गोरखपुर में नकली सोना मामला: जागो ग्राहक! हॉलमार्क के खेल भी हैं बड़े निराले
हाॅलमार्क पर छह अंकों की जगह फर्जी तरीके से एचएम ( हॉलमार्क) का लिखकर धंधा फल फूल रहा। जो हॉलमार्क सही होते हैं उसमें अंतिम में छह अंक होंगे, जो नंबर और अंक के साथ रहेगा। जबकि, फर्जी वाले हाॅलमार्क में आभूषण पर ट्रेंगल, कैरेट, टंच लिखने के बाद छह अंकों की जगह हॉलमार्क का शार्टकट लिख देते हैं।
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सोने-चांदी के नकली आभूषणों पर हॉलमार्क लगाकर, उसे असली सोना बताकर बेचने के खेल भी बहुत निराले हैं। जिस हॉलमार्क को शुद्धता की गारंटी बताया जाता है, असली खेल उसी में है। सोने के इस गंदे खेल में शामिल दुकानदार बड़ी चालाकी से हॉलमार्क के छह अंकों की जगह शार्टकट में कोड लिखते हैं ताकि वह पकड़ में न आ सके। उनके इस कारनामे का खुलासा हाल में ही पकड़े गए अमर जौहरी से पूछताछ में हुआ है।
दरअसल, हाॅलमार्क पर छह अंकों की जगह फर्जी तरीके से एचएम ( हॉलमार्क) का लिखकर धंधा फल फूल रहा। जो हॉलमार्क सही होते हैं उसमें अंतिम में छह अंक होंगे, जो नंबर और अंक के साथ रहेगा। जबकि, फर्जी वाले हाॅलमार्क में आभूषण पर ट्रेंगल, कैरेट, टंच लिखने के बाद छह अंकों की जगह हॉलमार्क का शार्टकट लिख देते हैं। जैसे, ट्रैंगल निशान, 18के, 750 और एचएम, ये हॉलमार्किंग का अल्परूप होता है। असली हाॅलमार्क की जांच मल्टीमीडिया फोन पर बीआईएस केयर एप से की जा सकती है। एप पर छह अंक को भरने से आभूषण के हॉलमार्क और गुणवत्ता सामने आ जाएगी। यह भी पता चल जाएगा कि आभूषण किस दुकान से खरीदा गया है? किस हॉलमार्किंग सेंटर से इसे प्रमाणित किया गया है।
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आभूषण की गुणवत्ता ऐसे परखते हैं जौहरी
कैरेट टंच
14 कैरेट 58.5 टंच
18 कैरेट 75 टंच
20 कैरेट 83.30 टंच
22 कैरेट- 91.60 टंच
23 कैरेट- 95.80 टंच
24 कैरेट- 99.50 टंच
क्या होता है टंच
धातु को गोल्ड एगशार्प मशीन से परीक्षण के बाद ही उसमें सोने का प्रतिशत आंका जाता है। इस मशीन से धातु का अल्ट्रासाउंट परीक्षण करते हैं। धातु में कितना हिस्सा सोना मिला है, उसे सराफा की बोली में टंच कहते हैं। इसी मशीन से टंच की प्रतिशत क्षमता आंककर सोने को कैरेट में परिवर्तित किया जाता है।
हाॅलमार्किंग सेंटर जा सकते हैं ग्राहक
एक अप्रैल से जारी नए नियम के अनुसार, ग्राहक अब सीधे बाजार के हॉलमार्किंग सेंटर पर भी जा सकते हैं। वहां उन्हें आभूषण के परीक्षण करवाने की सुविधा मिलेगी। हॉलमार्किंग सेंटर में ग्राहक को बताना अनिवार्य होगा कि आभूषण पर हॉलमार्किंग कहां से हुई है और किस दुकान से खरीदा गया है।
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सात लोगों पर हो चुकी है कार्रवाई
बिना बीआईएस से पंजीकरण के बाद भी हॉलमार्क लगाकर आभूषण बेचने पर हिंदी बाजार में सात व्यापारियों पर कार्रवाई हो चुकी है। इनमें, बलिराम जायसवाल, हरिओम वर्मा, कृष्णचंद वर्मा, गंगा राम वर्मा, राहुल वर्मा, विनोद कुमार, संजय जायसवाल शामिल हैं। इन पर राजघाट थाने में मुकदमा दर्ज हो चुका है। इनके पास से पुलिस ने पीली धातु के जेवरात, 75 हजार रुपये बरामद किए थे।
हॉलमार्किंग में गड़बड़ी पर ये पंजीकरण हो चुके हैं रद्द
जिले में ये चार हॉलमार्किंग सेंटर है
एबी हॉलमार्किंग सेंटर, आशीर्वाद हॉलमार्किंग, आराध्या असाईन हॉलमार्किंग और सूरज हॉलमार्किंग सेंटर
आर्टिफिशियल उत्पादन केंद्र पर सभी चुप
सराफा बाजार में व्यापारी आर्टिफिशियल ज्वेलरी के उत्पादन केंद्र पर सवाल उठा रहे हैं। चर्चा है कि बाजार में दस उत्पादन केंद्र हैं, जो आर्टिफिशियल आभूषण ( बंधेल) तैयार करते हैं। सभी के पास 10 से 12 कारीगर हैं। इन्हीं के द्वारा असली आभूषणों से मिलता जुलता आर्टिफिशियल आभूषण तैयार किया जाता है। बेचने वाले को तो पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया, लेकिन ये आभूषण कहां से आए थे, अभी तक पता नहीं चला। चर्चा तो ये भी है कि अमर जौहरी ने सात नाम पुलिस को बताए हैं। इनमें से एक का मोबाइल नंबर भी उसने दिया है।
गोरखपुर सराफा मंडल के संरक्षक पुष्पदंत जैन ने कहा कि आर्टिफिशियल ज्वेलरी को बंधेल के मार्का के साथ ही बाजार में उतारा जाता है। ऐसे आभूषणों पर हॉलमार्किंग नहीं होती है। सोने या चांदी के आभूषणों पर ही सिर्फ हॉलमार्क लगता है। सराफा मंडल की कार्रवाई गलत व्यापारियों पर आगे भी जारी रहेगी।