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गोरखपुर: सीएम योगी बोले- सेना के शौर्य की चर्चा में गोरखा सैनिक सबसे ऊपर, ब्रिटिश भी नहीं कर पाए थे सामना

Thu, 04 Sep 2025 09:51 PM IST
Digvijay Singh अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर Published by: Digvijay Singh Updated Thu, 04 Sep 2025 09:51 PM IST
सार

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखा रेजीमेंट के वीर सपूतों की अदम्य साहस और शौर्यगाथा को आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत बनाने के उद्देश्य से गोरखा युद्ध स्मारक के सौंदर्यीकरण कार्य और संग्रहालय का शिलान्यास किया।

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CM Yogi said Gorkha soldiers are at the top when it comes to the bravery of the army in Gorakhpur
सीएम योगी व अन्य - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखा रेजीमेंट के वीर सपूतों की अदम्य साहस और शौर्यगाथा को आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत बनाने के उद्देश्य से गोरखा युद्ध स्मारक के सौंदर्यीकरण कार्य और संग्रहालय का शिलान्यास किया। यह परियोजना 45 करोड़ रुपये की लागत से विकसित की जाएगी, जो न केवल गोरखा सैनिकों के बलिदान को सम्मान देगी बल्कि भारत-नेपाल के सांस्कृतिक और ऐतिहासिक संबंधों को नई मजबूती प्रदान करेगी। कार्यक्रम में चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल अनिल चौहान भी उपस्थित रहे। इस दौरान सीएम योगी ने गोरखा सैनिकों की वीरता को याद करते हुए कहा कि गौरवशाली विरासत की नींव आने वाली पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत हैं। भारतीय सेना का लोहा आज पूरी दुनिया ने माना है। ब्रिटिश भी गोरखा सैनिकों का सामना नहीं कर पाए और उन्हें संधि के लिए मजबूर होना पड़ा।

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वैदिक मंत्रोच्चार के साथ हुआ संग्रहालय का भूमिपूजन व शिलान्यास
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ वैदिक मंत्रोच्चार के साथ संग्रहालय का भूमिपूजन किया और परिसर में स्थित मां काली मंदिर में पूजा-अर्चना की। इस दौरान गोरखा रिक्रूटिंग डिपो (जीआरडी) की कार्यशैली पर आधारित एक लघु फिल्म का प्रदर्शन किया गया, जिसमें गोरखा रेजीमेंट के बहादुर जवानों की कहानियां जीवंत रूप से प्रस्तुत की गईं। साथ ही, सांस्कृतिक कार्यक्रमों में जवानों ने अपनी परंपरा और संस्कृति के अनुरूप नृत्य और गीत प्रस्तुत किए, जो दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर गए। मुख्यमंत्री ने गोरखा रेजीमेंट के शहीदों के परिवारों की वीर महिलाओं को सम्मानित किया।
 

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कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सीएम योगी ने रामधारी सिंह दिनकर की प्रसिद्ध पंक्तियां उद्धृत की, "जला अस्थियाँ बारी-बारी चिटकाई जिनमें चिंगारी, जो मर गए मातृभूमि के लिए बिना किसी कीमत के मोल... कलम आज उनकी जय बोल।" सीएम योगी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पंच प्रण गुलामी के अंशों को समाप्त करना, अपनी विरासत पर गौरव की अनुभूति, वीर सैनिकों के प्रति सम्मान, सामाजिक एकता और कर्तव्यों का निर्वहन का जिक्र करते हुए कहा कि गोरखा सैनिकों ने अलग-अलग मोर्चों पर काम किया है सभी वीर सैनिकों का सम्मान करना हमारा कर्तव्य है।

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सेना के शौर्य की चर्चा में गोरखा सैनिकों का नाम सबसे ऊपर आता है- मुख्यमंत्री
सीएम योगी ने कहा कि जब हम भारत की सेना के शौर्य की चर्चा करते हैं, तो गोरखा सैनिकों का नाम सबसे ऊपर आता है। 'जय महाकाली, जय गोरखाली' के उद्घोष के साथ जब ये शत्रु पर टूट पड़ते हैं, तो दुश्मन पीछे हटने को मजबूर हो जाता है। 1816 के ब्रिटिश-गोरखा युद्ध में ब्रिटिश सेना को संधि के लिए बाध्य होना पड़ा। उसके बाद गोरखा सैनिकों ने ब्रिटिश आर्मी में भी अपनी बहादुरी दिखाई। स्वतंत्र भारत में भी उन्होंने विभिन्न मोर्चों पर दुश्मनों को घुटने टेकने पर मजबूर किया। सीएम योगी ने महायोगी गुरु गोरखनाथ की परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि जहां गोरखनाथ मंदिर हैं, वहां मां काली की पूजा अनिवार्य है, जो शिव और शक्ति के समन्वय का प्रतीक है। यह समन्वय ही गोरखा सैनिकों की मौत से बेखौफ होकर लड़ने की शक्ति का स्रोत है।
 

अग्निवीरों को यूपी पुलिस में 20 प्रतिशत आरक्षण- सीएम योगी
सीएम योगी ने इस स्मारक को आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बताते हुए कहा कि यह 100 वर्ष पुराना स्मारक अब भव्य रूप लेगा। यहां म्यूजियम में गोरखा रेजीमेंट के पुराने यूनिफॉर्म, हथियार, अस्त्र-शस्त्र और युद्ध कला के परिवर्तनों को प्रदर्शित किया जाएगा। इससे युवा पीढ़ी को इतिहास से सीखने का अवसर मिलेगा। उन्होंने सीडीएस जनरल अनिल चौहान को धन्यवाद देते हुए कहा कि उनकी व्यस्तता के बावजूद इस कार्यक्रम में शामिल होना गोरखा रेजीमेंट के प्रति उनके समर्पण को दर्शाता है। मुख्यमंत्री ने उत्तर प्रदेश सरकार की पहलों का जिक्र किया, जैसे पुलिस बल में स्मारकों का निर्माण, शहीदों के परिवारों को 50 लाख रुपये की सहायता, नौकरी और स्मारकों का नामकरण। उन्होंने अग्निवीर योजना के तहत लौटने वाले जवानों के लिए पुलिस में 20 प्रतिशत आरक्षण की घोषणा भी दोहराई।

 

युवाओं में सेना के प्रति आकर्षण बढ़ाएगा यह युद्ध स्मारक- सीएम
मुख्यमंत्री ने युद्ध स्मारक पर श्रद्धासुमन अर्पित कर वीर जवानों को सलामी दी। उन्होंने कहा कि यह परियोजना न केवल गोरखपुर के कूनराघाट क्षेत्र में रहने वाले हजारों पूर्व गोरखा सैनिकों के परिवारों को गौरव की अनुभूति कराएगी, बल्कि युवाओं में सेना के प्रति आकर्षण बढ़ाएगी। सीएम योगी ने कहा कि गोरखपुर में नया सैनिक स्कूल स्थापित किया गया है, जो विकसित भारत के संकल्प को साकार करने में मदद करेगा। उन्होंने 'नेशन फर्स्ट' के भाव पर जोर देते हुए कहा कि हर नागरिक के कर्तव्य निर्वहन से ही लक्ष्य प्राप्त होंगे।


 

सिविल-मिलिट्री फ्यूजन का प्रतीक बनेगा यह स्मारक- सीडीएस
कार्यक्रम में सीडीएस जनरल अनिल चौहान ने गोरखा सैनिकों की वीरता को सलाम किया। उन्होंने कहा कि आज का दिन ऐतिहासिक है। 1886 में कुनराघाट में गोरखा रिक्रूटिंग डिपो की स्थापना हुई थी। प्रथम विश्व युद्ध में गोरखा सैनिकों ने अदम्य साहस दिखाया और कम से कम 20 हजार शहीद हुए। 1925 में इस युद्ध स्मारक की स्थापना हुई। आज इसका नवीनीकरण हमारी दूरदर्शिता का प्रमाण है। सीडीएस चौहान ने योगी सरकार को धन्यवाद देते हुए कहा कि यह स्मारक सिविल-मिलिट्री फ्यूजन का प्रतीक बनेगा। उन्होंने तीन कारणों से इसे महत्वपूर्ण बताया, पहला, गोरखा सैनिकों और भारतीय सेना के करीबी रिश्तों की पहचान, दूसरा, उनकी सदियों पुरानी निस्वार्थ सेवा और बहादुरी और तीसरा, भारत-नेपाल संबंधों को मजबूत करने की प्रतिबद्धता। सीडीएस ने कहा कि आज परिवर्तन का समय है। हम विकसित भारत की कल्पना करते हैं, लेकिन अतीत को भूलना नहीं चाहिए। गोरखा सैनिकों का बलिदान हमारे लिए प्रेरणास्रोत है, जो आने वाली पीढ़ी को प्रेरित करेगा। 

संग्रहालय में क्या होगा खास
यह संग्रहालय गोरखा रेजीमेंट की गौरवगाथा को डिजिटल रूप से प्रस्तुत करेगा। इसमें डिजिटल और साउंड एंड लाइट शो के माध्यम से वीर जवानों की कहानियां जीवंत होंगी। 7डी थिएटर, दीवारों पर म्यूरल पेंटिंग और वीडियो डॉक्यूमेंट्री आकर्षण का केंद्र होंगे। 

कार्यक्रम को सीडीएस अनिल चौहान, केंद्रीय ग्रामीण विकास राज्यमंत्री कमलेश पासवान, सांसद रविकिशन शुक्ल और गोरखा ब्रिगेड के प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल संजीव सिंह चौहान ने भी संबोधित किया। इस अवसर पर महापौर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव, एमएलसी डॉ धर्मेंद्र सिंह, विधायक विपिन सिंह, महेंद्रपाल सिंह, राजेश त्रिपाठी, डॉ विमलेश पासवान, प्रदीप शुक्ल, सरवन निषाद, गोरखा ब्रिगेड के पूर्व प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल एके सिंह सहित गोरखा रेजिमेंट, जीआरडी व सेना के कई अधिकारीगण मौजूद रहे। 

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