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Gorakhpur News: बीआरडीः वेंटिलेटर न मिलने से मरीज की मौत पर हंगामा
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-पुलिस ने मामले को शांत कराया, समझाने पर शव लेकर घर चले गए परिजन
- मेडिकल कॉलेज में महिला की हुई थी सर्जरी, फिर बिगड़ने लगी तबीयत
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। बीआरडी मेडिकल कॉलेज में गंभीर हालत में भर्ती एक महिला की वेंटिलेटर नहीं मिलने से बुधवार की रात में मौत हो गई। इस पर भड़के परिजनों ने लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा शुरू कर दिया। सूचना पाकर पहुंची पुलिस ने महिला के परिजनों को समझा बुझाकर शांत करा दिया और फिर शव लेकर परिजन घर चले गए। पुलिस ने किसी भी शिकायत से इन्कार किया है।
जानकारी के मुताबिक, महराजगंज के श्यामदेउरवा थाना क्षेत्र के परतावल छातीराम निवासी शीतला जायसवाल ने पेट में दिक्कत होने पर पत्नी सुनीता जायसवाल (45) को मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया था। सर्जरी विभाग में सुनीता का ऑपरेशन हुआ। परिजनों ने बताया कि ऑपरेशन के बाद से तबीयत में सुधार होने की जगह बिगड़ने लगी। जिसके बाद डॉक्टरों ने इमरजेंसी वार्ड के बेड नंबर 17 पर भर्ती कराया था। बुधवार की शाम महिला को सांस लेने की दिक्कत होने लगी। परिजनों ने डॉक्टरों से संपर्क कर सांस की दिक्कत बताई। डॉक्टर ने मरीज की जांच करके वेंटिलेटर की जरूरत बताई। लेकिन, वेंटिलेटर खाली न होने का हवाला देते हुए मरीज को आईसीयू में शिफ्ट नहीं किया गया। वहीं, रात में सुनीता की हालत बिगड़ती गई और रात करीब आठ बजे उसकी मौत हो गई। मौत के बाद परिजनों ने हंगामा शुरू कर दिया। उनका आरोप है कि अगर, समय से वेंटिलेटर मिल गया होता और बेहतर इलाज होता तो जान बच गई होती।
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कोट
मरीज का ऑपरेशन मेडिकल कॉलेज में किया गया था। डॉक्टर ने अपनी तरफ से पूरी कोशिश की। लेकिन, मरीज की हालत ज्यादा गंभीर हो गई और मौत हो गई। लापरवाही का आरोप पूरी तरह से गलत है।
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डॉ. राजेश राय, अधीक्षक, नेहरू अस्पताल
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- मेडिकल कॉलेज में महिला की हुई थी सर्जरी, फिर बिगड़ने लगी तबीयत
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। बीआरडी मेडिकल कॉलेज में गंभीर हालत में भर्ती एक महिला की वेंटिलेटर नहीं मिलने से बुधवार की रात में मौत हो गई। इस पर भड़के परिजनों ने लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा शुरू कर दिया। सूचना पाकर पहुंची पुलिस ने महिला के परिजनों को समझा बुझाकर शांत करा दिया और फिर शव लेकर परिजन घर चले गए। पुलिस ने किसी भी शिकायत से इन्कार किया है।
जानकारी के मुताबिक, महराजगंज के श्यामदेउरवा थाना क्षेत्र के परतावल छातीराम निवासी शीतला जायसवाल ने पेट में दिक्कत होने पर पत्नी सुनीता जायसवाल (45) को मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया था। सर्जरी विभाग में सुनीता का ऑपरेशन हुआ। परिजनों ने बताया कि ऑपरेशन के बाद से तबीयत में सुधार होने की जगह बिगड़ने लगी। जिसके बाद डॉक्टरों ने इमरजेंसी वार्ड के बेड नंबर 17 पर भर्ती कराया था। बुधवार की शाम महिला को सांस लेने की दिक्कत होने लगी। परिजनों ने डॉक्टरों से संपर्क कर सांस की दिक्कत बताई। डॉक्टर ने मरीज की जांच करके वेंटिलेटर की जरूरत बताई। लेकिन, वेंटिलेटर खाली न होने का हवाला देते हुए मरीज को आईसीयू में शिफ्ट नहीं किया गया। वहीं, रात में सुनीता की हालत बिगड़ती गई और रात करीब आठ बजे उसकी मौत हो गई। मौत के बाद परिजनों ने हंगामा शुरू कर दिया। उनका आरोप है कि अगर, समय से वेंटिलेटर मिल गया होता और बेहतर इलाज होता तो जान बच गई होती।
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कोट
मरीज का ऑपरेशन मेडिकल कॉलेज में किया गया था। डॉक्टर ने अपनी तरफ से पूरी कोशिश की। लेकिन, मरीज की हालत ज्यादा गंभीर हो गई और मौत हो गई। लापरवाही का आरोप पूरी तरह से गलत है।
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डॉ. राजेश राय, अधीक्षक, नेहरू अस्पताल