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एनईआर घोटाला: रेलवे के स्क्रैप टेंडर में बिचौलिए संग मिलकर अधिकारी करते थे 'सौदेबाजी', खुल रही कड़ियां
Mon, 30 Sep 2024 11:32 AM IST
रोहित सिंह
रोहित सिंह, गोरखपुर
रोहित सिंह, गोरखपुर
Published by: रोहित सिंह
Updated Mon, 30 Sep 2024 11:32 AM IST
सार
रेलवे में किसी फर्म ने स्कैप के किसी काम का टेंडर हासिल किया। इस फर्म के टेंडर हासिल करने और टेंडर का एलवन जारी होने के बाद विभागीय जिम्मेदार उनसे संपर्क करता था। इसके बाद टेंडर की कुल लागत का एक प्रतिशत कमीशन के तौर पर तय होता था। इस फर्म की सहमति के बाद उसे विजय मद्धेशिया के पास कमीशन की रकम भेजे जाने की सलाह दी जाती थी।
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गोरखपुर रेलवे स्टेशन (सांकेतिक तस्वीर)
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
पूर्वोत्तर रेलवे के मुख्यालय गोरखपुर के सामग्री प्रबंधन विभाग में भ्रष्टाचार के मामले में दिल्ली की सीबीआई टीम ने बड़ी कार्रवाई की है। अज्ञात और विश्वसनीय सूत्र की तहरीर पर सीबीआई ने मामले में केस दर्ज कर लिया है। सीबीआई ने जांच के दौरान पाया कि सूत्र की शिकायत पूरी तरह सही थी।
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तत्कालीन उप मुख्य सामग्री प्रबंधक(उप सीएमएम) ऋतुराज सिंह रेलवे के टेंडर में तत्कालीन मुख्य डिपो सामग्री अधीक्षक (सीडीएमएस) सत्यकाम सिंह के साथ भ्रष्टाचार में पूरी तरह लिप्त थे। इनका सहयोग बाहरी विजय कुमार मद्धेशिया करता था। इसके द्वारा ही रेलवे के टेंडर धारक फर्मों के द्वारा कमीशन की रकम इनके पास पहुंचाई जाती थी। जांच के बाद सीबीआई ने मामले में केस दर्ज कर तफ्तीश शुरू कर दी है।
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सीबीआई सूत्रों की मानें तो मामले में ये टीम बेहद गोपनीयता रखती थी। जैसे, राहुल नाम के रेलवे में किसी फर्म ने स्कैप के किसी काम का टेंडर हासिल किया। इस फर्म के टेंडर हासिल करने और टेंडर का एलवन जारी होने के बाद विभागीय जिम्मेदार उनसे संपर्क करता था।
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सीजीपीएससी मामले में जांच के लिए पहुंची सीबीआई
- फोटो : अमर उजाला
इसके बाद टेंडर की कुल लागत का एक प्रतिशत कमीशन के तौर पर तय होता था। इस फर्म की सहमति के बाद उसे विजय मद्धेशिया के पास कमीशन की रकम भेजे जाने की सलाह दी जाती थी। फर्म द्वारा रुपये भेजने के बाद विजय नकद में रुपये निकाल कर इन्हें दे देता था।
जांच में सीबीआई ने ऐसे ही एक मामला भी पकड़ा। सीबीआई में दर्ज केस के मुताबिक, 8 फरवरी को तत्कालीन सीडीएमएस की तरफ से उप सीएमएम के कहने पर हिमाचल प्रदेश, बद्दी के प्रोपराइटर ओम नम शिवायत के मनीष ठाकुर से संपर्क किया था। इस फर्म के पास कपल सॉकेट मटेरियल और के टेंडर के एवज में 2 प्रतिशत कमीशन की मांग की थी।
इनके सहमति के बाद उसी दिन सीडीएमएस की तरफ से फर्म के प्रोपराइटर को लेटर ऑफ इंडेंट( एलओआई) जारी होने की जानकारी दी गई। इसके बाद इन्हीं अधिकारी के द्वारा मनीष ठाकुर को शिव कुमार मद्देशिया( विजय मद्देशिया का भाई) के यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के खाता संख्या 73600201000... देकर खाते में 53,500 हजार रुपये मंगवाए गए।
जांच में सीबीआई ने ऐसे ही एक मामला भी पकड़ा। सीबीआई में दर्ज केस के मुताबिक, 8 फरवरी को तत्कालीन सीडीएमएस की तरफ से उप सीएमएम के कहने पर हिमाचल प्रदेश, बद्दी के प्रोपराइटर ओम नम शिवायत के मनीष ठाकुर से संपर्क किया था। इस फर्म के पास कपल सॉकेट मटेरियल और के टेंडर के एवज में 2 प्रतिशत कमीशन की मांग की थी।
इनके सहमति के बाद उसी दिन सीडीएमएस की तरफ से फर्म के प्रोपराइटर को लेटर ऑफ इंडेंट( एलओआई) जारी होने की जानकारी दी गई। इसके बाद इन्हीं अधिकारी के द्वारा मनीष ठाकुर को शिव कुमार मद्देशिया( विजय मद्देशिया का भाई) के यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के खाता संख्या 73600201000... देकर खाते में 53,500 हजार रुपये मंगवाए गए।
रुपयों की डिमांड की जाती थी
- फोटो : Istock
ये रकम 110 फरवरी को खाते में भेजा गया था। ठीक ऐसे ही मुंबई की एक फर्म शास्वत स्टील वर्ल्ड के प्रोपराइटर हेमंत सिंह 25 जनवरी 2023 को कमीशन की डिमांड की गई थी।इस बार विजय कुमार ने ही हेमंत सिंह से अपने बैंक की डिटेल साझा किया था। ऐसे 13 फरवरी 2023 को विजय के भाई ओम प्रकाश मद्देशिया के खाते में 40 हजार रुपये( 35000 +5000 रुपये) खाते में भेजे गए थे।
ऐसे ही, पर्चेज ऑर्डर( पीओ) जारी करने के बाद प्रकाश से ओम प्रकाश मद्देशिया के खाते में 38 हजार रुपये( 15+15+8) तीन बार में मंगवाए गए। इन तथ्यों और रिकार्ड के संकलन के बाद सीबीआई की तरफ से पिछले दिनों कुल 11 लोगों पर केस दर्ज किया गया। इसमें गंभीर धाराओं के तहत इन्हें दोषी बनाया गया है।
2 जून को ऋतुराज सिंह के घर गई थी सीबीआई की टीम
सीबीआई की टीम 2 जून को कुशीनगर के फाजिलनगर ऋतुराज सिंह के घर गई थी। अफसरों ने ऋतुराज के घर पर छापेमारी कर जरूरी दस्तावेज खंगाले थे। पटहेरवा थाना क्षेत्र के पटखौली गांव निवासी ऋतुराज सिंह रेलवे में क्लास वन रैंक के अधिकारी हैं।
इस समय उनकी तैनाती केरल के तिरुअनंतपुरम में है। पहले वे गोरखपुर रेलवे में मंडल उप महाप्रबंधक के पद पर कार्य कर चुके हैं। 6 घंटे तक टीम ने उनके आवास पर छापेमारी कर जरूरी सवालों के जवाब इकट्ठा किए थे। पांच अधिकारियों की टीम ऋतुराज सिंह के घर पुहंची थी। सीबीआई सूत्रों ने बताया कि इसी के बाद सीबीआई की तरफ से केस दर्ज करने की कार्रवाई की गई है।
ऐसे ही, पर्चेज ऑर्डर( पीओ) जारी करने के बाद प्रकाश से ओम प्रकाश मद्देशिया के खाते में 38 हजार रुपये( 15+15+8) तीन बार में मंगवाए गए। इन तथ्यों और रिकार्ड के संकलन के बाद सीबीआई की तरफ से पिछले दिनों कुल 11 लोगों पर केस दर्ज किया गया। इसमें गंभीर धाराओं के तहत इन्हें दोषी बनाया गया है।
2 जून को ऋतुराज सिंह के घर गई थी सीबीआई की टीम
सीबीआई की टीम 2 जून को कुशीनगर के फाजिलनगर ऋतुराज सिंह के घर गई थी। अफसरों ने ऋतुराज के घर पर छापेमारी कर जरूरी दस्तावेज खंगाले थे। पटहेरवा थाना क्षेत्र के पटखौली गांव निवासी ऋतुराज सिंह रेलवे में क्लास वन रैंक के अधिकारी हैं।
इस समय उनकी तैनाती केरल के तिरुअनंतपुरम में है। पहले वे गोरखपुर रेलवे में मंडल उप महाप्रबंधक के पद पर कार्य कर चुके हैं। 6 घंटे तक टीम ने उनके आवास पर छापेमारी कर जरूरी सवालों के जवाब इकट्ठा किए थे। पांच अधिकारियों की टीम ऋतुराज सिंह के घर पुहंची थी। सीबीआई सूत्रों ने बताया कि इसी के बाद सीबीआई की तरफ से केस दर्ज करने की कार्रवाई की गई है।
रेल स्क्रैप( सांकेतिक)
- फोटो : PTI
स्कैप में होता है बड़ा खेल
सीबीआई और विजिलेंस की तरफ से पूर्वोत्तर रेलवे के मुख्यालय गोरखपुर के सामग्री प्रबंधन विभाग की जांच पिछले डेढ़ वर्षों में की जा रही है। सूत्रों ने बताया कि सीबीआई ने इस दौरान विभिन्न फर्मों और रेलवे के कर्मचारियों से गोपनीय तरीके से उनके बयान दर्ज कराए थे।
इस दौरान सामने आया कि जिम्मेदार स्क्रैप में तगड़ा खेल करते हैं। जैसे, स्कैप के कामों में रेलगाडी के पहिए की रिले की भी निलामी होती है। रीले रेलगाड़ी के पहिए में लगा होता है। ट्रेन जब चलती है तो पहिए में लगे रिले के घर्षण बल से ट्रेन की बैटरी चार्ज होती है।
इसमें कॉपर और लोहा लगा होता है। जिम्मेदार निलामी के दौरान कॉपर और लोहा मिलाकर निलामी में रखते हैं। लेकिन, बिड़िंग होने के बाद रिले में से कॉपर से निकाल लेते हैं और लोहे का रिले टेंडर पाने वाले को सौंप देते हैं। सीबीआई सूत्रों की मानें तो कुछ दिनों पहले भंडारण में ऐसा ही एक मामला सामने आया था।
इसमें फर्म की तरफ से कॉपर गायब मिलने पर काफी हंगामा शोर किया गया था। ये खेल लगभग स्कैप के इन सभी सामानों में होता है, जिन सामानों में कॉपर अधिक खपत होता है।
सीबीआई और विजिलेंस की तरफ से पूर्वोत्तर रेलवे के मुख्यालय गोरखपुर के सामग्री प्रबंधन विभाग की जांच पिछले डेढ़ वर्षों में की जा रही है। सूत्रों ने बताया कि सीबीआई ने इस दौरान विभिन्न फर्मों और रेलवे के कर्मचारियों से गोपनीय तरीके से उनके बयान दर्ज कराए थे।
इस दौरान सामने आया कि जिम्मेदार स्क्रैप में तगड़ा खेल करते हैं। जैसे, स्कैप के कामों में रेलगाडी के पहिए की रिले की भी निलामी होती है। रीले रेलगाड़ी के पहिए में लगा होता है। ट्रेन जब चलती है तो पहिए में लगे रिले के घर्षण बल से ट्रेन की बैटरी चार्ज होती है।
इसमें कॉपर और लोहा लगा होता है। जिम्मेदार निलामी के दौरान कॉपर और लोहा मिलाकर निलामी में रखते हैं। लेकिन, बिड़िंग होने के बाद रिले में से कॉपर से निकाल लेते हैं और लोहे का रिले टेंडर पाने वाले को सौंप देते हैं। सीबीआई सूत्रों की मानें तो कुछ दिनों पहले भंडारण में ऐसा ही एक मामला सामने आया था।
इसमें फर्म की तरफ से कॉपर गायब मिलने पर काफी हंगामा शोर किया गया था। ये खेल लगभग स्कैप के इन सभी सामानों में होता है, जिन सामानों में कॉपर अधिक खपत होता है।