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Gorakhpur News: परिवहन निगम के बस स्टेशन से चलती है प्राइवेट बसें
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गोरखपुर। शहर के नौसड़ बस स्टेशन से परिवहन निगम की नहीं, बल्कि प्राइवेट बसें संचालित हो रही हैं। बस स्टेशन के बाहर इनका जमावड़ा लगा रहता है। ये बस स्टेशन से फर्राटा भरती हैं, लेकिन इन्हें रोकने-टोकने वाला कोई नहीं होता।
शनिवार की दोपहर एक बजे के करीब नौसड़ बस स्टेशन के बाहर तीन प्राइवेट बसें खड़ी थी, लेकिन परिवहन निगम कोई भी बस दूर-दूर तक नजर नहीं आ रही थी। प्राइवेट बसों के परिचालक सवारियों को बुलाते हैं, उनके सामान को या तो बस के अंदर या फिर डिकी में रखवाते है। फिर सवारी को बस में बैठा ले रहे थे। यात्रियों को भी मजबूरी में इन्हीं बसों में बैठना पड़ रहा था। क्योंकि उन्हें निगम की कोई बस नहीं मिल रही थी। बस स्टेशन परिसर में सन्नाटा पसरा हुआ था, एक भी बस स्टेशन परिसर में एक भी बस खड़ी नहीं थी।
निगम के बाबू सुधीर दूबे से बसों के बारे में जानकारी ली गई तो बताया कि यहां सभी बसें रुकती हैं। जब बस स्टेशन के रजिस्टर में दर्ज बसों की संख्या को देखा गया तो उसमें दोपहर दो बजे तक राप्तीनगर डिपो की सिर्फ छह बसों के आने और जाने के रिकार्ड दर्ज था। बसों के अंदर नहीं आने की बात जब बाबू से पूछी गई तो उन्होंने बताया कि सुबह और शाम को कुछ बसें स्टेशन परिसर में खड़ी कराई जाती है, बताया बसों के अंदर आने पर राहगीरों को दिक्कत होती है। जब उनसे पूछा गया कि बस स्टेशन के बाहर से बसों का संचालन क्यों हो रहा, इन्हें कोई रोकता-टोकता क्यों नहीं है? तो उसने कहा कि बसों को हटवाने पर बसों के चालक और परिचालक मारपीट पर उतारू हो जाते हैं। कई बार इसकी शिकायत भी की गई, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
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सूची में हैं 95 बसें, चलती एक भी नहीं
नौसड़ बस स्टेशन पर 95 बसों की सूची लगी हुई है, लेकिन यहां से एक भी बस का संचालन नहीं होता है। पिछले वर्ष कुछ दिनों के लिए कागजों पर यहां से बसों का संचालन भी हुआ, लेकिन फिर बसों का संचालन बंद कर दिया गया। बसों का संचालन बंद होने के पीछे आरएम ने दावा किया था कि शहर में बसों से लगने वाली जाम की समस्या से निजात मिल गई है। ऐसे में नौसड़ से बसों का संचालन नहीं किया जाएगा।
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कोट
नौसड़ के सामने से प्राइवेट बसों का संचालन हो रहा है। स्टेशन पर मौजूद कर्मचारी बस को हटवाते हैं तो ये मारपीट पर उतारू हो जाते हैं। इसकी शिकायत कई बाद परिवहन विभाग के जिम्मेदारों से की गई, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
-एके सिंह, एआरएम राप्तीनगर डिपो
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बोले यात्री
वाराणसी जाना है। आधा घंटे से बस का इंतजार कर रही है, लेकिन रोडवेज की कोई भी एसी बस नहीं आई है। कुछ देर तक और इंतजार करूंगी। यदि बस नहीं मिली तो प्राइवेट बस से जाऊंगी।
-लक्ष्मी
...
प्रयागराज जाना है, लेकिन कोई बस नहीं मिल रही है। रोडवेज बस स्टेशन पर शौचालय तक में ताला लगाया गया है। अब कचहरी बस स्टेशन जा रहा हूं। वहीं से प्रयागराज की बस मिलेगी।
-मेराज
...
आजमगढ़ जाना है, 45 मिनट से बस का इंतजार कर रहा हूं। रोडवेज की बस नहीं मिली। अब प्राइवेट से आजमगढ़ जाऊंगा। रोडवेज की व्यवस्था पूरी तरह से चौपट है।
-संजय पांडेय
...
बस स्टेशन पर सभी जगहों पर जाने के लिए बसों की सूची लगी हुई है, लेकिन एक भी बस का संचालन यहां से नहीं हो रहा है। यहां बस रुकती भी नहीं है। इससे यात्रियों को दिक्कत होती है।
-समीउल्लाह
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शनिवार की दोपहर एक बजे के करीब नौसड़ बस स्टेशन के बाहर तीन प्राइवेट बसें खड़ी थी, लेकिन परिवहन निगम कोई भी बस दूर-दूर तक नजर नहीं आ रही थी। प्राइवेट बसों के परिचालक सवारियों को बुलाते हैं, उनके सामान को या तो बस के अंदर या फिर डिकी में रखवाते है। फिर सवारी को बस में बैठा ले रहे थे। यात्रियों को भी मजबूरी में इन्हीं बसों में बैठना पड़ रहा था। क्योंकि उन्हें निगम की कोई बस नहीं मिल रही थी। बस स्टेशन परिसर में सन्नाटा पसरा हुआ था, एक भी बस स्टेशन परिसर में एक भी बस खड़ी नहीं थी।
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निगम के बाबू सुधीर दूबे से बसों के बारे में जानकारी ली गई तो बताया कि यहां सभी बसें रुकती हैं। जब बस स्टेशन के रजिस्टर में दर्ज बसों की संख्या को देखा गया तो उसमें दोपहर दो बजे तक राप्तीनगर डिपो की सिर्फ छह बसों के आने और जाने के रिकार्ड दर्ज था। बसों के अंदर नहीं आने की बात जब बाबू से पूछी गई तो उन्होंने बताया कि सुबह और शाम को कुछ बसें स्टेशन परिसर में खड़ी कराई जाती है, बताया बसों के अंदर आने पर राहगीरों को दिक्कत होती है। जब उनसे पूछा गया कि बस स्टेशन के बाहर से बसों का संचालन क्यों हो रहा, इन्हें कोई रोकता-टोकता क्यों नहीं है? तो उसने कहा कि बसों को हटवाने पर बसों के चालक और परिचालक मारपीट पर उतारू हो जाते हैं। कई बार इसकी शिकायत भी की गई, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
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सूची में हैं 95 बसें, चलती एक भी नहीं
नौसड़ बस स्टेशन पर 95 बसों की सूची लगी हुई है, लेकिन यहां से एक भी बस का संचालन नहीं होता है। पिछले वर्ष कुछ दिनों के लिए कागजों पर यहां से बसों का संचालन भी हुआ, लेकिन फिर बसों का संचालन बंद कर दिया गया। बसों का संचालन बंद होने के पीछे आरएम ने दावा किया था कि शहर में बसों से लगने वाली जाम की समस्या से निजात मिल गई है। ऐसे में नौसड़ से बसों का संचालन नहीं किया जाएगा।
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कोट
नौसड़ के सामने से प्राइवेट बसों का संचालन हो रहा है। स्टेशन पर मौजूद कर्मचारी बस को हटवाते हैं तो ये मारपीट पर उतारू हो जाते हैं। इसकी शिकायत कई बाद परिवहन विभाग के जिम्मेदारों से की गई, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
-एके सिंह, एआरएम राप्तीनगर डिपो
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बोले यात्री
वाराणसी जाना है। आधा घंटे से बस का इंतजार कर रही है, लेकिन रोडवेज की कोई भी एसी बस नहीं आई है। कुछ देर तक और इंतजार करूंगी। यदि बस नहीं मिली तो प्राइवेट बस से जाऊंगी।
-लक्ष्मी
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प्रयागराज जाना है, लेकिन कोई बस नहीं मिल रही है। रोडवेज बस स्टेशन पर शौचालय तक में ताला लगाया गया है। अब कचहरी बस स्टेशन जा रहा हूं। वहीं से प्रयागराज की बस मिलेगी।
-मेराज
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आजमगढ़ जाना है, 45 मिनट से बस का इंतजार कर रहा हूं। रोडवेज की बस नहीं मिली। अब प्राइवेट से आजमगढ़ जाऊंगा। रोडवेज की व्यवस्था पूरी तरह से चौपट है।
-संजय पांडेय
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बस स्टेशन पर सभी जगहों पर जाने के लिए बसों की सूची लगी हुई है, लेकिन एक भी बस का संचालन यहां से नहीं हो रहा है। यहां बस रुकती भी नहीं है। इससे यात्रियों को दिक्कत होती है।
-समीउल्लाह