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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Gorakhpur News ›   Chairman Diwakar Singh and General Secretary Suresh Gupta claimed to expel each other during infighting in CDF U.P.

सीडीएफ यूपी में घमासान, अध्यक्ष-महामंत्री में टकराव, एक दूसरे को निष्कासित करने का किया दावा

Wed, 28 Oct 2020 12:36 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Wed, 28 Oct 2020 12:36 PM IST
सार

  • महामंत्री पक्ष ने लखनऊ के गिरिराज रस्तोगी को कार्यवाहक अध्यक्ष बनाया
  • संगठन में उठापटक की हलचल गोरखपुर में भी देखने को मिली

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Chairman Diwakar Singh and General Secretary Suresh Gupta claimed to expel each other during infighting in CDF U.P.
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट फेडरेशन (सीडीएफ) यूपी में घमासान मचा है। अलग-अलग मुद्दों पर अध्यक्ष दिवाकर सिंह और महामंत्री सुरेश गुप्ता ने एक दूसरे को ही संगठन से निष्कासित करने का दावा किया है। इस बीच महामंत्री पक्ष से लखनऊ के गिरिराज रस्तोगी को संगठन का कार्यवाहक अध्यक्ष बना दिया गया है। वह अप्रैल 2021 में चुनाव होने तक अपने पद पर बने रहेंगे।

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ऑल इंडिया ऑर्गेनाइजेशन ऑफ केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट फेडरेशन (एआईओसीडी) से सीडीएफ यूपी जुड़ा है। यह यूपी के दवा कारोबारियों का सबसे बड़ा व मजबूत संगठन माना जाता है, जो आंतरिक चुनौतियों से जूझ रहा है। संगठन के पदाधिकारी ही एक दूसरे के खिलाफ मोर्चा खोले हैं।
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दरअसल, सीडीएफ यूपी की आमसभा मंगलवार को हुई। इसमें अध्यक्ष दिवाकर सिंह पर दूसरे संगठन से जुड़ने के आरोप लगाए गए। इसपर जवाब भी मांगा गया लेकिन अध्यक्ष ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। इसे आमसभा ने संगठन विरोधी माना और उन्हें संगठन से निष्कासित करने का फैसला कर लिया। इससे पहले सीडीएफ यूपी के संरक्षक गिरिराज रस्तोगी व चेयरमैन इब्राहिम मंसूरी के माध्यम से अध्यक्ष को नोटिस भेजा गया था। संगठन की उठापटक पर गोरखपुर में भी हलचल देखने को मिली है। संगठन के अलग-अलग गुटों से जुड़े दवा कारोबारी दिनभर चर्चा में लगे रहे।

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अध्यक्ष दिवाकर सिंह ने कहा कि संरक्षक व चेयरमैन को नोटिस जारी करके जवाब मांगने का कोई अधिकार नहीं होता है। अध्यक्ष ही सर्वेसर्वा होता है। संगठन के किसी संविधान में नहीं लिखा है कि दूसरे संगठन में अध्यक्ष नहीं बन सकते हैं। अध्यक्ष की सहमति के बिना आमसभा नहीं बुलाई जा सकती है। गबन के आरोपों में घिरे महामंत्री को निष्कासित कर दिया गया है। अब वह संगठन के किसी पद पर नहीं रहेंगे।

महामंत्री सुरेश गुप्ता ने कहा कि विशेष आमसभा मंगलवार को ही हुई। एक संगठन में रहते हुए दिवाकर सिंह ने दूसरे संगठन के अध्यक्ष का पद स्वीकार कर लिया। आमसभा में इसपर चर्चा हुई तो दिवाकर सिंह ने इनकार भी नहीं किया। आमसभा ने ही अध्यक्ष को संगठन से निष्कासित करने का फैसला लिया है। लखनऊ के गिरिराज रस्तोगी को कार्यवाहक अध्यक्ष बनाया गया है। घर बैठकर कोई पत्र जारी करे और कहे कि महामंत्री को हटा दिया है। यह गैरकानूनी व असंवैधानिक है। निष्कासन का अधिकार सिर्फ आमसभा को प्राप्त है। अध्यक्ष का निष्कासन भी आमसभा के द्वारा किया गया है।

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