 लाख रुपये अनुदान स्वीकृति पत्र, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया द्वारा एफपीओ को ऋण स्वीकृति पत्र का वितरण भी किया। कार्यक्रम में नाबार्ड मुख्य महाप्रबंधक डॉ.डी एस चौहान ने मुख्यमंत्री का स्वागत किया।
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