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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Gorakhpur News ›   Chandan sentenced in extortion case from Irrigation Department official

Court News: सिंचाई विभाग के अधिकारी से रंगदारी मामले में चंदन को सजा, सुनाई छह साल की कैद

Fri, 27 Oct 2023 12:30 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Fri, 27 Oct 2023 12:30 PM IST
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Chandan sentenced in extortion case from Irrigation Department official
सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला

सिंचाई विभाग के अधिकारी से रंगदारी मांगने के मामले में कोर्ट ने टॉप टेन बदमाश चंदन सिंह उर्फ देवकली को छह साल तीन माह 21 दिन की सजा सुनाई गई। इस मामले में शाहपुर थाने में केस दर्ज किया गया था।

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पुलिस महानिदेशक, द्वारा चलाए जा रहे ऑपरेशन कनविक्शन अभियान के क्रम में न्यायालय में विचाराधीन गंभीर अपराधों की निरंतर पैरवी के परिणामस्वरूप बृहस्पतिवार को न्यायालय सीजेएम ने धारा 386/507 में अभियुक्त चंदन सिंह निवासी कुशहरा थाना चिलुआताल को दोषी पाने पर कारावास से दंडित किया है।
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सजा दिलाने में एसपीओ संदीप सिंह, एपीओ जज कुमार राणा, एपीओ प्रत्युष कुमार दुबे, प्रभारी निरीक्षक शाहपुर शशिभूषण राय व मॉनिटरिंग सेल का विशेष योगदान रहा।
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इंश्योरेंस कंपनी को क्षतिपूर्ति देने का आदेश

जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग के अध्यक्ष चन्द्र प्रकाश अस्थाना व सदस्य कृष्णा नन्द मिश्र ने फ्यूचर जनरली इंडिया लाइफ इंश्योरेंस कंपनी के विरुद्ध निर्णय दिया कि वह उपभोक्ता प्रदीप को आठ हजार 90 रुपये 99 पैसे सात प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ भुगतान करें।

आदेश का अनुपालन न करने पर ब्याज नौ प्रतिशत वार्षिक देय होगा। इसके अतिरिक्त बतौर क्षतिपूर्ति एवं वाद व्यय के रूप में 12 हजार रुपए भी प्रदान करें। आयोग के समक्ष ग्राम छपरा प्यागपुर सोहनाग तिलौली जिला देवरिया निवासी उपभोक्ता प्रदीप की ओर से अधिवक्ता ऋषि श्रीवास्तव ने परिवाद दाखिल किया था।

उनका कहना था कि उपभोक्ता ने विपक्षी के वहां से फ्यूचर गारंटी एडवांस प्लान के अंतर्गत दो अगस्त 2010 को बीमा लिया था। उपभोक्ता ने आर्थिक परेशानी के कारण आठ मई 2016 को बीमा के अंतर्गत जमा प्रीमियम की धनराशि को वापस करने का अनुरोध किया परंतु विपक्षी ने प्रीमियम की धनराशि वापस नहीं की।

उपभोक्ता ने विपक्षी को विधिक नोटिस भेजवाया। नोटिस का जवाब बीमा कंपनी ने यह दिया कि उक्त धनराशि को बीमाधारक के सलेमपुर स्थित सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया की शाखा में भुगतान कर दिया गया है। जबकि परिवादी का सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया शाखा सलेमपुर में कोई खाता भी नहीं है।
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