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गोरखपुर: एमआर बनकर कर रहा था दलाली, डॉक्टर से दुकानदार तक बांटता था कमीशन

Tue, 12 Sep 2023 01:03 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Tue, 12 Sep 2023 01:03 PM IST
सार

एसपी सिटी कृष्ण कुमार बिश्नोई ने कहा कि डॉक्टर की तहरीर पर पुलिस ने केस दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार किया है। आरोपी से पूछताछ में कई तथ्य सामने आए हैं। जिला अस्पताल में बिचौलिए का काम करने वाले कई लोगों के नाम सामने आए हैं। पुलिस गहनता से पूरे प्रकरण की जांच कर रही है।

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brokerage by posing as MR used to distribute commission from doctor to shopkeeper
कोतवाली थाने में गिरफ्तार जिला अस्पताल का बिचौलिया प्रमोद। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

बीआरडी मेडिकल कॉलेज की तरह ही जिला अस्पताल में भी मरीजों से वसूली और खरीद-फरोख्त का खेल चल रहा है। इसका खुलासा एक दलाल के पकड़े जाने के बाद हुआ है। जिला अस्पताल के ओटी में डॉक्टर की कुर्सी पर बैठकर रंगदारी व धमकी देने के आरोप में गिरफ्तार हुए दलाल प्रमोद सिंह से पूछताछ में पुलिस को जानकारी मिली है कि वह डॉक्टर से लेकर दवा के दुकानदार तक कमीशन देता था।

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बिना डिग्री और लाइसेंस के ही दवा का सप्लायर बना प्रमोद मोटा मुनाफा कमाता था। वह खुद को एमआर बताता था। सोमवार को आरोपी को पुलिस ने कोर्ट में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया। खबर है कि पूछताछ में दलाल ने अपने कई साथियों के नाम भी बताए हैं, जिसके आधार पर पुलिस ने जांच तेज कर दी है।
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आरोपी प्रमोद सिंह उर्फ महेंद्र प्रताप सिंह बस्ती जिले के मुंडेरवा थाना क्षेत्र के सोनखर गांव का निवासी है। पुलिस के मुताबिक, एक सप्ताह पहले जिला अस्पताल के डॉ. राजेश कुमार ने आरोपी दलाल पर केस दर्ज कराया। आरोप है कि जिला अस्पताल के ओटी में डॉक्टर की सीट पर प्रमोद बैठा था। उसने रंगदारी मांगते हुए धमकी दी। सरकारी काम में बाधा डाली। केस दर्ज कर पुलिस ने आरोपी को पकड़ा। पूछताछ की तो उसने कई चौंकाने वाले तथ्य बताए हैं। उसने बताया कि उसके पास दवा भंडारण का लाइसेंस नहीं है, न ही उसने बीफाॅर्मा किया है।
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बिना डिग्री के ही वह दवाओं का भंडारण कर रहा था और इसी के सप्लाई और कमीशन को लेकर विवाद हुआ था। आरोपी ने पुलिस को बताया कि दवाओं को लिखने के लिए डॉक्टर को एडवांस धनराशि देता था। मुनाफे का करीब 40 प्रतिशत डॉक्टर को देता था और 40 प्रतिशत खुद रखता था। इसके अलावा जिन दवा की दुकानों से उसकी दवा बिकती थी, उसे 20 प्रतिशत देता था। आरोपी ने अपने साथियों के नाम भी बताए हैं।

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बिचौलिए के पकड़े जाते ही होने लगी पैरवी

जिला अस्पताल से बिचौलिए के पकड़े जाने के बाद पैरवी में कई लोग सामने आ गए। सत्ताधारी दल के नेता ही नहीं, कई दूसरे विभागों के अधिकारी भी पुलिस अफसरों के पास पहुंचकर उसे शरीफ बताने में गुरेज नहीं किए। लेकिन पुलिस ने जांच के आधार पर आरोपी को जेल भिजवा दिया है।

डीएम नाराज, मांगे तीन महीने में भर्ती और रेफर मरीजों की सूची
गोरखपुर जिला अस्पताल में भर्ती मरीजों को रेफर किए जाने को लेकर डीएम ने नाराजगी जाहिर की है। उन्होंने अस्पताल प्रशासन से पिछले तीन महीने में इमरजेंसी में आए मरीज, मृत आए मरीजों का नाम, पता और मोबाइल नंबर मांगा है। इसके साथ ही जो मरीज रेफर होकर आए हैं, तो जहां से रेफर होकर आए, वहां का विवरण भी मांगा गया है। डीएम ने जिला अस्पताल से रेफर किए गए मरीजों और उन्हें रेफर करने वाले डॉक्टर के नाम भी मांगे है।

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डीएम कृष्णा करुणेश ने बताया कि आमजन को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं सर्वसुलभ उपलब्ध कराना शासन की सर्वाेच्च प्राथमिकता कार्यक्रमों में से एक है। शासन के निर्देश के क्रम में जनपद में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन अपेक्षित सुधार नहीं हो रहा है। इसे देखते हुए ही डीएम ने जिला अस्पताल, सीएमओ और महिला अस्पताल से ब्योरा मांगा है। तीन दिन में डीएम ने पूरी जानकारी मांगी है।

एसपी सिटी कृष्ण कुमार बिश्नोई ने कहा कि डॉक्टर की तहरीर पर पुलिस ने केस दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार किया है। आरोपी से पूछताछ में कई तथ्य सामने आए हैं। जिला अस्पताल में बिचौलिए का काम करने वाले कई लोगों के नाम सामने आए हैं। पुलिस गहनता से पूरे प्रकरण की जांच कर रही है। जांच व साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई की जाएगी, जो भी दोषी होगा, उसे बख्शा नहीं जाएगा।

 
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