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फाइलेरिया का नहीं है कोई इलाज, इस उपाय से कर सकते हैं बचाव
Wed, 05 Feb 2020 11:53 AM IST
विजय जैन
डिजिटल न्यूज डेस्क, गोरखपुर
डिजिटल न्यूज डेस्क, गोरखपुर
Published by: विजय जैन
Updated Wed, 05 Feb 2020 11:53 AM IST
सार
- फाइलेरिया (हाथी पांव) के खिलाफ अभियान की तैयारी
- दो साल की उम्र के बाद प्रति वर्ष एक साल में एक बार दवा खाने से बचा जा सकता है इस बीमारी से
- पंद्रह साल के किशोर की पढ़ाई फाइलेरिया के कारण हुई बाधित
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फाइल फोटो
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विस्तार
हाथी पांव यानी फाइलेरिया होने पर प्राथमिक अवस्था में उसे रोका तो जा सकता है लेकिन खत्म नहीं किया जा सकता। चरगांवा ब्लॉक क्षेत्र के मोहित (परिवर्तित नाम) को भी यह दर्द अब जीवन भर ढोना पड़ेगा। हाथी पांव से पीड़ित 18 वर्षीय मोहित बताते हैं कि तीन वर्ष पूर्व अचानक पैर लाल होना शुरू हुआ और फिर उनमें सूजन बढ़ने लगी। जांच कराने पर फाइलेरिया बताया गया।
तब से निजी चिकित्सकों, बीआरडी मेडिकल कॉलेज और सरकारी अस्पतालों में इलाज कराने जा चुके हैं लेकिन हर जगह मायूस होना पड़ा। जवाब मिला कि फाइलेरिया पूरी तरह से ठीक नहीं हो सकता लेकिन सावधानी रख कर इसका प्रसार और इससे होने वाले नुकसान को रोका जा सकता है।
मोहित का स्कूल जाना भी छूट गया, दिनचर्या में भी उसे समस्या हो रही है। डॉक्टर कहते हैं कि कुष्ठ रोग के कारण खराब हुए अंगों को तो रिकंस्ट्रक्टिव सर्जरी के जरिए दोबारा सही किया जा सकता है लेकिन हाथी पांव की समस्या नहीं सुलझाई जा सकती। जिला मलेरिया अधिकारी डॉ. एनके पांडेय ने कहा कि अगर दो साल की उम्र पूरी करने के बाद पांच साल तक लगातार साल में एक बार फाइलेरिया की दवा का सेवन किया जाए तो व्यक्ति इस बीमारी से प्रतिरक्षित हो जाता है। मोहित जैसे मरीजों को 12 दिन की फाइलेरिया की दवा दी जाती है। यह दवा छह महीने के बाद देने का नियम है।
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तब से निजी चिकित्सकों, बीआरडी मेडिकल कॉलेज और सरकारी अस्पतालों में इलाज कराने जा चुके हैं लेकिन हर जगह मायूस होना पड़ा। जवाब मिला कि फाइलेरिया पूरी तरह से ठीक नहीं हो सकता लेकिन सावधानी रख कर इसका प्रसार और इससे होने वाले नुकसान को रोका जा सकता है।
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मोहित का स्कूल जाना भी छूट गया, दिनचर्या में भी उसे समस्या हो रही है। डॉक्टर कहते हैं कि कुष्ठ रोग के कारण खराब हुए अंगों को तो रिकंस्ट्रक्टिव सर्जरी के जरिए दोबारा सही किया जा सकता है लेकिन हाथी पांव की समस्या नहीं सुलझाई जा सकती। जिला मलेरिया अधिकारी डॉ. एनके पांडेय ने कहा कि अगर दो साल की उम्र पूरी करने के बाद पांच साल तक लगातार साल में एक बार फाइलेरिया की दवा का सेवन किया जाए तो व्यक्ति इस बीमारी से प्रतिरक्षित हो जाता है। मोहित जैसे मरीजों को 12 दिन की फाइलेरिया की दवा दी जाती है। यह दवा छह महीने के बाद देने का नियम है।
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फाइलेरिया मरीज बरतें यह सावधानी
जिला मलेरिया अधिकारी डॉ. एके पांडेय ने बताया कि फाइलेरिया के मरीज को सामान्य पानी से नहाना चाहिए। बिस्तर को पैर की तरफ छह इंच ऊंचा रखना चाहिए। पैर को रगड़ कर साफ करने से परहेज करना चाहिए। पैरों को बराबर रख कर आरामदेह मुद्रा में बैठना चाहिए। पट्टे वाला ढीला चप्पल पहनने के साथ सूजन वाली जगह को हमेशा चोट से बचाना चाहिए।
फाइलेरिया से बचाव के लिए 17 से 29 फरवरी तक जिले में अभियान चलाया जाएगा। इस दौरान आशा कार्यकर्ता घर-घर जाकर एक-एक व्यक्ति को फाइलेरिया की दवा खिलाएंगी। यह दवा गर्भवती, दो साल से कम उम्र के बच्चों और गंभीर रूप से बीमार लोेगों को छोड़कर अन्य सभी को खिलाई जाएगी।
- श्रीकांत तिवारी, मुख्य चिकित्सा अधिकारी, गोरखपुर
फाइलेरिया से बचाव के लिए 17 से 29 फरवरी तक जिले में अभियान चलाया जाएगा। इस दौरान आशा कार्यकर्ता घर-घर जाकर एक-एक व्यक्ति को फाइलेरिया की दवा खिलाएंगी। यह दवा गर्भवती, दो साल से कम उम्र के बच्चों और गंभीर रूप से बीमार लोेगों को छोड़कर अन्य सभी को खिलाई जाएगी।
- श्रीकांत तिवारी, मुख्य चिकित्सा अधिकारी, गोरखपुर