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'श्रीलंका के 'इंडिया फर्स्ट' की घोषणा विदेश नीति की वैश्विक स्वीकार्यता'

Mon, 31 Aug 2020 12:45 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Mon, 31 Aug 2020 12:45 PM IST
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CM Yogi Adityanath join online lecture closing ceremony of MP PG College Jungle Dhusad
एमपी पीजी कॉलेज में आयोजित संगोष्ठी समापन समारोह को संबोधित करते सीएम योगी। - फोटो : अमर उजाला।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री एवं गोरक्षपीठाधीश्वर महंत योगी आदित्यनाथ ने कहा कि श्रीलंका द्वारा ‘इंडिया फर्स्ट’ की उद्घोषणा भारतीय विदेश नीति की वैश्विक स्वीकार्यता का प्रमाण है। भारत की विदेश नीति ‘रामराज्य की नीति’ रही है। भारत के जितने भी पड़ोसी हैं वे सभी भारतीय संस्कृति की साझी विरासत हैं।

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भारत की परंपराओं को आज वैश्विक स्वीकार्यता मिल रही है। कुछ ऐसे पड़ोसी भारत के हैं जो पूरी दुनिया के लिए चुनौती बने हुए हैं। उनका सामना करने के लिए भारतीय विदेश नीति से साम्य रखने वाले देशों को एकजुट होकर शांति और विकास के पहिए को आगे बढ़ाना होगा।
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एमपी पीजी कॉलेज जंगल धूसड़ में आयोजित दो दिवसीय ऑनलाइन व्याख्यान के समापन समारोह में सीएम योगी भी शामिल थे। कहा कि इंडोनेशिया की रामलीला मंडली मानती है कि इस्लाम हमारी उपासना विधि है। राम तो हमारे पूर्वज हैं और हम सदैव आत्मिक जुड़ाव भगवान राम से रखते हैं। श्रीलंका, मालदीव, बांग्लादेश सभी स्वीकार करते हैं कि भारत की पड़ोस नीति अत्यंत उदार और सहिष्णु है।
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इसके पूर्व चौथे तकनीकी सत्र में ‘भारत-चीन संबंधों का नवीनतम आयाम’ विषय पर प्रो. जी. रामरेड्डी ने विचार रखे। उन्होंने कहा कि भारत आज अपने मित्र पड़ोसियों से कम शत्रु पड़ोसियों से अधिक घिरा हुआ है। चीन ने विश्व के समक्ष अपना जो चित्र प्रस्तुत किया है उसे वैश्विक स्वीकार्यता नहीं मिल सकती।

काशी हिंदू विश्वविद्यालय, वाराणसी के प्रो. तेज प्रताप सिंह ने कहा कि शी जिनपिंग की चीन नीति में विपरीत रूप से साम्राज्यवादी तथा विस्तारवादी स्वरूप में दिखाई देता है। इससे सीमा पर समस्याएं बढ़ी हैं। गोवा विश्वविद्यालय के प्रो. राहुल मणि त्रिपाठी ने कहा कि सभी पड़ोसी राष्ट्रों को यह तय करना होगा कि वे दक्षिण एशियाई राष्ट्रों के साथ विदेश नीति को किस प्रकार तय करें कि उसका सकारात्मक प्रभाव पूरे उपक्षेत्र में दिखाई दे।


समापन समारोह में लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) दुष्यंत सिंह, पुणे से प्रो. गौतम सेन, गुजरात से प्रो. मनीष, मुंबई से प्रो. लियाकत खान, प्रो. हर्ष सिन्हा, डॉ. बलवान सिंह सहित गुजरात, पश्चिम बंगाल, हिमाचल, महाराष्ट्र, दक्षिण भारत सहित अनेक प्रांतों से प्रतिभागी ऑनलाइन सम्मिलित हुए। कार्यक्रम का संचालन संगोष्ठी संयोजक डॉ. अविनाश प्रताप सिंह, प्रश्न संयोजन डॉ. कृष्ण कुमार ने किया।

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