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Gorakhpur News: बदलता मौसम बुजुर्गों को दे रहा है दर्द
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गोरखपुर। मौसम बदल रहा है, बदलते मौसम ने बुजुर्गों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। सुबह-शाम की ठंड ने सांस संबंधी बीमारियों को बढ़ा दिया है। इन दिनों जिला अस्पताल में रोजाना बड़ी संख्या में मरीज पहुंच रहे हैं, जिनमें बड़ी संख्या बुजुर्गों की है जो अस्थमा, खांसी, सीने में जकड़न और सांस फूलने की शिकायत लेकर आते हैं।
जिला अस्पताल वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. बीके सुमन ने बताया कि इस मौसम में अस्थमा और एलर्जी के रोगियों को खास ध्यान रखने की जरूरत होती है। मौसम के इस बदलाव की वजह से खासकर बुजुर्ग काफी प्रभावति होते है ऐसे मरीज जिनको पहले से दिक्कत है तो वे सावधान हो जाए। सुबह या देर शाम घर से निकलते समय मुंह और नाक को कपड़े या मास्क से ढकें, ठंडी हवा और धूल से बचें और अपनी नियमित दवा समय पर लेते रहे।
डॉ. प्रशांत सिंह ने बताया कि सांस की तकलीफ या सीने में जकड़न महसूस होते ही तुरंत डॉक्टर से सलाह लें। इस समय सेल्फ-मेडिकेशन ऐसे मरीजों के लिए खतरनाक साबित हो सकता है।
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महेवा के रहने वाले 65 वर्षीय नंदलाल ने बताया कि मौसम बदलते ही खांसी और सांस फूलने की समस्या बढ़ गई है। बिना इन्हेलर के सांस लेना मुश्किल हो जाता है। पचपेड़वा की रहने वाली 66 वर्षीय पार्वती देवी ने बताया कि ठंड शुरू होते ही खांसी के साथ सांस लेने में दिक्कत होनी शुरू हो गई है।
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जिला अस्पताल वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. बीके सुमन ने बताया कि इस मौसम में अस्थमा और एलर्जी के रोगियों को खास ध्यान रखने की जरूरत होती है। मौसम के इस बदलाव की वजह से खासकर बुजुर्ग काफी प्रभावति होते है ऐसे मरीज जिनको पहले से दिक्कत है तो वे सावधान हो जाए। सुबह या देर शाम घर से निकलते समय मुंह और नाक को कपड़े या मास्क से ढकें, ठंडी हवा और धूल से बचें और अपनी नियमित दवा समय पर लेते रहे।
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डॉ. प्रशांत सिंह ने बताया कि सांस की तकलीफ या सीने में जकड़न महसूस होते ही तुरंत डॉक्टर से सलाह लें। इस समय सेल्फ-मेडिकेशन ऐसे मरीजों के लिए खतरनाक साबित हो सकता है।
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महेवा के रहने वाले 65 वर्षीय नंदलाल ने बताया कि मौसम बदलते ही खांसी और सांस फूलने की समस्या बढ़ गई है। बिना इन्हेलर के सांस लेना मुश्किल हो जाता है। पचपेड़वा की रहने वाली 66 वर्षीय पार्वती देवी ने बताया कि ठंड शुरू होते ही खांसी के साथ सांस लेने में दिक्कत होनी शुरू हो गई है।