दंत चिकित्सकों के लिए चुनौती बना कोरोना, इलाज में लाएंगे ये बदलाव, तभी होगा संक्रमण से बचाव
- कोविड-19 के सुरक्षा मानकों का पालन बनी चुनौती
- मरीज के लार में ही सबसे अधिक वायरस की मौजूदगी
- सर्जिकल उपकरणों को अच्छी तरह से करें विसंक्रमित
- अब तापमान नापने व पीपीई किट की भी होगी जरूरत
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कोविड-19 यानि कोरोना वायरस के संक्रमण से खुद को बचाने के साथ ही सहायकों और मरीजों को भी बचाना दन्त चिकित्सकों (डेंटिस्टों) के लिए एक बड़ी चुनौती के रूप में है।
मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. श्रीकांत तिवारी ने बताया कि यह चुनौती इसलिए भी बढ़ गई है क्योंकि वायरस की सबसे अधिक मौजूदगी कोरोना मरीजों के लार में ही होती है और दांतों के चेकअप और इलाज के दौरान इससे बचना मुश्किल काम है। यही लार पानी की फुहार और खून के साथ बाहर निकलकर फर्श (सतह) पर भी गिर सकती है और संपर्क में आने वाले को संक्रमित कर सकती है।
जिला अस्पताल में दन्त चिकित्सक डॉ. राकेश यादव का कहना है कि पिछले माह प्रकाशित जर्नल ऑफ डेंटल रिसर्च में कहा गया है कि कोरोना के मरीजों की लार में वायरस की मौजूदगी करीब 91 फीसद तक हो सकती है। उनका कहना है कि मुंह की समस्या पूरे शरीर को प्रभावित कर सकती है, यही कारण है कि 90 फीसद से अधिक बीमारियों के लक्षण मुंह से ही दिखाई पड़ जाते हैं।
जरूरी सलाह
इसलिए कोरोना काल में लोगों को भी अधिक सतर्कता बरतनी चाहिए ताकि दांतों की समस्या के समाधान के लिए क्लीनिक तक न जाना पड़े और टेलीफोन पर ही जरूरी सलाह से दिक्कत से छुटकारा मिल सके। इसके लिए सरकारी और निजी चिकित्सकों से हेल्पलाइन नंबर पर मदद ली जा सकती है। इसके अलावा 'टेली-डेंटिस्टरी' भी शुरू की गई है, इस पर स्मार्टफोन या लैपटॉप के जरिए चिकित्सक से जरूरी सलाह ली जा सकती है ।
डॉ. राकेश का कहना है कि दांतों की सुरक्षा के लिए एहतियातन दिन में दो बार ब्रश करना चाहिए। चिपचिपी चीजों जैसे चॉकलेट आदि से दूर रहना चाहिए। गुनगुने पानी में नमक डालकर कुल्ला करना फायदेमंद हो सकता है। टूथ ब्रश करने से पहले हाथों को साबुन-पानी से अच्छी तरह से धुल लेना चाहिए। ब्रश को भी अच्छी तरह से धुलकर ही इस्तेमाल करें और बाद में बंद कर रखें।
अगर चिकित्सक के पास जाना बहुत ही जरूरी हो तो मास्क लगाकर जाएं और एक दूसरे से दो गज की दूरी बनाकर रखें। बुखार, खांसी या जुकाम है तो चिकित्सक को पहले से ही बता दें। यही छोटी-छोटी सावधानियां बरतकर हम खुद सुरक्षित रहने के साथ ही दूसरों को भी सुरक्षित रख सकते हैं।
सोशल डिस्टेंसिंग का पालन बना चुनौती
जरूरी बदलाव
- क्लीनिक में आने वालों का तापमान मापें
- भीड़ से बचने के लिए मरीजों का टाइम स्लॉट तय करें
- चेकअप या दांतों की सफाई व फिलिंग के दौरान पीपीई किट पहनें
- इंट्रा ओरल एक्स-रे से बचें
- एयरोसाल कम से कम करने की तरकीब निकालें
- थ्री वे सिरिंज का इस्तेमाल कम से कम करें
- सर्जिकल उपकरणों को विसंक्रमित करने की समुचित व्यवस्था करें