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MMMUT में फर्जी प्रवेश का मामला: लिपिक ने दी थी कुलपति को धमकी, ई-मेल की शब्दावली से शक गहराया

Sun, 15 Jan 2023 11:23 AM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Sun, 15 Jan 2023 11:23 AM IST
सार

 कुलपति को मिले धमकी वाले ई-मेल को जांच टीम और कुछ शिक्षकों ने बारीकी से पढ़ा। सभी संदिग्ध पांच लिपिकों के विभाग के लोगों की भी मदद ली गई। मेल में कुछ शब्द ऐसे हैं जिनका इस्तेमाल विश्वविद्यालय का एक लिपिक विभागीय कार्यों के लिए लिखे जाने वाले पत्रों में अक्सर करता है। इन्हीं शब्दों और लिखने की शैली से एक लिपिक पर शक गहराया है।

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Case of fake admission in MMMUT clerk threatened Vice Chancellor in Gorakhpur
MMMUT - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (एमएमएमयूटी) के कुलपति प्रो. जेपी पांडेय को विश्वविद्यालय के ही एक लिपिक ने धमकी दी थी। ई-मेल से भेजे धमकी भरे पत्र में उसने खुद को पत्रकार बताया था। लिपिक की शब्दावली से पहचान करने का दावा किया जा रहा है। विश्वविद्यालय इसे तहरीर के साथ साक्ष्य के रूप में देगा।

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जानकारी के अनुसार, कुलपति को मिले धमकी वाले ई-मेल को जांच टीम और कुछ शिक्षकों ने बारीकी से पढ़ा। सभी संदिग्ध पांच लिपिकों के विभाग के लोगों की भी मदद ली गई। मेल में कुछ शब्द ऐसे हैं जिनका इस्तेमाल विश्वविद्यालय का एक लिपिक विभागीय कार्यों के लिए लिखे जाने वाले पत्रों में अक्सर करता है। इन्हीं शब्दों और लिखने की शैली से एक लिपिक पर शक गहराया है।
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धमकी वाले ई-मेल पत्र का प्रिंट निकालकर जांच टीम को भी दिया गया है। साथ ही विधिक राय आने के बाद जब फर्जी प्रवेश लेने वाले छात्रों के खिलाफ तहरीर दी जाएगी, तब धमकी वाले ई-मेल के मामले में भी विश्वविद्यालय की ओर से तहरीर दी जाएगी। इसमें लिपिक के विभागीय कार्यों के लिए लिखे गए पत्रों की शब्दावली का भी उल्लेख किया जाएगा।
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अलग से कराई जाएगी छात्रों की परीक्षा, कापियां सील होंगी

विश्वविद्यालय में हाईकोर्ट से राहत मिलने के बाद छात्रों को सेमेस्टर की परीक्षा में बैठने का अवसर मिलेगा। इन छात्रों की परीक्षा के लिए विश्वविद्यालय ने अलग से तैयारी की है। इनकी परीक्षाएं भी अलग कराई जाएंगी और कॉपी को सील कर दिया जाएगा। विश्वविद्यालय ने इन छात्रों के लिए अस्थायी रोल नंबर भी सुरक्षित कर लिया है।

दरअसल, विश्वविद्यालय ने फर्जी दस्तावेज के आधार पर 40 छात्रों का प्रवेश निरस्त किया था। इनमें 35 छात्रों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। इनमें 21 छात्र पांचवें सेमेस्टर, 14 छात्र तीसरे सेमेस्टर और एक छात्र सातवें सेमेस्टर का शामिल हैं। हाईकोर्ट से मिली राहत के मुताबिक अब छात्रों को 31 जनवरी तक विश्वविद्यालय के समक्ष अपने निर्दोष होने का प्रमाण देना होगा।

इसके लिए सही दस्तावेज कुलसचिव के माध्यम से विश्वविद्यालय के एकेडमिक काउंसिल के सामने प्रस्तुत करना होगा। सोमवार से छात्रों की सेमेस्टर परीक्षाएं शुरू हो रही है। सभी छात्र परीक्षाएं देंगे, लेकिन उनका परिणाम तब तक घोषित नहीं किया जाएगा, जब तक वह दस्तावेजों के सहारे खुद को निर्दोष साबित नहीं कर देते। निर्दोष होने के लिए उन्हें आवंटन पत्र और फीस की रसीद प्रस्तुत करनी होगी।

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