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पर्यावरण व जीव-जंतु संरक्षण में सहायक होगा बाल मेला : प्रो. पूनम टंडन

Sat, 02 Dec 2023 01:54 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sat, 02 Dec 2023 01:54 AM IST
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Children's fair will be helpful in environment and animal conservation: Prof. Poonam Tandon

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संवाद न्यूज एजेंसी
गोरखपुर। पर्यावरण के लिए पेड़-पौधों के साथ जीव-जंतु बेहद जरूरी हैं। मौजूदा दौर में दोनों की अनदेखी पर चिंता जाहिर करते हुए दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने चेताया कि अगर हम अब भी नहीं संभले तो मानव जीवन गंभीर संकट में पड़ सकता है।
शुक्रवार को अमर उजाला की ओर आयोजित बाल मेले में प्रो. टंडन ने छात्र-छात्राओं को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक किया। उन्होंने कहा कि पेड़-पौधे और जीव-जंतु एक दूसरे के पर्याय हैं। मनुष्य के जीवन के लिए इनका संतुलन आवश्यक है। मौसम का चक्र अनुकूल बना रहे इसके लिए भी पर्यावरण संरक्षण के लिए सचेत होना होगा। इस मसले पर सरकार भी गंभीर है। पौधरोपण के साथ पर्यावरण के जागरूकता को लेकर विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
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प्रो टंडन ने जीव-जंतुओं के प्रति बच्चों को जागरूक करने के लिए अमर उजाला के प्रयास की सराहना की। प्रो. टंडन ने बच्चों से कहा कि चिड़ियाघर घूमने से जीव-जंतु के बारे में तो जानेंगे ही उनके प्रति लगाव भी बढ़ेगा। पेड़-पौधों और जीव-जंतु से प्रेम स्वस्थ और सुरक्षित वातावरण देने में सहायक होंगे।
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छात्रों में होनी चाहिए इतिहास को जानने की जिज्ञासा : प्रो. जेपी सैनी
फोटो
संवाद न्यूज एजेंसी
गोरखपुर। मदनमोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. जेपी सैनी ने छात्र-छात्राओं को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करते हुए इतिहास से सदैव सबक लेने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि मानव जीवन के लिए प्राकृतिक संसाधनों और जीव-जंतु के प्रति सकारात्मक नजरिया आज की जरूरत है।


अमर उजाला के बाल मेले में प्रो. सैनी ने कहा कि गोरखपुर का चिड़ियाघर शहीद अशफाक उल्ला खां के नाम पर है। यह शहीदों के प्रति सम्मान जाहिर करने का एक प्रयास है। उन्होंने शहीद अशफाक उल्ला खां के बारे में विद्यार्थियों से चर्चा की। कहा की देश की आजादी की गाथा में काकोरी कांड को नहीं भुलाया जा सकता। इस कांड में चार क्रांतिकारियों रामप्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्ला खां, राजेंद्र नाथ लाहिड़ी और रोशन सिंह को फांसी दे दी गई। कुलपति ने बताया कि इन महानायकों के बलिदान से ही हमें आजादी मिली। उन्होंने बच्चों को इतिहास की जानकारी के प्रति जिज्ञासा रखने के लिए प्रेरित किया। बाल मेले में सांस्कृतिक कार्यक्रम की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि बच्चों में प्रतिभाएं कूट-कूट कर भरी हैं। इस प्रकार के आयोजन बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए बेहतर मंच प्रदान करते हैं।
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