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चीनी यात्री फाह्यान अपनी किताब में किया है इस मंदिर का जिक्र, इतिहास जानकर हो जाएंगे हैरान
Sun, 31 May 2020 12:03 PM IST
vivek shukla
अमर उजाला ब्यूरो, सिद्धार्थनगर।
अमर उजाला ब्यूरो, सिद्धार्थनगर।
Published by: vivek shukla
Updated Sun, 31 May 2020 12:03 PM IST
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समय माता मंदिर।
- फोटो : अमर उजाला।
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सिद्धार्थनगर के इटवा तहसील के कठेला बाजार में विराजमान समय माता का दर्शन करने से भक्तों की खाली झोली भर जाती है। इस मंदिर का निर्माण बहुत ही आकर्षक तरीके से कराया गया है।
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आदि शक्ति के दर्शन करने के लिए हजारों की संख्या में भक्त आते हैं। इस मंदिर को पर्यटन के रूप में विकसित करने की तैयारी चल रही है। नवरात्रि के दिनों में तो यहां पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु हाजिरी लगाते हैं। समय माता का मंदिर प्राचीन काल से ही आस्था का केंद्र बना हुआ है।
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तुलसियापुर चौराहे से करीब 10 किलोमीटर दूर बूढ़ी राप्ती नदी के तट पर कठेला में समय माता का प्राचीन मंदिर है। नवरात्रि के समय यहां पर बड़ी संख्या में लोग कढ़ाई चढ़ाने आते हैं। मुंडन व अन्य संस्कार कराने के लिए लोग इस मंदिर पर आते हैं।
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यहां हर मुराद होती है पूरी
मनौती पूरी होने पर मंदिर परिसर में प्रतीक के रुप में हाथी की स्थापना की जाती है। मान्यता है कि समय माता का दर्शन मात्र से भक्तों की खाली झोली भर जाती है। क्षेत्रीय श्रद्धालुओं के साथ-साथ नेपाल के भी श्रद्धालु यहां भक्तिभाव से पहुंचते हैं।
मंदिर के मुख्य पुजारी हंसुदास जी महाराज का कहना है कि इस ऐतिहासिक मंदिर का वर्णन चीनी यात्री फाह्यान की पुस्तक में भी मिलता है। मध्यकाल में यहां की रानी दूसरे राज्य के राजा से अपने सम्मान को बचाने के लिए यहीं सती हो गई थीं और बाद में मूर्ति रुप में अवतरित हुई थीं।
मुख्य पुजारी के अनुसार मंदिर में स्थित समय माता व शंकर जी की स्थापना किसी ने नहीं कराया है और यह स्वयं अवतरित हुए हैं। यहां पर समय माता व शिव जी की 108 फिट ऊंचा मंदिर भी है। वनदेवी, हनुमान मंदिन व भव्य यज्ञशाला भी है।
मंदिर के मुख्य पुजारी हंसुदास जी महाराज का कहना है कि इस ऐतिहासिक मंदिर का वर्णन चीनी यात्री फाह्यान की पुस्तक में भी मिलता है। मध्यकाल में यहां की रानी दूसरे राज्य के राजा से अपने सम्मान को बचाने के लिए यहीं सती हो गई थीं और बाद में मूर्ति रुप में अवतरित हुई थीं।
मुख्य पुजारी के अनुसार मंदिर में स्थित समय माता व शंकर जी की स्थापना किसी ने नहीं कराया है और यह स्वयं अवतरित हुए हैं। यहां पर समय माता व शिव जी की 108 फिट ऊंचा मंदिर भी है। वनदेवी, हनुमान मंदिन व भव्य यज्ञशाला भी है।