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राहत: नूर मोहम्मद के कागजों में जिंदा होने की उम्मीद जगी, जांच में सही मिला पैतृक संपत्ति हड़पने का मामला

Wed, 29 Sep 2021 03:19 PM IST
vivek shukla अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Wed, 29 Sep 2021 03:19 PM IST
सार

आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की गई। तहसीलदार ने फर्जी दस्तावेज से जमीन हड़पने वालों के खिलाफ एफआईआर की संस्तुति डीएम से की। तत्कालीन चकबंदी अधिकारी के खिलाफ भी कार्रवाई की सिफारिश, नूर के पक्ष में ग्रामीणों ने दी गवाही।

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case of grabbing ancestral property found right in investigation of Noor Mohammad land in gorakhpur
नूर मोहम्मद के जमीनी विवाद का मामला। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

राजस्व अभिलेखों में मृत करार दिए गए नूर मोहम्मद के कागजों में जिंदा होने की उम्मीद जग गई है। मामले की जांच कर रही तीन सदस्यीय टीम की जांच में फर्जी दस्तावेज लगाकर जमीन हड़पने की बात सामने आई है। इस रिपोर्ट के आधार पर तहसीलदार बृज मोहन शुक्ला ने भूमाफिया के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की संस्तुति डीएम विजय किरन आनंद से की है। तत्कालीन चकबंदी अधिकारी के खिलाफ भी कार्रवाई करने की सिफारिश की गई है।
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कारोबार के सिलसिले में तीन दशक से दिल्ली में रह रहे जैतपुर निवासी नूर मोहम्मद को राजस्व अभिलेखों में मृत दर्शा कर भूमाफिया ने गांव की उनकी पैतृक जमीन और आवास को हड़प लिया है। बुजुर्ग के साथ हुई इस धोखाधड़ी से संबंधित खबर को अमर उजाला ने प्रमुखता से प्रकाशित किया था।
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खबर का संज्ञान लेकर डीएम के निर्देश पर तहसीलदार बृज मोहन शुक्ला ने तीन सदस्यीय टीम गठित कर मामले की जांच का आदेश दिया था। टीम के सदस्यों कानूनगो इब्राहिम, हलका लेखपाल जितेंद्र मिश्रा और संजय मिश्रा ने सोमवार को नूर मोहम्मद और दूसरे पक्ष सहित गांव के कुछ लोगों को बुलाया था।
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नूर मोहम्मद ने जमीन संबंधी दस्तावेज जांच टीम के सामने पेश किए। जांच टीम ने विपक्षी से जमीन के वरासत आदि दस्तावेज तलब किए, लेकिन वह कुछ नहीं दे सका। जांच में टीम ने पाया कि विपक्षी ने फर्जी दस्तावेज बनाकर जमीन में हेराफेरी की है। टीम ने नूर मोहम्मद सहित गांव के छह लोगों के बयान भी दर्ज किए।


बयान दर्ज कराने वालों में गांव के साबिर अली, हबीबुल्लाह, मो. फारूख, दिलावर और आफताब आलम रहे। तहसीलदार ने जांच टीम की रिपोर्ट डीएम को भेजने के साथ विरोधी पक्ष के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने और तत्कालीन चकबंदी अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई करने की सिफारिश की है।
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