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Gorakhpur News: घर लाइए सेवई और बना लीजिए शीर कोरमा
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गोरखपुर। ईद-उल-अजहा यानी बकरीद 17 जून को मनाई जाएगी। इसकी तैयारियां तेज हो गई हैं। जहां लोग बकरों की खरीदारी कर रहे हैं, वहीं बकरीद में मेहमान नवाजी के इंतजाम भी किए जाने लगे हैं। लोगों को मुंह मीठा कराने के लिए भी सेवइयों का बाजार सज चुका है। सेवई की ढेरों वेरायटी बाजार में मौजूद हैं। इन सबके बीच जो सबसे खास है वह है भुनी हुई सेवइयां। इन्हें घर लाइए और शीर कोरमा के साथ अपनी पसंदीदा डिश बना लीजिए। इससे न सिर्फ लोगों को सेवइयों को भूनने में लगने वाला वक्त बचेगा, बल्कि इस समय का सदुपयोग कर लोग दूसरे काम भी कर सकेंगे।
उर्दू बाजार, नखास चौक, घंटाघर, जाफरा बाजार आदि इलाकों में सेवइयों का बाजार भी सज गया है और खरीदारी भी शुरू हो चुकी है। नए जमाने के हिसाब से इस बार बाजार में सेवइयां उपलब्ध कराई गई हैं। नखास के सेवई व्यापारी मोहम्मद अजहरुद्दीन राइन ने बताया कि पहले लोग कच्ची सेवइयां लेकर जाते थे और उसे एक दिन पहले कई घंटे तक भूनते थे। इसमें घर की महिलाओं का काफी समय व्यर्थ होता था।
इसे देखते हुए इस बार बाजार में भुनी हुई सेवइयां भी उपलब्ध हैं, इन्हें बस घर ले जाना है और अपने पसंदीदा तरीके से तैयार कर लेना है। इसकी कीमत भी बहुत अधिक नहीं है, जिसके कारण इस बार इन सेवइयों की खूब मांग है। गर्मी में चूल्हे के सामने बैठक भूनने के झंझट से दूर रहने के लिए महिलाएं भी इस सेवई को प्राथमिकता दे रही हैं। खासतौर पर काम करने वाली महिलाओं की यह पहली पसंद बनी हुई है।
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बाजार में मोटी, बारीक, लच्छेदार के साथ कई वेरायटी की सेवई उपलब्ध है। इनके दाम इनकी गुणवत्ता के हिसाब से तय किए गए हैं। बाहर व आसपास के इलाकों से लोग खरीदारी करने शहर आ रहे हैं। उर्दू बाजार स्थित सेवई सेंटर के मोहम्मद कैस व मोहम्मद आरिफ ने बताया कि उनके यहां छड़ व सादी सेवई, छत्ते वाली सेवई, किमामी सेवई, बनारसी, भुनी सेवई, लाल लच्छा, सफेद लच्छा, बनारसी लच्छा, सूतफेनी, रूमाली, दूध फेनी आदि बिक रही है।
बताया कि इस समय सबसे ज्यादा मांग में बनारसी किमामी सेवई की है, जो हाथों हाथ खरीदी जा रही है। ईद-उल-फित्र व ईद-उल-अजहा में सेवई की खूब बिक्री होती है। सेवइयों की कीमत 60 रुपये से लेकर 140 रुपये प्रति किलो तक है। जबकि भुनी हुई सेवइयां 140 रुपये प्रति किलो के हिसाब से बिक रही हैं।
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उर्दू बाजार, नखास चौक, घंटाघर, जाफरा बाजार आदि इलाकों में सेवइयों का बाजार भी सज गया है और खरीदारी भी शुरू हो चुकी है। नए जमाने के हिसाब से इस बार बाजार में सेवइयां उपलब्ध कराई गई हैं। नखास के सेवई व्यापारी मोहम्मद अजहरुद्दीन राइन ने बताया कि पहले लोग कच्ची सेवइयां लेकर जाते थे और उसे एक दिन पहले कई घंटे तक भूनते थे। इसमें घर की महिलाओं का काफी समय व्यर्थ होता था।
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इसे देखते हुए इस बार बाजार में भुनी हुई सेवइयां भी उपलब्ध हैं, इन्हें बस घर ले जाना है और अपने पसंदीदा तरीके से तैयार कर लेना है। इसकी कीमत भी बहुत अधिक नहीं है, जिसके कारण इस बार इन सेवइयों की खूब मांग है। गर्मी में चूल्हे के सामने बैठक भूनने के झंझट से दूर रहने के लिए महिलाएं भी इस सेवई को प्राथमिकता दे रही हैं। खासतौर पर काम करने वाली महिलाओं की यह पहली पसंद बनी हुई है।
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बाजार में मोटी, बारीक, लच्छेदार के साथ कई वेरायटी की सेवई उपलब्ध है। इनके दाम इनकी गुणवत्ता के हिसाब से तय किए गए हैं। बाहर व आसपास के इलाकों से लोग खरीदारी करने शहर आ रहे हैं। उर्दू बाजार स्थित सेवई सेंटर के मोहम्मद कैस व मोहम्मद आरिफ ने बताया कि उनके यहां छड़ व सादी सेवई, छत्ते वाली सेवई, किमामी सेवई, बनारसी, भुनी सेवई, लाल लच्छा, सफेद लच्छा, बनारसी लच्छा, सूतफेनी, रूमाली, दूध फेनी आदि बिक रही है।
बताया कि इस समय सबसे ज्यादा मांग में बनारसी किमामी सेवई की है, जो हाथों हाथ खरीदी जा रही है। ईद-उल-फित्र व ईद-उल-अजहा में सेवई की खूब बिक्री होती है। सेवइयों की कीमत 60 रुपये से लेकर 140 रुपये प्रति किलो तक है। जबकि भुनी हुई सेवइयां 140 रुपये प्रति किलो के हिसाब से बिक रही हैं।