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गोरखपुर: कब्रिस्तानों में जगह की कमी से जूझ रहा मसीही समाज, एक के ऊपर एक दफन किए जा रहे शव
Wed, 19 May 2021 12:15 PM IST
vivek shukla
अविनाश श्रीवास्तव, गोरखपुर।
अविनाश श्रीवास्तव, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Wed, 19 May 2021 12:15 PM IST
सार
मसीही समाज की 50 हजार से अधिक की आबादी पर जिले में है सिर्फ चार कब्रिस्तान। मुख्यमंत्री को लिखेंगे पत्र, और जगह मांगेंगे।
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पैडलेगंज कब्रिस्तान।
- फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले में मसीही समाज कब्रिस्तान में जगह की कमी से जूझ रहा है। हालात ये है कि जगह की कमी के कारण अब शवों को एक के ऊपर एक दफन किया जा रहा है। मसीही समाज लगातार कब्रिस्तान के लिए और जगह की मांग कर रहा है। मसीही समाज की परंपरा के अनुसार ताबूत में रखकर शव दफन करने के बाद कब्र को पक्का किया जाता है। इससे कब्रिस्तान में जगह कम होती जाती है।
शहर में मसीही समाज की 50 हजार से ज्यादा की आबादी के बीच केवल चार कब्रिस्तान ही हैं। इनमें सबसे बड़ा कब्रिस्तान पैडलेगंज में तो वहीं बशारतपुर, पादरी बाजार एवं राप्तीनगर में छोटे कब्रिस्तान हैं। पैडलेगंज का कब्रिस्तान मसीहियों के लिए सार्वजनिक है।
बशारतपुर का कब्रिस्तान सेंट जॉन चर्च के सदस्यों के लिए, पादरी बाजार कब्रिस्तान सेंट मार्क चर्च के सदस्यों के लिए और राप्तीनगर का कब्रिस्तान मसीही कलीसिया चर्च के सदस्यों के लिए ही है। पैडलेगंज कब्रिस्तान शहर का सबसे पुराना कब्रिस्तान है जहां आधे हिस्से में अंग्रेजों के शव दफन हैं। बाकी जगह पर आम लोगों के शव दफन किए जाते हैं।
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वहीं कुछ कब्रिस्तान में जगह की कमी के कारण शव को एक के ऊपर एक दफन किया जा रहा है। मसीही समाज के पुरोहित लंबे समय से कब्रिस्तान की मांग कर रहे हैं, लेकिन उन्हें किसी कब्रिस्तान के लिए जगह नहीं मिल सकी है।
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शहर में मसीही समाज की 50 हजार से ज्यादा की आबादी के बीच केवल चार कब्रिस्तान ही हैं। इनमें सबसे बड़ा कब्रिस्तान पैडलेगंज में तो वहीं बशारतपुर, पादरी बाजार एवं राप्तीनगर में छोटे कब्रिस्तान हैं। पैडलेगंज का कब्रिस्तान मसीहियों के लिए सार्वजनिक है।
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बशारतपुर का कब्रिस्तान सेंट जॉन चर्च के सदस्यों के लिए, पादरी बाजार कब्रिस्तान सेंट मार्क चर्च के सदस्यों के लिए और राप्तीनगर का कब्रिस्तान मसीही कलीसिया चर्च के सदस्यों के लिए ही है। पैडलेगंज कब्रिस्तान शहर का सबसे पुराना कब्रिस्तान है जहां आधे हिस्से में अंग्रेजों के शव दफन हैं। बाकी जगह पर आम लोगों के शव दफन किए जाते हैं।
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वहीं कुछ कब्रिस्तान में जगह की कमी के कारण शव को एक के ऊपर एक दफन किया जा रहा है। मसीही समाज के पुरोहित लंबे समय से कब्रिस्तान की मांग कर रहे हैं, लेकिन उन्हें किसी कब्रिस्तान के लिए जगह नहीं मिल सकी है।
डायसिस ऑफ लखनऊ के कोषाध्यक्ष रेव्ह डीआर लाल ने बताया कि जनसंख्या की तुलना में कब्रिस्तान कम हैं। इधर मौत का आंकड़ा भी बढ़ा है। ऐसे में कई कब्रिस्तान में शवों को दफनाने के लिए जगह की कमी हो रही है। इस संदर्भ में जल्द ही बैठक कर पत्र के माध्यम से मुख्यमंत्री को अवगत कराया जाएगा।
डीन ऑफ गोरखपुर रेव्ह अजीत लॉरेंस ने बताया कि सभी कब्रिस्तान लगभग भर गए हैं। ऐसे में अब दो कब्रों के बीच की जगह में पांच फीट पर शव दफनाने की तैयारी है। जगह की कमी को लेकर जिम्मेदारों को अवगत कराया गया है, लेकिन अबतक कब्रिस्तान के लिए दूसरी जगह नहीं मिल सकी है।
फु गोस्पल चर्च मोती पोखरा के पुरोहित रेव्ह एबी लाल ने बताया कि जगह की कमी के कारण मसीही प्रशासन की ओर से कब्र को पक्का करने पर रोक लगाई गई है। बावजूद इसके लोग कब्र को पक्का करा रहे हैं। कई जगह कब्र के उपर शव दफनाए जा रहे हैं। सार्वजनिक कब्रिस्तान के लिए जगह की आवश्यकता है।
सेंट जॉन चर्च बशारतपुर के पुरोहित रेव्ह रौशन लाल ने बताया कि हमारे यहां जगह की कोई कमी नहीं है। शव को दफनाने में कोई दिक्कत नहीं हो रही है। एक स्थान पर एक ही शव दफनाए जा रहे हैं। इन दिनों सिर्फ कुछ बुजुर्गो का ही निधन हुआ है, बाकी स्थितियां सामान्य हैं।
डीन ऑफ गोरखपुर रेव्ह अजीत लॉरेंस ने बताया कि सभी कब्रिस्तान लगभग भर गए हैं। ऐसे में अब दो कब्रों के बीच की जगह में पांच फीट पर शव दफनाने की तैयारी है। जगह की कमी को लेकर जिम्मेदारों को अवगत कराया गया है, लेकिन अबतक कब्रिस्तान के लिए दूसरी जगह नहीं मिल सकी है।
फु गोस्पल चर्च मोती पोखरा के पुरोहित रेव्ह एबी लाल ने बताया कि जगह की कमी के कारण मसीही प्रशासन की ओर से कब्र को पक्का करने पर रोक लगाई गई है। बावजूद इसके लोग कब्र को पक्का करा रहे हैं। कई जगह कब्र के उपर शव दफनाए जा रहे हैं। सार्वजनिक कब्रिस्तान के लिए जगह की आवश्यकता है।
सेंट जॉन चर्च बशारतपुर के पुरोहित रेव्ह रौशन लाल ने बताया कि हमारे यहां जगह की कोई कमी नहीं है। शव को दफनाने में कोई दिक्कत नहीं हो रही है। एक स्थान पर एक ही शव दफनाए जा रहे हैं। इन दिनों सिर्फ कुछ बुजुर्गो का ही निधन हुआ है, बाकी स्थितियां सामान्य हैं।
संक्रमण से मृतकों के लिए कब्रिस्तान में अलग जगह
कोविड-19 महामारी के कारण हुई मौत के बाद शवों को दफन करने के लिए मुस्लिम कब्रिस्तानों में खास व्यवस्था की गई है। ऐसी मिट्टी (पार्थिव शरीर) के लिए कब्रिस्तानों में एक अलग इलाका निर्धारित किया गया है। इसके पीछे कोविड संक्रमितों की पहचान होने के साथ ही कब्रिस्तान में आने वाले लोगों की हिफाजत करना है।
शहर के सबसे बड़े कब्रिस्तान मुबारक खां शहीद कब्रिस्तान की देखभाल करने वाले शाकिर बताते हैं कि कोरोना संक्रमितों को दफनाने की अलग गाइडलाइन है। ऐसी मिट्टी के लिए कब्रिस्तान में एक अलग इलाका निर्धारित किया गया है। यदि कहीं कोविड मरीज का इंतकाल (देहांत) होता है तो प्रशासन की गाइडलाइन के मुताबिक अलग इलाके में कब्र खोदी जाती है। शहर के गोरखनाथ कब्रिस्तान, कच्ची बाग कब्रिस्तान, बाले मियां का मैदान सहित अन्य छोटे कब्रिस्तानों में भी कोविड संक्रमितों की मिट्टी दफनाने की कमोबेश यही व्यवस्था है।
शहर के सबसे बड़े कब्रिस्तान मुबारक खां शहीद कब्रिस्तान की देखभाल करने वाले शाकिर बताते हैं कि कोरोना संक्रमितों को दफनाने की अलग गाइडलाइन है। ऐसी मिट्टी के लिए कब्रिस्तान में एक अलग इलाका निर्धारित किया गया है। यदि कहीं कोविड मरीज का इंतकाल (देहांत) होता है तो प्रशासन की गाइडलाइन के मुताबिक अलग इलाके में कब्र खोदी जाती है। शहर के गोरखनाथ कब्रिस्तान, कच्ची बाग कब्रिस्तान, बाले मियां का मैदान सहित अन्य छोटे कब्रिस्तानों में भी कोविड संक्रमितों की मिट्टी दफनाने की कमोबेश यही व्यवस्था है।