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गोरखपुर: मुख्य दोष सिद्ध आरोपी को दे दी पदोन्नति, लंबित जनहित याचिका से लड़ाई जारी रखेगी संगठन

अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Wed, 28 Jul 2021 10:01 AM IST

सार

संगठन वने लगाया आरोप, संदिग्ध सत्यनिष्ठा वाले आरोपियों को जिम्मेजदारी वाले पदों पर नियुक्त करना न्यायालय की अवेहलना। तीसरी आंख मानवाधिकारी ने बक्शीपुर खंड में वित्तीय अनियमितता की शिकायत की थी
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प्रतीकात्मक तस्वीर।
प्रतीकात्मक तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार

गोरखपुर में विद्युत वितरण खंड बक्शीपुर में गंभीर वित्तीय अनियमितता के मामले में जांच रिपोर्ट का अल्पीकरण कर चेरयरमैन पावर कारपोरेशन ने मुख्य दोष सिद्ध आरोपी आरसी पांडेय को पदोन्नति दी है। इसके खिलाफ भी तीसरी आंख मानवाधिकारी अपील करेगी। दोष सिद्ध संदिग्ध सत्यनिष्ठा वाले आरोपियों को विभागीय नियमावली व उच्च न्यायालय के निर्देशानुसार महत्वपूर्ण एवं जिम्मेदारी के पदों पर दायित्व नहीं दिया जाना चाहिए। दोष सिद्ध आरोपी और भ्रष्टाचारियों की जांच प्रमुख सचिव सतर्कता से कराई जाएगी। इसके अलावा उच्च न्यायालय में लंबित जनहित याचिका के माध्यम से संगठन अपनी लड़ाई आगे भी जारी रखेगी।
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संस्थापक महासचिव शैलेंद्र मिश्रा ने मंगलवार को चेयरमैन की कार्रवाई पर अपनी प्रतिक्रिया दी। बताया कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम खंड द्वितीय बक्शीपुर के भ्रष्ट लोक सेवकों द्वारा लगभग अरबों रुपए के कारित गंभीर वित्तीय अनियमितता व आर्थिक अपराध के संबंध में उनके संगठन की तरफ से एमडी पूर्वांचल व चेयरमैन से शिकायत की गई थी। इसका संज्ञान लेकर शासन की तरफ से त्रिस्तरीय जांच कमेटी ने 200 कनेक्शन संख्या पर हुए आर्थिक अपराध की पुष्टि की थी। 1527 प्रतियों में अपनी जांच रिपोर्ट भी एमडी पूर्वांचल को भेजी थी। 


तत्कालीन उप प्रबंधन निदेशक द्वारा आरोपियों के आर्थिक एवं राजनीतिक प्रभाव से प्रभावित होकर उक्त जांच रिपोर्ट के अनुरूप अपने निर्धारित दायित्वों के अनुरूप कार्यवाही नहीं की गई। आरोपियों को बचाने के लिए उनके द्वारा कूट रचित षड्यंत्र के तहत 1527 पन्ने की जांच रिपोर्ट को कारपोरेशन कार्यालय भेज दिया गया। 

इसी के बाद प्रमुख आरोपी तत्कालीन अधिशासी अभियंता आरसी पांडेय ने अपने आर्थिक एवं राजनीतिक प्रभाव से पावर कारपोरेशन को प्रभावित करते हुए 1527 पन्ने की उक्त जांच रिपोर्ट का अल्पीकरण कराने के उद्देश्य से मात्र 23 बिंदुओं पर मामले की जांच करवाई गई। इसमें आरोपी पाए जाने पर भ्रष्ट लोक सेवकों द्वारा कारित अपराध के निर्धारित दंड से बचाते हुए आंशिक दंड के रूप में अधिशासी अभियंता आरसी पांडे को 4 इंक्रीमेंट पैक, प्रतिकूल प्रविष्टि के साथ लगभग पांच लाख का अर्थदंड दिया गया। 

अवर अभियंता मनोज कुमार को निंदा प्रविष्टि दी गई तथा लेखाकार रामधनी को सेवा से पद्च्युत करते हुए अर्थदंड 493117 रुपए व धीरेंद्र चौधरी को सेवा से पदच्युत करते हुए 388584 रुपए का अर्थदंड लिपिक नितिन नारायण श्रीवास्तव को कार्य से पद अवनति करते हुए कार्यालय सहायक के पद के प्रारंभिक मूल वेतन पर अवनति कर 78892 रुपए का अर्थदंड दिया गया। इनसब के बाद भी आंशिक दोषी ही पाए जाने के बाद भी मुख्य आरोपी को पदोन्नति दी गई। इससे मुख्य आरोपी के प्रभाव उसकी कार्रवाई पर कितना अधिक है, स्पष्ट प्रतीत होता है।

आरसी पांडये ने जमा किया अर्थदंड
संगठन के अनुसार पूरे मामले के मुख्य आरोपी तत्कालीन अधिशासी अभियंता आरसी पांडेय ने सोमवार को ही अधिशासी अभियंता द्वितीय बक्शीपुर राजस्व में पांच लाख एक हजार नौ सौ सत्रह रूपये एक्सिस बैंक के खाता संख्या 331010100041672 में जमा करवा दिया। इस संबंध से फोन पर आरसी पांडेय से उनसे उनका पक्ष जानने के लिए फोन किया और पूछा तो उन्होंने किसी जुर्माने की बात से इंकार करते हुए अपने छोटे भाई के निधन में पारिवारिक व्यस्तता होने की बात कही। बताने पर कि उनके द्वारा सोमवार को ही जुर्माने की राशि जमा करवाई गई है, इसपर उन्होंने चुप्पी साध ली।

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