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डॉ. कफील की मुंबई से गिरफ्तारी पर भाई ने उठाया सवाल-23 जनवरी को यह टीम कहां थी?
Fri, 31 Jan 2020 10:51 AM IST
विजय जैन
डिजिटल न्यूज डेस्क, गोरखपुर
डिजिटल न्यूज डेस्क, गोरखपुर
Published by: विजय जैन
Updated Fri, 31 Jan 2020 10:51 AM IST
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भाई आदिल खान, डॉ. कफील खान
- फोटो : kafeel bhai adil
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डॉ. कफील खान की मुंबई से गिरफ्तारी राजनीतिक साजिश है। अगर वह इतने ही बड़े दोषी हैं कि उन्हें मुंबई से एसटीएफ यूनिट की टीम को लगाकर गिरफ्तार करना पड़ा तो 23 जनवरी को यह टीम कहां थी? इसी दिन वह प्रमुख सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य देवेश चुतर्वेदी के सामने बहराइच मामले में विभागीय जांच के लिए दो घंटे से अधिक समय तक रुके थे। आखिर, तब और अब में इतना बड़ा अपराध कौन सा हो गया कि उन्हें ऐसे गिरफ्तार करना पड़ा। ये बातें डॉ. कफील के बड़े भाई अदील खान ने अमर उजाला से कहीं।
उन्होंने बताया कि डॉ. कफील पर मुकदमा 12 दिसंबर को दर्ज किया गया था। इसके बाद लगातार दो दिन 23 व 24 दिसंबर को लखनऊ में थे। इस दौरान वह गोरखपुर भी आए, लेकिन पुलिस की तरफ से इस तरह की कोई कार्रवाई का अंदेशा नहीं था। बताया कि दरअसल, 30 जनवरी को मंबई के मुंबई बाग में सीएए और एनआरसी को लेकर हो रहे प्रदर्शन में डॉ कफील को जाना था। इसलिए वह मुंबई भी गए थे। उन्हें राजनीतिक साजिश के तहत एयरपोर्ट पर उतरते ही गिरफ्तार कर लिया गया।
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उन्होंने दावा किया कि अलीगढ़ में जिन आरोपों पर उनपर मुकदमा दर्ज किया गया है, वह सब निराधार है। डॉ. कफील के वीडियो सोशल मीडिया पर मौजूद हैं, उन्हें सुनकर आसानी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि क्या उन्होंने कोई ऐसी बातें वहां कहीं कि उन्हें जेल जाना पड़े।
उन्होंने एसटीएफ की गिरफ्तारी पर सवाल उठाया। कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि 7 साल तक की सजा के अपराध के मामलों में पुलिस गिरफ्तारी नहीं कर सकती। ऐसे में धारा 153 ए के तहत, जिसमें अधिकतम तीन साल की सजा का प्रावधान है, इसमें आखिरकार गिरफ्तारी क्यों की गई ?
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उन्होंने बताया कि डॉ. कफील पर मुकदमा 12 दिसंबर को दर्ज किया गया था। इसके बाद लगातार दो दिन 23 व 24 दिसंबर को लखनऊ में थे। इस दौरान वह गोरखपुर भी आए, लेकिन पुलिस की तरफ से इस तरह की कोई कार्रवाई का अंदेशा नहीं था। बताया कि दरअसल, 30 जनवरी को मंबई के मुंबई बाग में सीएए और एनआरसी को लेकर हो रहे प्रदर्शन में डॉ कफील को जाना था। इसलिए वह मुंबई भी गए थे। उन्हें राजनीतिक साजिश के तहत एयरपोर्ट पर उतरते ही गिरफ्तार कर लिया गया।
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उन्होंने दावा किया कि अलीगढ़ में जिन आरोपों पर उनपर मुकदमा दर्ज किया गया है, वह सब निराधार है। डॉ. कफील के वीडियो सोशल मीडिया पर मौजूद हैं, उन्हें सुनकर आसानी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि क्या उन्होंने कोई ऐसी बातें वहां कहीं कि उन्हें जेल जाना पड़े।
उन्होंने एसटीएफ की गिरफ्तारी पर सवाल उठाया। कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि 7 साल तक की सजा के अपराध के मामलों में पुलिस गिरफ्तारी नहीं कर सकती। ऐसे में धारा 153 ए के तहत, जिसमें अधिकतम तीन साल की सजा का प्रावधान है, इसमें आखिरकार गिरफ्तारी क्यों की गई ?
मुकदमे के बाद स्थानीय अधिकारियों से हुई थी मुलाकात
डॉ कफील खान के बड़े भाई अदील खान के अनुसार, उन्होंने मुकदमा दर्ज होने के बाद उसी रात गोरखपुर के एक पुलिस अधिकारी से मुलाकात की थी। दावा किया, अधिकारी ने खुद अपने आलाधिकारी से फोन पर डॉ कफील को लेकर बात की थी। कहा कि, उन्होंने डॉ. कफील के भाषण को अलीगढ़ का बताते हुए इससे दूर रहने की सलाह दी थी। डॉ कफील को गोरखपुर न आने की बात पर अधिकारी ने सहमति जताते हुए उन्हें वापस भेज दिया था।
क्या है धारा 153 ए
अधिवक्ता अभिनव त्रिपाठी ने बताया कि धारा 153 ए उनपर लगाई जाती है जो धर्म, भाषा, नस्ल, वगैरह के आधार पर लोगों में नफरत फैलाने की कोशिश करते हैं। इसमें अधिकतम तीन साल की कैद या जुर्माना या दोनों की सजा का प्रावधान है। इसके अलावा अगर इस अपराध को किसी धार्मिक स्थल पर किया जाए तो 5 साल तक की सजा और जुर्माना भी हो सकता है।
क्या है धारा 153 ए
अधिवक्ता अभिनव त्रिपाठी ने बताया कि धारा 153 ए उनपर लगाई जाती है जो धर्म, भाषा, नस्ल, वगैरह के आधार पर लोगों में नफरत फैलाने की कोशिश करते हैं। इसमें अधिकतम तीन साल की कैद या जुर्माना या दोनों की सजा का प्रावधान है। इसके अलावा अगर इस अपराध को किसी धार्मिक स्थल पर किया जाए तो 5 साल तक की सजा और जुर्माना भी हो सकता है।