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Gorakhpur News: स्टार्टअप के नाम पर शिक्षक-कर्मचरियों से लाखों रुपये लेकर बंटी-बबली फरार
Sun, 31 Dec 2023 01:29 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
Updated Sun, 31 Dec 2023 01:29 AM IST
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- डीडीयू में इस जालसाजी की चर्चा खूब...लिखापढ़ी में रुपये न देने के चलते शिक्षक-कर्मचारियों ने साधी चुप्पी
- स्टार्टअप में मुनाफा का लालच देकर करीब 30 से 35 लाख रुपये ऐंठने की चर्चा
संवाद न्यूज एजेंसी
गोरखपुर। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय में छात्र नेताओं की एक जोड़ी के कारनामे की चर्चा खूब है। बंटी-बबली के नाम मशहूर इस जोड़ी ने स्टार्टअप के नाम पर पहले लस्सी के दो-तीन स्टॉल लगाए और पूरे शहर में इसे लगाने की योजना बताकर कई गुरुओं से मोटी रकम ऐंठ कर फरार हो गए। रकम भी छोटी नहीं है बल्कि 30 से 35 लाख है। जिन गुरुओं ने मुनाफे के लालच में रुपये लगाए हैं अब वे बेचैन तो हैं लेकिन बदनामी की डर से चुप्पी साध लिए हैं। उधर, बंटी-बबली के इस कारनामे की चर्चा पूरे परिसर में है।
गोरखपुर विश्वविद्यालय के एक छात्रनेता ने करीब तीन साल पहले स्टार्टअप शुरू किया। स्टार्टअप के रूप में लस्सी बेचता था। इसके बाद चाय-समोसा आदि खाने के सामान स्टॉल पर बेचने लगा। स्टॉल पर भीड़ भी लगने लगी और मुनाफा भी होने लगा। इस काम में छात्रनेता के साथ एक पूर्व पदाधिकारी भी शामिल हो गई।
चर्चा है कि दोनों बड़ी योजना के साथ पहले विश्वविद्यालय के शिक्षकों-कर्मचारियों को आकर्षित किया और उनका चहेता बन गया। देखते ही देखते विश्वविद्यालय परिसर, मुख्य द्वार के सामने समेत शहर में विभिन्न स्थानों पर आधा दर्जन स्टॉल खोल दिए। विश्वविद्यालय में छात्रनेता का रुतबा बढ़ता गया।
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इसका अंदाजा खुद लगा सकते हैं कि शहर में उसके एक स्टॉल का उद्घाटन करने तत्कालीन कुलपति खुद गए थे। कुलपति से उद्घाटन कराने के बाद विश्वविद्यालय के शिक्षक-शिक्षिकाओं और कर्मचारियों में उसकी अच्छी धमक बन गई। यहीं से उसने जालसाजी की योजना भी बना डाली। शिक्षकों को मोटा मुनाफा देकर दो से पांच लाख रुपये तक ले लिए।
चर्चा है कि इसमें तीन महिला शिक्षक भी शामिल हैं। रुपये देने वालों में कई शिक्षक, शिक्षिका, कर्मचारी और छात्रनेता के नामों की चर्चा हो रही है। पहले तो सब कुछ ठीक चल रहा था, करीब डेढ़ माह पहले छात्रनेता अपना सामान समेट कर फरार हो गया। कुछ दिन तक जब वह दिखाई नहीं पड़ा तो लोगों ने उसके मोबाइल पर फोन किया तो वह बंद मिला। उसके करीबियों से संपर्क साधा तो वह भी कुछ बता पाने की स्थिति में नहीं हैं।
जिन लोगों ने रुपये दिए हैं अब वे लेनदेन का कोई रिकाॅर्ड नहीं होने पर वह पुलिस में शिकायत भी नहीं कर पा रहे हैं। बंटी की तलाश में अब बबली का पता-ठिकाना ढूंढ रहे हैं। उन्हें कहीं से पता चला है कि बंटी और बबली अब एक ही साथ किसी दूसरे शहर में अपना ठिकाना बनाए हुए हैं।
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ठगी के शिकार बंटी के घर तक पहुंचे
ठगी के शिकार कुछ लोग बंटी के घर तक पहुंच गए हैं। कुछ लोगों ने तो स्टांप पर लिखा पढ़ी भी करा थे। वह स्टांप लेकर उनके घर पहुंचे। परिजनों ने स्टांप देख रुपये वापस करने का आश्वासन दिया है।
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- स्टार्टअप में मुनाफा का लालच देकर करीब 30 से 35 लाख रुपये ऐंठने की चर्चा
संवाद न्यूज एजेंसी
गोरखपुर। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय में छात्र नेताओं की एक जोड़ी के कारनामे की चर्चा खूब है। बंटी-बबली के नाम मशहूर इस जोड़ी ने स्टार्टअप के नाम पर पहले लस्सी के दो-तीन स्टॉल लगाए और पूरे शहर में इसे लगाने की योजना बताकर कई गुरुओं से मोटी रकम ऐंठ कर फरार हो गए। रकम भी छोटी नहीं है बल्कि 30 से 35 लाख है। जिन गुरुओं ने मुनाफे के लालच में रुपये लगाए हैं अब वे बेचैन तो हैं लेकिन बदनामी की डर से चुप्पी साध लिए हैं। उधर, बंटी-बबली के इस कारनामे की चर्चा पूरे परिसर में है।
गोरखपुर विश्वविद्यालय के एक छात्रनेता ने करीब तीन साल पहले स्टार्टअप शुरू किया। स्टार्टअप के रूप में लस्सी बेचता था। इसके बाद चाय-समोसा आदि खाने के सामान स्टॉल पर बेचने लगा। स्टॉल पर भीड़ भी लगने लगी और मुनाफा भी होने लगा। इस काम में छात्रनेता के साथ एक पूर्व पदाधिकारी भी शामिल हो गई।
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चर्चा है कि दोनों बड़ी योजना के साथ पहले विश्वविद्यालय के शिक्षकों-कर्मचारियों को आकर्षित किया और उनका चहेता बन गया। देखते ही देखते विश्वविद्यालय परिसर, मुख्य द्वार के सामने समेत शहर में विभिन्न स्थानों पर आधा दर्जन स्टॉल खोल दिए। विश्वविद्यालय में छात्रनेता का रुतबा बढ़ता गया।
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इसका अंदाजा खुद लगा सकते हैं कि शहर में उसके एक स्टॉल का उद्घाटन करने तत्कालीन कुलपति खुद गए थे। कुलपति से उद्घाटन कराने के बाद विश्वविद्यालय के शिक्षक-शिक्षिकाओं और कर्मचारियों में उसकी अच्छी धमक बन गई। यहीं से उसने जालसाजी की योजना भी बना डाली। शिक्षकों को मोटा मुनाफा देकर दो से पांच लाख रुपये तक ले लिए।
चर्चा है कि इसमें तीन महिला शिक्षक भी शामिल हैं। रुपये देने वालों में कई शिक्षक, शिक्षिका, कर्मचारी और छात्रनेता के नामों की चर्चा हो रही है। पहले तो सब कुछ ठीक चल रहा था, करीब डेढ़ माह पहले छात्रनेता अपना सामान समेट कर फरार हो गया। कुछ दिन तक जब वह दिखाई नहीं पड़ा तो लोगों ने उसके मोबाइल पर फोन किया तो वह बंद मिला। उसके करीबियों से संपर्क साधा तो वह भी कुछ बता पाने की स्थिति में नहीं हैं।
जिन लोगों ने रुपये दिए हैं अब वे लेनदेन का कोई रिकाॅर्ड नहीं होने पर वह पुलिस में शिकायत भी नहीं कर पा रहे हैं। बंटी की तलाश में अब बबली का पता-ठिकाना ढूंढ रहे हैं। उन्हें कहीं से पता चला है कि बंटी और बबली अब एक ही साथ किसी दूसरे शहर में अपना ठिकाना बनाए हुए हैं।
ठगी के शिकार बंटी के घर तक पहुंचे
ठगी के शिकार कुछ लोग बंटी के घर तक पहुंच गए हैं। कुछ लोगों ने तो स्टांप पर लिखा पढ़ी भी करा थे। वह स्टांप लेकर उनके घर पहुंचे। परिजनों ने स्टांप देख रुपये वापस करने का आश्वासन दिया है।