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गोरखपुर: मौसम में बदलाव से चिकन पॉक्स का खतरा, जानिए डॉक्टर क्या दें रहे हैं सलाह

Thu, 07 Apr 2022 12:10 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Thu, 07 Apr 2022 12:10 PM IST
सार

डॉ. एनके वर्मा ने बताया कि चिकन पॉक्स बीमारी के मामले में ग्रामीण इलाकों में कई भ्रांतियां हैं। इसे दूर करने की जरूरत है। ग्रामीण क्षेत्रों में लोग इसे माताजी कहते हैं। जबकि, यह संक्रामक बीमारी है।

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Change in weather risk of chicken pox
सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बदल रहे मौसम ने शहर में चिकन पॉक्स के मामले बढ़ा दिए हैं। सरकारी और निजी अस्पतालों में चिकन पॉक्स के मरीजों की संख्या बढ़ रही है। शहर में कई बच्चे और युवा चिकनपॉक्स से पीड़ित मिले हैं। जिला अस्पताल के चर्म रोग विशेषज्ञ डॉ एनके वर्मा ने बताया कि इससे पीड़ित मरीज घर से न निकलें और होम आइसोलेशन में रहें। क्योंकि, यह भी एक संक्रामक बीमारी है। अगर लोग एक-दूसरे से मिलते हैं, तो बीमारी फैलने का खतरा ज्यादा है।

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जानकारी के मुताबिक, मंगलवार को जिला अस्पताल में 10 से 12 नए मरीज पहुंचे थे। इनमें तीन से 10 साल के पांच बच्चे और चार युवा शामिल थे। इसके अलावा युवतियां भी चिकन पॉक्स से पीड़ित मिल रही हैं। डॉक्टरों के मुताबिक, शहर के मैत्रीपुरम, छोटे काजीपुर, रामजानकी नगर, तारामंडल, शाहपुर, रुस्तमपुर, राप्ती नगर, 10 नंबर बोरिंग आदि इलाकों से ज्यादा मरीज आ रहे हैं। इतना ही नहीं, वायरल के मरीजों की भी संख्या तेजी से बढ़ी है। उल्टी-दस्त के मरीजों की संख्या में भी इजाफा हुआ है। 15 से 20 मरीज प्रतिदिन उल्टी दस्त के पहुंच रहे हैं।

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चर्म रोग विभाग के ओपीडी में पहुंच रहे 300 के आसपास मरीज

जिला अस्पताल में प्रतिदिन 1600-1800 का ओपीडी है। जब से मौसम में बदलाव हुआ है और गर्मी बढ़ी है, चर्म रोग के मरीजों की संख्या बढ़ गई है। प्रतिदिन 250 से 300 मरीज सिर्फ चर्म रोग विभाग के ओपीडी में पहुंच रहे हैं। इनमें सबसे ज्यादा मरीज चिकन पॉक्स के हैं। जिला अस्पताल के चर्म रोग विशेषज्ञ डॉ. नवीन वर्मा ने बताया कि चिकन पॉक्स संक्रामक बीमारी है। यह दस साल तक के बच्चों में तेजी से फैलती है। घर में एक बच्चे को हो जाने पर अन्य बच्चों को होने की आशंका ज्यादा रहती है।

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लक्षण

  • तेज बुखार आना, त्वचा पर गुलाबी रंग के दाने विकसित होना।
  • ये दाने मुख्य रूप से शरीर के मध्य भाग, सिर, गर्दन, पेट, पीठ छाती आदि पर दिखाई देते हैं।
  • शरीर में दाने बड़े या फिर छोटे आकार के होते हैं।

बचाव और उपचार

  • मरीज को अलग रखना आवश्यक है।
  • अगर किसी बच्चे को यह बीमारी हो जाती है तो उसे स्कूल या कहीं बाहर न जाने दें।
  • रोगी को छींकने तथा खांसते समय नाक व मुंह पर कपड़ा रखना चाहिए।
  • रोगी की नाक और मुंह से निकले वाले स्राव को जमीन में दबा देना चाहिए।
  • जूस, नारियल, पानी का सेवन ज्यादा से ज्यादा करें।

ग्रामीण क्षेत्रों में इस बीमारी को कहते हैं माताजी

डॉ. एनके वर्मा ने बताया कि चिकन पॉक्स बीमारी के मामले में ग्रामीण इलाकों में कई भ्रांतियां हैं। इसे दूर करने की जरूरत है। ग्रामीण क्षेत्रों में लोग इसे माताजी कहते हैं। जबकि, यह संक्रामक बीमारी है। इसका इलाज है। सही समय पर इलाज होने से मरीज पूरी तरह से स्वस्थ हो जाता है। इसलिए अगर किसी को यह बीमारी है तो वह तत्काल डॉक्टर से इलाज कराए। झाड़-फूंक के चक्कर में न पड़े।

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