अलविदा 2022: जमीन के चलते 'जमीन' पर नहीं उतर पाए बिजली घर, बजट लेकर भटक रहे अधिकारी
बिछिया बिजलीघर के लिए प्रशासन ने लेखपाल प्रशिक्षण केंद्र परिसर में भूमि चिह्नित कराई, लेकिन जमीन फाइनल नहीं हो पाई। यही हाल, प्रस्तावित दिव्यनगर बिजली घर का हुआ। दिव्यनगर इलाके में सिंचाई विभाग की नहर के पास जमीन देखी गई थी।
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गोरखपुर शहर में बेहतर विद्युत आपूर्ति के लिए नए बिजली घर बनाने का कार्य दो साल बाद भी कागजों तक ही सीमित है। दो बिजली घरों के लिए बजट स्वीकृत हो चुका है, लेकिन जमीन संबंधी दिक्कतें राह में रोड़ा बनी हुई हैं।
बिजली निगम ने दो साल पहले शहर के बिछिया व दिव्यनगर क्षेत्र में 33/11 केवी बिजली घर बनाने का प्रस्ताव तैयार किया था। मुख्यमंत्री ने सितंबर 2020 में स्वीकृति देने के साथ ही दोनों बिजली घरों के लिए करीब सात करोड़ रुपये का बजट भी आवंटित करा दिया। अक्तूबर 2020 में शिलान्यास भी हो गया।
बिछिया बिजलीघर के लिए प्रशासन ने लेखपाल प्रशिक्षण केंद्र परिसर में भूमि चिह्नित कराई, लेकिन जमीन फाइनल नहीं हो पाई। यही हाल, प्रस्तावित दिव्यनगर बिजली घर का हुआ। दिव्यनगर इलाके में सिंचाई विभाग की नहर के पास जमीन देखी गई थी। इस जमीन तक जाने का रास्ता बेहद संकरा होने की वजह से इस प्रस्ताव को भी निरस्त कर दिया गया।
पहले बने नहीं, पांच नए की योजना
केंद्र सरकार की रीवैम्प्ड डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर स्कीम (आरडीएसएस) के तहत महानगर के विभिन्न क्षेत्रों में पांच नए बिजली घर बनाए जाने की योजना है। नौसड़, नंदानगर, शाहपुर, तिवारीपुर, लालडिग्गी व तारामंडल क्षेत्र में 33/11 केवी के नए बिजली घर बनाने का प्रस्ताव एमडी को भेजा गया है। इन बिजली घरों के निर्माण पर करीब 17.82 करोड़ रुपये के खर्च का अनुमान है। चार बिजली घरों में 10-10 एमवीए के पावर ट्रांसफार्मर लगेंगे, जबकि तिवारीपुर बिजली घर की क्षमता 20 एमवीए होगी।
क्षमता बढ़ने से 60 हजार को मिलने लगी बेहतर बिजली
इस साल रानीबाग, रुस्तमपुर, राप्तीनगर, बक्शीपुर, शाहपुर समेत दो अन्य बिजली घरों की क्षमता बढ़ाई गई। इससे लगभग 60 हजार उपभोक्ताओं को बेहतर बिजली मिलने लगी। शहरी क्षेत्र के प्रमुख बाजारों में भूमिगत केबल बिछाया जा चुका है। 55 हजार से अधिक उपभोक्ताओं के परिसर में स्मार्ट मीटर लग चुका है।