यूपी चुनाव 2022: गोरखपुर शहर और ग्रामीण विधानसभा से नहीं खुला है बसपा का खाता, मुख्य लड़ाई में भी नहीं रही पार्टी
गोरखपुर ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र में रामभुआल दूसरे स्थान पर रहे थे। वहीं गोरखपुर शहर विधानसभा क्षेत्र में मुख्य लड़ाई में भी बसपा नहीं रही है।
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गोरखपुर शहर और ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र से अब तक बहुजन समाज पार्टी (बसपा) का खाता नहीं खुला है। शहर विधानसभा से तो बसपा मुख्य लड़ाई में भी नहीं रहती है। इस सीट पर हमेशा भाजपा को सपा से टक्कर मिली है। वहीं, गोरखपुर ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र से वर्ष 2012 में बसपा प्रत्याशी रामभुआल निषाद दूसरे स्थान पर रहे थे।
बसपा ने इस बार शहर विधानसभा से प्रत्याशी नहीं उतारा है। पूर्व में शहर विधानसभा से पार्टी ने जातीय समीकरण के आधार पर प्रत्याशी भी लड़ाए हैं, लेकिन कामयाबी नहीं मिली। वर्ष 2017 में जनार्दन चौधरी 24,297 मत पाकर तीसरे और 2012 में देवेश चंद्र श्रीवास्तव 2,39,811 मत हासिल कर तीसरे स्थान पर रहे थे।
इस बार गोरखपुर ग्रामीण से प्रत्याशी का नाम तय है, लेकिन क्या समीकरण बनेगा, इस पर कुछ कहना जल्दबाजी होगी। जिलाध्यक्ष संतोष जिज्ञासु कहते हैं कि गोरखपुर ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र से प्रत्याशी के चयन में जातीय आधार को महत्व दिया गया है। जातीय आंकड़े हमारे पक्ष में हैं।
2012 में अस्तित्व में आई ग्रामीण विधानसभा
गोरखपुर ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र वर्ष 2012 में अस्तित्व में आया। इससे पहले इस विधानसभा का अधिकांश क्षेत्र कौड़ीराम विधानसभा में था। कौड़ीराम से अंबिका सिंह और राम भुआल निषाद बसपा के बैनर तले चुनाव जीत चुके हैं। मगर गोरखपुर ग्रामीण विधानसभा बनने के बाद शहर का भी क्षेत्र परिसीमन में आ गया। वर्ष 2012 में पहली बार जब चुनाव हुआ तो भाजपा से विजय बहादुर यादव चुुनाव जीतकर विधायक बने।
इस चुनाव में बसपा से रामभुआल निषाद को दूसरा और जफर अमीन डक्कू को तीसरा स्थान प्राप्त हुआ था। वर्ष 2017 में बसपा ने ब्राह्मण चेहरे के तौर पर राजेश पांडेय को प्रत्याशी बनाया। राजेश पांडेय करीब 14 फीसदी वोट पाकर चौथे स्थान पर रहे। भाजपा के विपिन सिंह ने सपा के विजय बहादुर यादव को पराजित किया था।