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Gorakhpur News: कभी गलियारों में गुलजार होती थी शाम...कब्जों ने रौनक ही उड़ा डाली
Sat, 16 Dec 2023 11:34 AM IST
vivek shukla
अमर उजाला ब्यूरो गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Sat, 16 Dec 2023 11:34 AM IST
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गोलघर का गलियारा।
- फोटो : अमर उजाला।
तकरीबन डेढ़ दशक पहले तक गोलघर का गलियारा लोगों की चहलकदमी से गुलजार रहता था। कई लोग तो शाम के वक्त यहां पर चाय-कॉफी पीने आते थे और टहल भी लेते थे। इसका फायदा व्यापारियों को भी होता था। अगर उनके सामने की दुकान का गलियारा खाली होगा तो आसानी से टहल कर एक दुकान से दूसरे दुकान पर जा सकते हैं, लेकिन अब गलियारा में कब्जा होने की वजह से ऐसा नहीं हो पाता है। गोलघर की पूरी रौनक गायब हो गई है।
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शहर के बुद्धजीवियों व समाजसेवियों ने पुराने दिनों की यादें ताजा करते हुए कहा कि गोलघर की खूबसूरती शहर का आईना भी है। अगर गलियारों से अतिक्रमण हट जाए तो वाकई यह दिल्ली के कनाॅट प्लेस जैसा दिखेगा।
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पहले गोलघर में गलियारे खाली होते थे तो लोग आसानी से पैदल चल लेते थे। धीरे-धीरे ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए दुकानदारों ने सामान बाहर रखना शुरू कर दिया। सड़क पर बेतरतीब गाड़ियां खड़ी होने की वजह से जाम की स्थिति बन जाती है। गोलघर में गाड़ियां प्रतिबंधित होनी चाहिए और पैदल चलने का रास्ता होना चाहिए। - प्रो. चितरंजन मिश्र, पूर्व अध्यक्ष हिंदी विभाग, डीडीयू।
गोलघर पहले एक मोहल्ले के जैसा था, वहां पर लोग पैदल जाकर खरीदारी करते थे। अब वो इलाका पूरी तरह से बदल गया है, अतिक्रमण की वजह से वहां पैदल चलना मुश्किल हो गया है। लगभग सभी दुकानों का सामान बाहर है। आज और 20 साल पहले के गोलघर में काफी अंतर है। - विष्णु कांत शुक्ल, पूर्व सभासद, बेतियाहाता।
गोलघर की सड़क चौड़ी तो है लेकिन वहां जाम की समस्या आम है। रोड पर गाड़ियां पार्क होने की वजह से रास्ता जाम हो जाता है। पहले इस रास्ते से लोग आराम से आते-जाते थे। इतनी भीड़ भी नहीं थी। दुकानों के सामने गाड़ियां खड़ी रहती हैं। पार्किंग की एक उचित व्यवस्था होनी चाहिए ताकि लोग वहां पैदल चल सकें। - हरि प्रकाश मिश्र, वरिष्ठ अधिवक्ता, पूर्व सभासद, बेतियाहाता।
गोलघर पहले एक मोहल्ले के जैसा था, वहां पर लोग पैदल जाकर खरीदारी करते थे। अब वो इलाका पूरी तरह से बदल गया है, अतिक्रमण की वजह से वहां पैदल चलना मुश्किल हो गया है। लगभग सभी दुकानों का सामान बाहर है। आज और 20 साल पहले के गोलघर में काफी अंतर है। - विष्णु कांत शुक्ल, पूर्व सभासद, बेतियाहाता।
गोलघर की सड़क चौड़ी तो है लेकिन वहां जाम की समस्या आम है। रोड पर गाड़ियां पार्क होने की वजह से रास्ता जाम हो जाता है। पहले इस रास्ते से लोग आराम से आते-जाते थे। इतनी भीड़ भी नहीं थी। दुकानों के सामने गाड़ियां खड़ी रहती हैं। पार्किंग की एक उचित व्यवस्था होनी चाहिए ताकि लोग वहां पैदल चल सकें। - हरि प्रकाश मिश्र, वरिष्ठ अधिवक्ता, पूर्व सभासद, बेतियाहाता।