गोरखपुर विश्वविद्यालय में छात्रा की मौत का मामला: गृह विज्ञान की विभागाध्यक्ष व सहयोगियों पर हत्या का केस दर्ज, सीएम ने लिया मामले का संज्ञान
रात बता दें कि शनिवार दोपहर करीब 12 बजे विश्वविद्यालय के गृह विज्ञान विभाग के स्टोर रूम में प्रियंका का शव फंदे से लटका मिला था। यूनिवर्सिटी प्रशासन की सूचना पर पहुंची पुलिस ने आत्महत्या मानते हुए शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया था। परिजनों की ओर से आत्महत्या के लिए कोई वजह नहीं बताई गई थी।
जानकारी के मुताबिक, शनिवार रात प्रियंका के शव के पोस्टमार्टम को लेकर परिजनों व मोहल्लेवासियों ने मेडिकल कॉलेज में हंगामा किया था। इसके बाद देर रात डॉक्टरों की टीम गठित कर पोस्टमार्टम कराया गया। दो डॉक्टरों की टीम ने वीडियो रिकॉर्डिंग के बीच पोस्टमार्टम किया। शव को घर लाने के बाद परिजनों और मोहल्लेवासियों ने हत्या की आशंका जाहिर की।
हंगामे की खबर आते ही शाहपुर, पिपराइच व गुलरिहा थाने की पुलिस के अलावा पीएसी बल मौके पर पहुंच गया। सुबह नगर विधायक डॉ. राधा मोहन दास अग्रवाल प्रियंका के घर पहुंचे और फिर एसपी सिटी से वार्ता कर वहीं पर पोस्टमार्टम रिपोर्ट की मांग कर दी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद विधायक ने परिजनों से हत्या की बात बताई है। विधायक के बयान का वीडियो तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। विधायक के लौटने के बाद परिजन कैंट थाने पहुंच गए और तहरीर देकर हत्या का केस दर्ज करा दिया।
मामले में सियासत तेज, सभी दलों के नेता छात्रा के घर पहुंचे
नगर विधायक ने उठाया सवाल
नगर विधायक ने परिजनों से मुलाकात कर न्याय का भरोसा दिलाया। नगर विधायक ने बताया कि सिर पर चोट की बात पोस्टमार्टम में है। पैर भी जमीन से सटे हुए थे तो उसकी सांस कैसे फूल सकती है? आत्महत्या करने वाले के सिर में चोट के निशान नहीं हो सकते हैं। ये निशान कहां से आएंगे। नगर विधायक ने कहा कि पोस्टमार्टम से साफ है कि जिंदा रहते गला घुटने से मौत हुई है।
सपा कार्यकर्ताओं और छात्रनेताओं ने की नारेबाजी
प्रियंका के घर पहुंचे यूनिवर्सिटी के छात्र नेताओं व समाजवादी पार्टी से जुड़े नेता व कार्यकर्ताओं ने पुलिस-प्रशासन व विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। इसके बाद विश्वविद्यालय की छात्र नेता अन्नू प्रसाद, अनिल दुबे व भास्कर आदि ने निष्पक्ष जांच व मुकदमा दर्ज किए जाने की मांग की। इस दौरान मृतक के भाई ने भी सोशल मीडिया के माध्यम से न्याय की मांग की है।
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एबीवीपी ने उच्चस्तरीय जांच की मांग की
छात्रा के मौत के मामले में एबीवीपी कार्यकर्ताओं ने डीएम को संबोधित ज्ञापन अपर नगर मजिस्ट्रेट (एसीएम) पंकज दीक्षित को दिया और उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। छात्रनेताओं का कहना है कि मौत रहस्यमय तरीके से हुई है। जांच से ही सच सामने आएगा। इस दौरान प्रांत सहमंत्री हर्षवर्धन, महानगर मंत्री प्रभात राय, विस्तारिका पिया सिंह, प्रांत कार्यकारिणी मुक्ता खरे, नंदिता, प्रियंका, अनामिका आदि मौजूद रहीं।
परिजन इन सवालों को उठाकर जता रहे हत्या की आशंका
- छात्रा के सिर के पीछे चोट का निशान
- छात्रा के पैर जमीन से सटे हुए थे
- छात्रा की घड़ी मिली गायब
- छात्रा के कपड़े धूल से लिपटे हुए थे
- छात्रा के बांह के कपड़े फटे हुए थे
परिवार के लोगों ने रखी ये मांगें
एसपी सिटी सोनम कुमार ने बताया कि पुलिस ने तहरीर के आधार पर हत्या का केस दर्ज कर लिया है। मामले की छानबीन जारी है। साक्ष्यों और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।
मांगें
- शव का दोबारा पोस्टमार्टम पांच सदस्यीय टीम से कराया जाए जिसमें महिला और दो एससीएसटी वर्ग से जुड़े लोग हों।
- मामले की मजीस्ट्रियल जांच हो।
- प्रियंका मेधावी थी और अधिकारी बनती, इस वजह से एक करोड़ की क्षतिपूर्ति और एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाए।
- परिवार के लोगों को सुरक्षा दी जाए।
राजनीतिक दलों ने की जांच की मांग
बसपा के महानगर अध्यक्ष सुरेश भारती ने इस प्रकरण में पुलिस की भूमिका को भी संदिग्ध बताया। उनका आरोप है कि छात्रा की पोस्टमार्टम रिपोर्ट से भी छेड़छाड़ कर घटना को हत्या की बजाय आत्महत्या बताया जा रहा है।
रानी लक्ष्मीबाई पार्क में लोकतांत्रिक जनता दल की बैठक में प्रदेश उपाध्यक्ष अश्वनी कुमार पांडेय ने छात्रा की मौत के प्रकरण की गहनता से छानबीन कराने एवं परिजनों को आर्थिक सहायता दिलाने की मांग की। इस दौरान जिलाध्यक्ष दिनेश शाही, प्रदेश महासचिव गौतम लाल श्रीवास्तव, समाज सेवी एवं वरिष्ठ नेता अयोध्या प्रसाद साहनी, गोरखपुर विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र नेता आशीष श्रीवास्तव, हिंद मजदूर सभा के रामयश प्रसाद, सत्येंद्र यादव, सुनील कुमार दूबे, रवि यादव, डॉ. केपी त्रिपाठी, प्रमोद कुमार मिश्रा, राजन पासवान आदि उपस्थित रहे।
हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अगुवाई में न्यायिक जांच कराएगा गोविवि
दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राजेश सिंह के निर्देश पर विश्वविद्यालय प्रशासन ने बीएससी गृह विज्ञान तृतीय वर्ष की छात्रा प्रियंका कुमारी की मौत के मामले की हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अगुवाई में न्यायिक जांच कराने का फैसला लिया है। चार सदस्यीय समिति में सेवानिवृत्त न्यायाधीश, एक कार्यपरिषद सदस्य के साथ विश्वविद्यालय के दो वरिष्ठ अधिकारी होंगे। विश्वविद्यालय के मीडिया सेल से मिली जानकारी के मुताबिक चार सदस्यीय समिति हर पहलू की जांच कर जल्द से जल्द रिपोर्ट विश्वविद्यालय प्रशासन को उपलब्ध कराएगी। विश्वविद्यालय प्रशासन की संवेदनाएं छात्रा के परिवार से हैं। उन्हें हर संभव सहयोग किया जाएगा। विश्वविद्यालय के अधिकारी छात्रा के परिवार से जल्द संपर्क करेंगे।