फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Gorakhpur News ›   Broken seat, bird's dirt on it...this is the fate of DDU students

Gorakhpur News: टूटी सीट, उस पर पक्षियों की गंदगी...ये है डीडीयू के छात्रों की नियति

Thu, 29 Feb 2024 02:48 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Thu, 29 Feb 2024 02:48 AM IST
विज्ञापन
Broken seat, bird's dirt on it...this is the fate of DDU students
-पक्षियों ने घर बना लिया है कक्षाओं को... छात्रों को बदबू के बीच पढ़ना मजबूरी
विज्ञापन


संवाद न्यूज एजेंसी
गोरखपुर। क्या आपको विश्वास होगा कि नैक ए++ ग्रेड वाले डीडीयू गोरखपुर विश्वविद्यालय में छात्र-छात्राओं को ऐसी सीट पर बैठकर पढ़ाई करनी पड़ती है, जिस पर कबूतरों और अन्य पक्षियों ने गंदगी की होती है। कक्षाओं के बीच में कबूतरों की फड़फड़ाहट और उनकी की गई गंदगी की बदबू के बीच अपने बेहतर भविष्य के लिए वे शिक्षा ग्रहण करने को मजबूर हैं। ऊपर से पानी और शौचालय की मूलभूत सुविधाएं भी नहीं। ये हालात हैं डीडीयू की आर्ट्स फैकल्टी की।
गाेरखपुर विश्वविद्यालय साल दर साल बेहतर हो रहा है। अच्छी रैंकिंग भी मिल रही है लेकिन छात्र सुविधाओं के नाम पर हालात अब भी बहुत खराब हैं। आर्ट्स फैकल्टी के कमरों में बैठकर पढ़ना छात्र-छात्राओं के लिए किसी सजा से कम नहीं है। इस फैकल्टी के कमरों की खिड़कियों केे सीसे टूटे हुए हैं इस कारण कक्षाओं को कबूतरों ने अपना आसियाना बना लिया है। कबूतरों ने छात्रों और शिक्षकों की मेज पर गंदगी कर रखी है। उसी पर शिक्षकों को पढ़ाना और बच्चों को पढ़ना पड़ता है। बच्चों के बैठनेवाली सीट टूटी हुई है, जिस पर किसी तरह एडजस्ट करके बच्चे बैठ तो जाते हैं पर पक्षियों की गंदगी से होनेबाली बदबू से काफी परेशान होते हैं।
विज्ञापन

छात्रों का कहना है कि विश्वविद्यालय की फीस भी बढ़ गई है पर सुविधाओं के बारे में बिल्कुल भी सोचा नहीं गया है। गंदगी के बीच पढ़ाई में मन भी नहीं लगता।
मूलभूत सुविधाओं का भी अभाव
आर्ट्स फैकल्टी की हालत काफी खराब है। शौचालय टूटे और गंदे हैं। कक्षाओं की खिड़कियां टूटी हैं। गर्मी आने वाली है पर कुछ स्थानों को छोड़ दिया जाये तो पीने के पानी मिलना मुश्किल है। कक्षाओं में लगे पंखें भी पुराने जमाने के है जो सिर्फ चलने के लिए चलते हैं। हवा से उसका कोई वास्ता नहीं।
विज्ञापन
विज्ञापन

छात्रों की पीड़ा
एडॅमिशन के समय पता नहीं था कि ऐसी स्थिति होगी। कक्षा की दुर्दशा देखकर मैंनें विषय ही छोड़ दिया। टूटी खिड़कियों से पक्षी आकर पूरी क्लास गंदा कर देते हैं। ऐसे में बैठने की जगह नहीं होती। जो पहले आ जाता वह साफ जगह बैठ जाता है। बाद वाले को उसी गंदगी में बैठना पड़ता है।
हिमांशु, बीए छठा सेमेस्टर


सुबह आने पर कक्षा में बैठने के लिए जगह खोजनी पड़ती है। शिकायत करने पर टूटी खिड़कियों का हवाला दे दिया जाता है। टूटी खिड़कियां सही हो जातीं तो गंदगी की समस्या से निजात मिल जाती। गंदगी में बैठ कर पढ़ने में पढ़ाई पर ध्यान नहीं लग पाता।
सुनील कुमार,बीए


विश्वविद्यालय में पीने के पानी की सुविधा नहीं है। ठंड तो निकल गई। गर्मी आने वाली है, उसमें बगैर पानी के कैसे काम चलेगा। कक्षाओं में लगे पंखें भी पुराने हो गये है। फीस बढ़ गयी है पर सुविधाओं के नाम पर कुछ भी नहीं किया गया है।

रवि गुप्ता,बीए


फैक्लटी की अधिकतर कक्षाओं की खिड़कियों के कांच टूटे हुुए हैं। सीट भी टूटी हुुई है। ऐसी व्यवस्था में पढ़ाई में कम और गंदगी के पर ज्यादा ध्यान जाता है। शौचालयों की व्यवस्था भी खराब है।
पवन सिंह,बीए
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article