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बीएसएफ जवान का शव घर पहुंचा तो परिजनों ने अंतिम संस्कार से रोका, बोले- वैक्सिन लगाने से बिगड़ी थी तबीयत
Fri, 12 Feb 2021 03:00 PM IST
vivek shukla
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Fri, 12 Feb 2021 03:00 PM IST
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बीएसएफ के जवान का शव पहुंचने के बाद ग्रामीणों की लगी भीड़।(इनसेट में जवान की फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला।
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उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के मईल थाना क्षेत्र के मईल गांव निवासी मनीष चौधरी बीएसएफ जवान थे। बुधवार की सुबह तबियत बिगड़ने के बाद पुणे में उनकी मौत हो गई। विभाग के अधिकारी गुरुवार की देर रात शव को लेकर गांव पहुंचे, लेकिन शव घर ले जाने के बजाय मईल चौराहा पर स्थित कैम्ब्रिज इंटरनेशनल स्कूल में रख दिए।
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अधिकारी शुक्रवार को जब शव लेकर घर पहुंचे तो परिवार के लोगों ने विभाग के अधिकारियों पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए अंतिम संस्कार करने से रोक दिया। परिवार वालों के मुताबिक पांच फरवरी को मनीष चौधरी ने कोरोना की वैक्सीन लगवाई थी
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जानकारी के मुताबिक, मईल थाना क्षेत्र के मईल गांव निवासी रमेश चौधरी का बेटा मनीष चौधरी बीएसएफ में थे। तैनाती पुणे में थी। परिवार के लोगों के मुताबिक पांच फरवरी को उनको कोरोना वैक्सीन लगाई गई थी। जिसके बाद उनकी हालत दिन-ब-दिन बिगड़ती गई। इसकी जानकारी बीएसएफ जवान ने विभाग के अधिकारियों के अलावा परिवार के लोगों को भी दी थी।
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मंगलवार की सुबह जवान ने अपने पिता व गांव के एक मित्र को फोन कर बताया था कि मुझे कोरोना वैक्सीन लगी है, जिसके बाद तबीयत बिगड़ रही है। विभाग के अधिकारी इलाज कराने के बजाय ड्यूटी करा रहे हैं।
इसी बीच बुधवार की सुबह उनकी मौत हो गई। शुक्रवार को जब शव उनके दरवाजे पर पहुंचा तो परिजनों ने इलाज न कराने का आरोप लगाते हुए जिम्मेदार अधिकारियों पर कानूनी कार्रवाई कराने, शहीद का दर्जा दिलाने, नौकरी व परिवार को एक करोड़ रुपये आदि की मांग को लेकर शव को अंतिम संस्कार करने से रोक दिया।
इसकी खबर मिलते ही बरहज सीओ दिनेश सिंह यादव व तहसीलदार बरहज परिजनों को मनाने पहुंच गए। लेकिन परिजन जिलाधिकारी को बुलाने की मांग पर अड़े रहे। इस बावत तहसीलदार बरहज ने बताया कि परिवार के लोग अंतिम संस्कार कराने से मना कर रहे हैं। वार्ता चल रही है।